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झुका दूँ शीश...... पितृ दिवस के अवसर पर

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झुका दूं शीश अपना ये बिना सोचे जिन चरणों में , ऐसे पावन चरण मेरे पिता के कहलाते हैं . ...................................................................................  बेटे-बेटियों में फर्क जो करते यहाँ , ऐसे कम अक्लों को वे आईना दिखलाते हैं . ............................................................................... शिक्षा दिलाई हमें बढाया साथ दे आगे , मुसीबतों से हमें लड़ना सिखलाते हैं . ......................................................................... मिथ्या अभिमान से दूर रखकर हमें , सादगी सभ्यता का पाठ वे पढ़ाते हैं . ................................................................................... कर्मवीरों की महत्ता जग में है चहुँ ओर, सही काम करने में वे आगे बढ़ाते हैं . .............................................................................. जैसे पिता मिले मुझे ऐसे सभी को मिलें , अनायास दिल से ये शब्द निकल आते हैं . .................................... शालिनी कौशिक [कौशल]

औरतें जी का जंजाल - कांधला से कैराना

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कांधला से कैराना और पानीपत ,एक ऐसी बस यात्रा जिसे भुला पाना शायद भारत के सबसे बड़े घुमक्कड़ व् यात्रा वृतांत लिखने वाले राहुल सांकृत्यायन जी के लिए भी संभव नहीं होता यदि वे इधर की कभी एक बार भी यात्रा करते .
       कोई भी बात या तो किसी अच्छे अनुभव के लिए याद की जाती है या किसी बुरे अनुभव के लिए ,लेकिन ये यात्रा एक ऐसी यात्रा है जिसे याद किया जायेगा एकमात्र इसलिए कि इसमें महिलाओं की और वह भी ऐसी महिलाओं की बहुतायत है जिसके पास देश की जनसँख्या को बढ़ाने वाले बच्चे बहुत अधिक मात्रा में उपलब्ध हैं और सारा देश भले ही नारी सशक्तिकरण के लिए तरस रहा हो किन्तु इस सफर में नारी की सशक्तता देखते ही बनती है और पुरुष सशक्त होने के लिए तड़पता दिखाई देता है .
       कांधला से कैराना जाने वालों में एक बड़ी संख्या उस वर्ग की है जिन्हें कैराना पहुंचकर डग्गामार की सवारी द्वारा पानीपत जाना होता है ,डग्गामार वे वाहन हैं जो वैन या जीप में सीट से अधिक ही क्या बहुत अधिक संख्या में यात्रियों को बैठाकर या कहूं ठूसकर पानीपत ले जाते हैं और ठीक यही स्थिति कांधला से कैराना यात्रामार्ग की है जिसमे लगभग एक सीट के हिस…

जज नियुक्ति -NO NEED SUGGESTION OF GOVT

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जजों की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार व् सुप्रीम कोर्ट में विवाद फिर से गहरा गया है ,जहाँ सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम जजों के नाम की सिफारिश नियुक्ति हेतु कर पहली पसंद जाहिर करता है वहीँ दूसरी व् अंतिम पसंद केंद्र सरकार की होती है जिसके चलते कोलेजियम द्वारा की गयी छंटनी और संक्षिप्त बनकर रह जाती है जिसका परिणाम अभी हाल ही में जस्टिस के एम् जोसफ  को कोलेजियम द्वारा सिफारिश किये जाने के बाद  केंद्र सरकार द्वारा नियुक्ति न दिए जाने  रूप में भुगतना पड़ा ,
         और अभी इसी स्थगन को लेकर एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश जी डी इनामदार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल दायर की गयी है -
केंद्र कॉलेजियम की सिफारिशों पर “पिक एंड चूज़” नहीं कर सकता, जस्टिस जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति पर केंद्र के कदम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती ...
 महाराष्ट्र के सोलापुर के एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश जीडी इनामदार द्वारा दायर पीआईएल में न्यायमूर्ति जोसेफ को परिणामस्वरूप वरिष्ठता के संबंध में नियुक्ति के वारंट जारी करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग की गई है। ...
इनामदार ने कहा कि उन्हें कोर्ट …

आसाराम बेटियों का सहारा

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आसाराम दोषी करार, बिटिया के पिता ने कोर्ट का किया धन्यवाद जोधपुर में आसाराम और उसके सहयोगियों को दोषी करार दिए जाने के बाद बिटिया के पिता के चेहरे पर खुशी देखने को मिली। उन्होंने अपने मकान से बाहर आकर मीडिया से कहा कि कोर्ट ने आसाराम और उसके सहयोगियों को दोषी करार दिया है, इसके लिए वह कोर्ट का धन्यवाद करते हैं।  जोधपुर में आसाराम और उसके सहयोगी शिल्पी,शरत को दोषी करार दिए जाने के बाद पहली प्रतिक्रिया देते हुए बिटिया के पिता की पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कहा कि कोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूं। आसाराम और उसके सहयोगियों को आरोपी से दोषी करार दिए जाने पर कोर्ट का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि जिन गवाहों को मरवाया गया, जिन पर हमला कराया गया, जिसे गायब कराया गया, उन मामलों में भी आसाराम और उसके लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। आसाराम केस में बिटिया के पिता ने सबसे पहले मीडिया को धन्यवाद दिया फिर न्यायपालिका पर भरोसा जताया। बोले कि इस लड़ाई में सभी ने मेरा साथ दिया।         ये तो रही एक बिटिया के पिता के ह्रदय की खुशी की बात लेकिन यह फैसला जिस वक़्त आया है वह करोड़ों बिटियाओं के माँ-बाप …

सरकार फिर सफल ?

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सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को अपने फैसले में एस-सी -एस -टी एक्ट के तहत तुरंत गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी और साथ ही सुभाष महाजन के इस केस में अग्रिम जमानत दिए जाने के निर्देश भी दिए ,इसी फैसले के मद्देनज़र दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को विरोध स्वरुप भारत बंद बुलाया और सोशल मीडिया के स्तर पर इसे सफल बनाने की कार्यवाही भी आरम्भ कर दी ,सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी लगातार कहते रहे कि हम पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे लेकिन अफ़सोस 2 अप्रैल से पहले सरकार को इसके लिए समय ही नहीं मिला ,
         2 अप्रैल आयी ,आनी ही थी संगठन इकट्ठे हो गए ,पूरे भारत में भारत बंद का आयोजन जोर-शोर से हुआ और ऐसी ही आशा की भी जा रही थी कम से कम जनता तो ऐसा ही सोच रही थी और सरकार या शाह की तरह वह निश्चिन्त नहीं  थी इसीलिए उस दिन बसों में भीड़ कम थी ,सदियों भी जिन बसों में बैठने को आधी सीट भी नसीब नहीं होती उस दिन दो-दो सीट एक-एक को मिल रही थी और हुआ वही जिसके इंतज़ाम शाह की सोच में भी  थे क्या हम ऐसा विश्वास कर सकते हैं ?
         2 अप्रैल को देश के दस राज्यों में उग्र आंदोलन हुए ,इनमे 15 लोगों की मौत हुई ,मध…

भगवा=एकता

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सरकारी भवनों का रंग तो भाजपानीत सरकार ने पलटा ही था अब भाजपा इस देश को पूर्णतया भगवा रंग में रंगने की साज़िश को अंजाम देने पर आ गयी है जिससे सारे विश्व में भारत की पहचान भगवा रंग ही रह जाये और इसी कड़ी में अब भाजपा लेकर आयी है आपदा प्रबंधन टीम के लिए  भगवा रंग और उस पर तुर्रा ये कि इसमें काला रंग भी है  ऐसा इसलिए कि यह टीम अलग दिखाई दे ,
             सम्पूर्ण विश्व में जिस भारत की पहचान अनेकता में एकता वाली संस्कृति की रही है भाजपा उस पहचान को पूरी तरह मटियामेट करने पर आ गयी है ,आज तक किसी भी सैन्य टुकड़ी की वर्दी ऐसी नहीं रही जो  देश के किसी भी राजनीतिक दल की खास पहचान हो किन्तु भाजपा कॉंग्रेस मुक्त भारत के साथ साथ लगता है देश के संविधान व् संस्कृति को बदलने की ठान कर आयी है,
        पुलिस के किसी भी दल की वर्दी ऐसी होती है जो आमतौर पर एकदम से प्रकृति के रंग से मेल वाली हो और लोगों में सुरक्षा का भरोसा उत्पन्न करने वाली हो लेकिन जो वर्दी एसडीआरएफ टीम की रखी गयी है वह देश में भेदभाव की जड़ें और गहरी खोद देगी क्योंकि यही रंग हिन्दुओं के साधु महात्मा धारण करते हैं ऐसे में मुस्लमान सम…

औरत की तकदीर

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औरत की तकदीर में देखो ,हरदम रोना-धोना है , मिलना उसको नहीं है कुछ भी ,सब कुछ हर पल खोना है , -------------------------------------------------------------------------- तड़प रहेगी उसके दिल में ,जग में कुछ कर जाने की , नहीं पायेगी वो कुछ भी कर ,बोझ जनम का ढोना है , ---------------------------------------------------------------------------- सपना था इस जीवन में कि सबके काम वो आएगी , सच्चाई ये उसका जीवन ,सबकी रोटी पोना है , ----------------------------------------------------------------------- टूट रही है तिल-तिल गलकर ,कुछ भी हाथ न आता है , पता चल गया भाग्य में उसके ,थक हारकर सोना है , ------------------------------------------------------------------------ नारी जीवन में देने को ,प्रभु की झोली खाली है , ''शालिनी '' का मन तड़पाकर ,भला देव का होना है , --------------------------------------------------------------------------- शालिनी कौशिक  [कौशल ]