चर्चा कार
करते हैं बैठ चर्चा, खाली ये जब भी होते, कोई काम इनको करते मैने कभी न देखा. ................................................... वो उसके साथ आती, उसके ही साथ जाती, गर्दन उठा घुमाकर बस इतना सबने देखा. ................................................... खाते झपट-झपट कर, औरों के ये निवाले, अपनी कमाई का इन्हें टुकड़ा न खाते देखा. .................................................... बेचारा उसे कहते, जिसकी ये जेब काटें, कुछ करने के समय पर मौके से भागा देखा. ..................................................... ठेका भले का इन पर, मालिक ये रियाया के, फिर भी जहन्नुमों में इनको है बैठे देखा. ................................