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चर्चा कार /कविता शालिनी कौशिक लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चर्चा कार

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करते हैं बैठ चर्चा,         खाली ये जब भी होते, कोई काम इनको करते          मैने कभी न देखा. ................................................... वो उसके साथ आती,           उसके ही साथ जाती, गर्दन उठा घुमाकर            बस इतना सबने देखा. ................................................... खाते झपट-झपट कर,            औरों के ये निवाले, अपनी कमाई का इन्हें            टुकड़ा न खाते देखा. .................................................... बेचारा उसे कहते,          जिसकी ये जेब काटें, कुछ करने के समय पर            मौके से भागा देखा. ..................................................... ठेका भले का इन पर,         मालिक ये रियाया के, फिर भी जहन्नुमों में          इनको है बैठे देखा. ................................