संदेश

''तभी लेंगे शपथ ........''

चित्र
''औरत ने जनम दिया मर्दों को
         मर्दों ने उसे बाजार दिया .''
      कैसी विडम्बना है जन्म देने वाली की ,जन्म देने का सम्मान तो मिलना दूर की बात है ,अपने प्यार के बदले में प्यार भी नहीं मिलता ,मिलती है क्या एक औलाद जो केवल मर्द की हवस को शांत करने का एक जरिया मात्र है और कुदरत से उसे मिलने वाला कहने को उपहार पर आज की दुनिया को देखा जाये तो यह न तो वरदान है और न ही उपहार .बेटों ने तो अपनी सार्थकता बहुत पहले ही साबित कर दी थी और बाकी ऐसे मर्मान्तक फ़िल्मी गानों ने कर दी और रही बेटियां तो वे अब अपनी सार्थकता साबित कर रही हैं .
          बेटियां पराया धन होती हैं आरम्भ से ही बेटियों को यह कहकर पाला जाता है और इसीलिए बेटियों की माँ-बाप को लेकर कोई जिम्मेदारी नहीं होती पर फिर भी देखा गया है कि बेटियां अपने माँ-बाप का बहुत ध्यान रखती हैं और अपने माँ-बाप के साथ उनके दुःख की घड़ी में एक ढाल के समान खड़ी रहती हैं .बेटियां हमेशा से नरमदिल मानी जाती हैं और यह कोरी कल्पना ही नहीं है सच्चाई है .माँ-बाप का दिल रखने को अपने सारे अरमानों पर पत्थर रख लेने के बेटियों के बहुत सार…

सोनिया गांधी जी जन्मदिन मुबारक हो

चित्र
''कैंची से चिरागों की लौ काटने वालों ,सूरज की तपिश को रोक नहीं सकते ,
    तुम फूल को चुटकी से मसल सकते हो ,पर फूल की खुशबू समेट नहीं सकते .''

      सोनिया गांधी जी भारतीय राजनीति के लिए  फूल के समान हैं जिसकी खुशबू को उनके विरोधी भरसक प्रयत्नों के बावजूद भी खत्म नहीं कर सकते .इसीलिए वे इन्हें कभी विदेशी कह हमले करते हैं तो कभी इनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर इन्हें देश के दुश्मनों की श्रेणी में लाने की कोशिश करते हैं जबकि सोनिया जी का व्यक्तित्व इन सभी आरोपों को ठीक वैसे ही ठेंगा दिखा देता है जैसे कि सूरज के चमकते ही अँधेरे को सूर्य का प्रकाश ठेंगा दिखाता है .

    सोनिया जी का पूर्व जीवन क्या रहा है इसके बारे में आप सभी उनकी विकिपीडिया पर मौजूद जानकारी से इस बारे में जान सकते हैं -

Early life

Sonia Gandhi's birthplace, 31, Contrada Maini (Maini street),Lusiana, Italy (the house on the right)

She was born to Stefano and Paola Maino in Contrada Màini ("Maini quarter/district"), at Lusiana,[13][14] a little village 30 km from Vicenza in Veneto,[15] Italy, …

सुनवाई बीजेपी कण्ट्रोल के बाद

चित्र
बीजेपी का चुनाव घोषणापत्र 1998 का लिंक

       जब से बीजेपी सत्ता में  आयी है तब से हमारा मीडिया तो पहले ही यह शुरू कर चुका है कि किसी भी तरकीब से कॉंग्रेस के किसी भी कदम को ,किसी भी नेता को उपहास की श्रेणी में लाया जाये .पप्पू नाम राहुल गाँधी के लिए इसी मीडिया की देन है और उपहास की ऐसी श्रेणी जिसकी इज़ाज़त भारतीय लोकतंत्र कभी नहीं देता किन्तु जब सत्ताधारी ही इस कदर उच्छृंखल हो तो उससे वाहवाही लूटने को ये सब हथकंडे इस्तेमाल किये ही जाते हैं पर आज दुःख उच्चतम न्यायालय द्वारा सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल के रोजाना सुनवाई होने से 2019  के चुनावों पर पड़ने वाले फर्क के तर्क को मानने से इंकार पर है जो कि कॉंग्रेस की स्थिति पर फिर मजाकिया सवाल खड़ा कर गया है क्योंकि सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील बाई-चांस कॉंग्रेस के वरिष्ठ सदस्य भी है .
            भारतवर्ष में करोडो केस चल रहे हैं और सभी केस लगभग रोज़ सुनवाई की दरकार रखते हैं और कितने ही लोग रोज़-रोज़ की तारीखों से तंग आकर अपने हित को छोड़कर फैसले कर मामला निबटा लेते हैं .दीवानी मामलों में तो लगभग यही स्थिति चल रही है फौजदारी मजबूरी में झेलन…

ऐसा साधु देखा कभी

चित्र
बड़े बड़े शहरों में ,महानगरों में जाम की समस्या से सामना होता ही रहता है और इसे बड़े शहरों के लिए एक वरदान के रूप में स्वीकार भी लिया जाता है किन्तु छोटे कस्बे और गावों के लिए जाम को स्वीकार नहीं किया जा सकता इनमे ज़िंदगी आसान ही इसीलिए होती है क्योंकि इनमे किसी भी जगह जाने के लिए समय नहीं गंवाना पड़ता और हर जगह पैदल पहुँच में होती है लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में २८ सितम्बर २०११ को बना शामली जिला इस मामले में अनोखा है .
       दुनिया का एक नियम है वह अपने सभी दुःख अपने तक सीमित रखना चाहती है और सुख बाँट देना चाहती है किन्तु यह जिला सारे सुख तो खुद में समेट लेना चाहता है और अपने सभी दुःख -परेशानियां सबको बाँट देने के लिए तत्पर रहता है .इसका एक मुख्य उदाहरण शामली जिले में जिला जज की कोर्ट स्थापना का मामला है .शामली जिले में कोर्ट की स्थापना के लिए स्थान नहीं है और जिला जज की कोर्ट तो दूर की बात है वहां तो आज तक सिविल जज [जूनियर डिवीज़न ]की कोर्ट भी नहीं है और इन सभी कोर्ट की स्थापना के लिए एक लम्बी अवधि और एक बहुत बड़ा क्षेत्र चाहिए और शामली जिले की ही तहसील कैराना में  ए.डी.जे.कोर्ट त…

मोदी का सच -... तो खरीददार कौन ?

चित्र

हाफिज तेरे पाकिस्तान की खैर नहीं

चित्र
२००८ के मुंबई हमलों की नौवीं बरसी आ गयी है और अभी तक इसके मास्टर माइंड सजा से बहुत  दूर हैं दुःख होता है जब भी अपने शहीदों को याद करते हैं और सबसे ज्यादा दुःख तब होता है जब हमारे कर्मठ व् युवा अधिकारियों के असमय काल का ग्रास बन जाने के जिम्मेदार लोगों के सिर पर कोई रहम का हाथ रखता है और यह रहम का हाथ किसी और का न होकर अपने ही भाई का , जिगर के टुकड़े पाकिस्तान का हो तब खून में उबाल आ जाता है  और पाकिस्तान ने एक बार फिर हमारे खून को उबाल दिया है मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद को नज़रबंदी से रिहा करके।  मुंबई में बुधवार, 26 नवम्बर 2008 को  देर रात मशहूर होटलों के समीप तथा कई अन्य प्रमुख जगहों पर कुछ समय के अंतराल में हुए दर्जन भर शृंखलाबद्ध विस्फोट और गोलीबारी हुई, जिसमें 237 लोगों की मौत हो गई थी जबकि लगभग 300 लोग घायल हो गए थे। पुलिस के अनुसार केवल मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस स्टेशन पर गोलीबारी में ही 10 लोगों की मौत हो गई थी । छत्रपति शिवाजी टर्मिनस स्टेशन के अतिरिक्त ताज होटल, होटल ओबेरॉय, लियोपोल्ड कैफ़े, कामा अस्पताल तथा दक्षिण मुंबई के अन्य अनेक स्थानों पर हमले की सूचन…

......लो फिर बिक गया .....

चित्र
कल से उत्तर-प्रदेश में नगरपालिका चुनावों में पहले चरण का मतदान आरम्भ होने जा रहा है .सभी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए निष्पक्ष एवं स्वतंत्र मतदान करेंगे.इससे बड़ा झूठ इस भारतीय लोकतंत्र में नहीं हो सकता. निष्पक्ष एवं स्वतंत्र मतदान की हामी भरने वाला भारतीय लोकतंत्र किस हद तक निष्पक्ष एवं स्वतंत्र है इसे हमारे नेतागण से कहीं ज्यादा हमारे वोटर जानते हैं जो भारतीय लोकतंत्र में मतदान का कार्य तो करते हैं किन्तु पूरी तरह से लालच की भावना के वशीभूत होकर और यह कोई एक दो दिन की तैयारी से नहीं वरन वर्षो पुरानी सोची-समझी रणनीति के तहत किया जाता है .
     एक व्यक्ति की वोट एक जगह ही होगी हमारी सरकार व् सुप्रीम कोर्ट इसके लिए प्रयत्नशील है और इसके लिए ही वह आधार कार्ड को लेकर ज़रूरी घोषणाओं में व्यस्त है क्योंकि आधार कार्ड अगर ज़रूरी हो गया तो पूरे भारत वर्ष में एक व्यक्ति की एक जगह की उपस्थिति पूरे देश में उसकी उपस्थिति मानी जाएगी क्योंकि आधार नंबर पूरे देश में एक ही होता है क्योंकि इस नंबर में व्यक्ति के अंगूठे की छाप ली जाती है और ये नहीं पलटती इसलिए आदमी का नंबर भी नहीं पलट स…