मंगलवार, 6 दिसंबर 2016

बोलो जनता जिंदाबाद

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'आस-पास ही देख रहा हूँ मिटटी का व्यापार ,

चुटकी भर मिटटी की कीमत जहाँ करोड़ हज़ार ,
और सोचता हूँ आगे तो होता हूँ हैरान
बिका हुआ है कुछ मिटटी के ही हाथों इंसान .''
कविवर गोपाल दास ''नीरज '' की ये पंक्तियाँ इस वक़्त के भारतीय जनमानस की मनोदशा का अक्षरशः परिचय देने हेतु पर्याप्त हैं .हालाँकि ऐसी बातें कहनी नहीं चाहिए क्योंकि सच बोलने की सलाह सब देते हैं किन्तु उसे सुनना कोई नहीं चाहता इसीलिए गाँधी जी के लिए भी मजबूरी ''मजबूरी का नाम महात्मा गाँधी ''जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि उनके जैसा बनना इस वक़्त के भारतीयों के लिए मुश्किल है जो सत्य के सबसे बड़े पुजारी थे लेकिन आज की जनता सच नहीं सह सकती और फलस्वरूप ऐसी बातें कहीं न कहीं किसी न किसी नेता के समर्थकों को कष्ट पहुंचाती हैं और यह कष्ट माहौल में उथल-पुथल का कारण बन जाता है किन्तु वह कलम ही क्या जो सच कहने से रुक जाये ,वैसे भी डॉ.शिखा कौशिक ''नूतन '' ने कहा भी है -
''हमारे हाथ में है जो कलम वो सच ही लिखेगी ,
कलम के कातिलों से इस तरह करनी बगावत है .''
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे.जयललिता अपने समर्थकों को इस दुनिया में अकेले छोड़ गयी और उनके समर्थकों के दुःख के कारण ही वहां के हालात सँभालने को तमिलनाडु में पुलिस व् फ़ोर्स को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है .अम्मा का जाना वहां उनके चाहने वालों के लिए भगवान् का कहर है ,क्योंकि उनके अनुसार वे गरीबों की माँ थी लेकिन यहाँ उनसे इतनी दूर बैठे हम उन्हें मीडिया के जरिये ही जानते हैं और जिसके अनुसार जयललिता विवादस्पद जमीन सौदे , ग्रेनाइट खनन में फंड के दुरूपयोग ,आय के स्रोतों से अधिक धन ,आय से अधिक संपत्ति मामले में जेल आदि भ्रष्टाचार के मामलों से जुडी थी ,पर जनता को इससे क्या ,जनता के लिए तो वे गरीब-नवाज़ थी ,भले ही वे ऐ.आई.डी.ऍम.के.के करिश्माई नेता ऍम.जी.रामचंद्रन के अमरीका के अस्पताल में भर्ती होने पर राजीव गाँधी के सामने स्वयं को मुख्यमंत्री बनने की मांग करने पहुँच जाएँ ,भले ही ऍम.जी.रामचंद्रन की पहली पत्नी होते हुए और उन्हें [जयललिता को ] पत्नी का कोई दर्जा प्राप्त न होते हुए भी वे ऍम.जी.रामचंद्रन की मृत्यु पर स्वयं को उनकी विधवा के रूप में पेश करें ,जो जनता संस्कारों की बात करती है ,पत्नी के अधिकार की बात करती है उसे यहाँ इन बातों से कोई लेना देना नहीं है वह केवल अपना हित देखती है जो वोट की खातिर उनसे जुड़ा रहता है और जिसका दम हर बड़ा नेता भरता है.
     १९७५ में आपातकाल ,१९८४ में ऑपरेशन ब्लू स्टार  भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी के विवादास्पद  कदम रहे और १९८४ का ऑपरेशन ब्लू स्टार तो इनके लिए मारक साबित हुआ किन्तु १९६६ से लेकर १९८४ तक उनके बहुत से विवादास्पद क़दमों के बावजूद जनता का साथ इन्हें मिलता रहा यहाँ तक कि लोकप्रिय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु में इनके द्वारा साजिश किये जाने की सम्भावना भी जनता का साथ इनके साथ ख़त्म करने में व्यर्थ साबित हुई .क्योंकि एक बार फिर कहूँगी जनता पर कोई फर्क नहीं पड़ता .१९७५ में उनके द्वारा लगाए गए आपातकाल के कारण वे चहुँ ओर निंदा का कारण बनी ,जनता ने उन्हें विपक्ष में बिठाया किन्तु फिर १९८० में जनता का उन पर फिर विश्वास जम गया कैसा विश्वास है जो बार बार इन नेताओं पर जम जाता है जिसे कांच के समान कहा जाता है पर इनके मामले में वह कढ़ाई में पड़े हलवे के समान हो जाता है जो चाहे कहीं से ले लिया जाये वापस अपने पुराने आकार में पहुँच जाता है , और १९८० में जनता ने फिर सत्ता उन्हें सौंप दी ,कारण यही है कि जनता की महत्वाकांक्षाएं बार बार जन्म लेती हैं और उनकी आँखें नेताओं के दिखाए गए सुनहरे सपने ही देखने में अपना भला देखती हैं क्योंकि ये जनता जितना खुद को दुखी दिखाती है  इतना तो कोई है ही नहीं .उसकी मनोभावना पर हरबंस सिंह ''निर्मल '' कहते हैं -
''पिला कर गिराना नहीं कोई मुश्किल ,
 गिरे को उठाये वो कोई नहीं है .
 ज़माने ने हमको दिए जख्म इतने ,
 जो मरहम लगाए वो कोई नहीं है .''
   मुलायम सिंह ,उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता ,समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष ,तीन-तीन बार मुख्यमंत्री और वो भी तब जब अपनी पार्टी के दूसरे काल में ही उन्होंने रामपुर तिराहा कांड कराया .२ अक्टूबर १९९४ को उत्तराखंड के कार्यकर्ताओं पर गोली चलवाई ,पूरे उत्तर प्रदेश के मालिक बन केवल सैफई को चमकाया ,तब भी जनता ने उन्हें बार बार सत्ता और अपनी सुरक्षा सौंपी जिसका जिम्मा इनकी पार्टी ने २०१३ में कितनी अच्छी तरह उठाया सभी के सामने है .तब भी आगे ये यूपी की सत्ता नहीं पाएंगे ऐसा नहीं कहा जा सकता क्योंकि जनता के अपने मकसद पूरे होने चाहियें और जैसे कि उन्होंने स्वयं को भारत के मुसलमानों का रहनुमा प्रदर्शित किया है वह इन्हें यूपी की सत्ता दिलाता ही रहेगा क्योंकि मुसलमानों को असुरक्षा का अहसास दिलाने को ये हैं और अपनी सुरक्षा के केंद्र मानने को मुसलमानों का दिमाग .
        ''मायावती '' उत्तर प्रदेश की चार-चार बार मुख्यमंत्री ,पहली दलित महिला मुख्यमंत्री ,दलितों का वोट बैंक इनको नहीं छोड़ता भले ही ये दलितों को इधर-उधर छोड़ दें ,ज़मीन से उठी ये नेताजी आज कई कोठियों की मालिक हैं ,जगह जगह पर्स लटकाये इनकी मूर्तियां हैं ,इनका जन्मदिन इनकी ज़िन्दगी का सुनहरा दिन है ,ताज कॉरिडोर केस , आय से अधिक संपत्ति मामले इनके विकिपीडिया की शान हैं भले ही जिनकी वोट ले ये मैडम बन घूमती हैं उनके पैरों में चप्पल भी न हो ,भले ही जिनसे नोट ले ये जन्मदिन का केक काटती हैं केक काटने वाला चाकू उन्हीं की गर्दन पर चल जाये ,वोट इन्हीं को मिलेंगी .उत्तर प्रदेश की सत्ता यहाँ के लोगों ने मायावती व् मुलायम में ही बाँट दी है भले ही यूपी का सत्यानाश हो जाये जनता का मकसद पूरा होना चाहिए जिसे उनके अनुसार इनमे से कोई  एक ही पूरा कर सकता है .
     और अब आते हैं इस समय देश के बहुसंख्यक समाज- हिन्दू समाज की धड़कन माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी पर ,टाइम पर्सन ऑफ़ थे ईयर के रीडर्स पोल में जीते मोदी जी इस वक़्त भारतीय हिन्दू जनता की आँख का तारा बने हुए हैं जिन्हें ये किसी फ़रिश्ते से कम नहीं लगते ,कारण ये कि उनके समय में जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री  थे तब राज्य रिपोर्ट के अनुसार ७९० मुस्लिम वहां मारे गए थे ,भले ही वहां के दंगों में २५४ हिन्दू भी मारे गए हों किन्तु जब इनके समर्थकों के बीच इन्हें गुजरात के दंगों के लिए दोषी ठहराया जाये तो वे भड़क उठते हैं गोधरा को लेकर ,जबकि जब गोधरा हुआ तब मोदी ही वहां के मुख्यमंत्री थे और जब अन्य किसी के शासनकाल में कोई घटना हो जाये तब अभिभावी सरकार को ही ये समर्थक जिम्मेदार ठहराते हैं तो इस दायित्व से अपने पसंदीदा मोदी को मुक्ति क्यों ? अलग अलग नेता के लिए ये जनता अलग अलग मानक अपनाती है और आज इस जनता के दिलो-दिमाग पर हावी है मोदी द्वारा ८ नवम्बर को काले धन पर आक्रमण को लेकर की गयी नोटबंदी और हर तरफ उनके इन चारण-भाटों द्वारा उनकी विरदावली गायी  जा रही है . स्थिति इतनी बदतर है कि अपने अपनों का दर्द उनके लिए कोई मायने नहीं रख रहा है बल्कि मोदी के इस काम के आगे उन्हें अपनों में ही खोट नज़र आ रहा है .काले धन को लेकर मोदी का यह दांव आज गरीब आदमी पर ही भारी पड़ गया है और हिन्दू-मुस्लिम के बीच जो खाई पूर्व में मोदी व् उनकी पार्टी ने खोदी  है उसका परिणाम यह है कि जो कभी भाई थे वे आज दुश्मन हैं और अगर वे अपने ही नोट लेने को लाइन में खड़े हैं तो इन्ही अंधभक्तों द्वारा उन्हें कमीशन एजेंट कहा जा रहा है और स्वयं मोदी के एहसान तले सबको दबाने का प्रयास किया जा रहा है केवल इसलिए कि मोदी पर इन्हें ये भरोसा है कि ये इन्हें मुसलमानों से मुक्ति दिलाएंगे जिनके कदमो तले देश पर अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले महात्मा गाँधी इन्हें दबा गए हैं .मोदी जो आज सत्ता में हैं इनसे यह कभी भी यह अंधभक्त जनता नहीं पूछेगी कि आपने सत्ता में आने के लिए कौनसा धन इस्तेमाल किया और जो अपनी परिवतन रैली में स्वयं को फ़कीर कह झोला लेकर चलने की बात कह रहे हैं वे चलते वक्त कौनसा सूट पहनकर जाने वाले हैं ?वही लाखों वाला या कोई और नया और अपने झोले में और क्या समेटकर ले जाने वाले हैं फ़क़ीर तो खाली खरताल बजाता  जाता है उसके पास तो कोई झोला नहीं होता  लेकिन मोदी विशेष फ़क़ीर हैं वे झोला लेकर जायेंगे आखिर अपना काला  धन भी तो ले जाना है ,लेकिन यह अंधी जनता उनसे यह सब नहीं पूछेगी क्योंकि उन्हें ये हिंदुओं के पहरेदार नज़र आते हैं उनके अनुसार मोदी न होंगे तो यहाँ के सभी हिंदुओं को खतना  कराना पड़ेगा ,नारी सम्मान हित बड़ी बड़ी बातें करने वाले मोदी ने दिग्विजय सिंह द्वारा प्रगट किये जाने से पूर्व जशोदा बेन उनकी पत्नी हैं ये भी किसी को नहीं बताया था ,कुंवारे बने फिरते थे किन्तु नारी के लिए बड़ी बड़ी सीमा रेखाएं बाँधने  वाली ये जनता उनसे इसका भी जिक्र नहीं करेगी क्योंकि कहीं ऐसा करने से मोदी का ध्यान उनकी सुरक्षा पर से हट गया तो भुगतना तो जनता को ही पड़ेगा .ये ज़हर घोला है मोदी की सोच ने जनता में और जनता है कि उसे अपने लाभ हानि को तोल पिए जा रही है ,इसीलिए तो पंडित विजेंदर पाल  शर्मा जी कहते हैं -
''लो परिवर्तन आ गया ,हो गया जग का लाल रक्त पानी ,
 अब हानि-लाभ से तोल रही रिश्तों को दुनिया दीवानी .''
       ऐसे में भले ही कितने चुनाव करा लिए जाएँ , भले ही प्रजातंत्र  कह लिया जाये इस देश का कुछ भी भला संभव नहीं है .वैसे भी जनता का ,जनता के लिए ,जनता के द्वारा किया गया शासन प्रजातंत्र है यह तो सभ्य समाज की भाषा है यहाँ सभ्यता है ही कहाँ जनता में ,वह तो निरी मूर्खों वाली बातें कर रही है इसलिए इसे निश्चित रूप में जो प्रजातंत्र की सही परिभाषा दी गयी है वही दी जा सकती है अर्थात ''प्रजातंत्र मूर्खों का ,मूर्खों के लिए ,मूर्खों के द्वारा किया गया शासन है क्योंकि यहाँ जनता नेताओं के अनुसार चल रही है  और अपने क्षुद्र मकसद उनसे पूर्ण करा आज के प्रगतिवादी युग में सफलता का अनुभव कर रही है ऐसे में भले की उम्मीद ही बेमानी है .किसी भी देश का भला हम तभी देख पाते हैं जब उसके नागरिकों में देश हित में अपने हित कुर्बान करने की भावना हो .सबको रोटी तभी मिल सकती है जब कुछ लोग अपना पेट काटने को तैयार हों ,आज की स्थितियों में सबको पानी तभी मिल सकता है जब सब थोड़ा-थोड़ा बांटें ,कहा भी है -
  ''तेरा मेरा मत कर सासु ये पानी तो सबका है ,
  थोड़ा थोड़ा बाँट ले इसको ,ये पानी तो सबका है .
  और ये यहाँ नहीं हो सकता क्योंकि हम बाँट नहीं सकते केवल लूट सकते हैं इसलिए केजरीवाल को झूठा कहते हैं ,ममता बैनर्जी को कोसते हैं ,सच बोल नहीं सकते ,सुन नहीं सकते केवल सलाह दे सकते हैं तब क्या फायदा चुनावों का जब हमें गलत ही करना है और ये हमारी गलत का साथ देने की ही आदत है जो हमें सच का सामना नहीं करने देती और न ही करने देगी और हमें इसी तरह सच बोलने वालों से दुश्मनी रखने को मजबूर करती रहेगी और हमारे इस प्रजातंत्र को ''मूर्खों का शासन '' कहलाती रहेगी .
   ''मैंने सच बोला तो बरसाए जहाँ ने पत्थर ,
    जहाँ को सच बोलने वालों से अदावत क्यों है .''

शालिनी कौशिक
   [कौशल ]






शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016

”ये भी मुमकिन है वक़्त ले करवट …..”

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''बस तबाही के ही आसार नज़र आते हैं ,
लोग जालिम के ही तरफदार नज़र आते हैं ,
ज़ुल्म भी हम पे ही होता है ज़माने में सदा
और फिर हम ही गुनाहगार नज़र आते हैं .''
डॉ. तनवीर गौहर की ये पंक्तियाँ आज अगर हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा की गयी नोटबंदी से उपजे हालात पर गौर करें तो गुनाहगारों की भीड़ में निर्दोष आम जनता पर ही खरी उतरती हुई पाते हैं .कालाधन ख़त्म करने के मुद्दे को जोर-शोर से उठा सत्ता में आये मोदी जी ने ८ नवम्बर की रात से ५००-१००० के नोट बंद कर दिए और स्वयं के इस कदम को दुस्साहसिक कदम की श्रेणी में लिखा दिया और अपने समर्थकों को अपनी तारीफ के लिए कुछ और शब्दों का जाल दे दिया लेकिन अपने इस कदम से जिस आम जनता का उन्होंने जीना-मरना-खाना-पीना मुहाल कर दिया उसके लिए सिवाय ५० दिन मांग आंसू बहाने के स्थान पर सहयोग का ,सांत्वना का कोई कदम नहीं उठाया और वह बेचारी आम जनता जो भले ही कोई सरकार आ जाये दुखों का बोझ कंधें पर उठाकर फिरने के सिवाय कुछ नहीं कर सकती, अब भी वही कर रही है. लगभग महीना भर बीतने के बावजूद बैंकों की कतार में खड़ी है और रोज़ी रोटी को तरसती ये जनता ,भूखी प्यासी मरती ये जनता बैंकों में अपना ही पैसा होने के बावजूद अपने ही ऐसे साथियों द्वारा जो मोदी के अंध-समर्थक हैं चोर व् नाटकबाज कही जा रही हैं .मोदी के ये समर्थक इस हद तक मोदी के हाथों की कठपुतली हैं कि अपने रोजमर्रा के कामकाज बगैर पैसों के होने पर मोदी के इस कदम के खिलाफ ऊँगली उठाने वालों को ललकारते हुए कहते हैं कि '' तुम्हें कोई दिक्कत हुई ?'' वे इस बात को बिलकुल नज़रअंदाज़ कर रहे हैं कि ये स्थिति हर किसी के साथ नहीं है ,हर आदमी क्रेडिट नहीं रखता ,हर आदमी को सामान मुफ्त में नहीं मिलता और यदि ये कहें कि वे दिमाग से खुद को पैदल दिखा रहे हैं तो ऐसा भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि जैसे ही उनसे कहा जाता है कि नोटबंदी से पहले बैंकों में बदलने की व्यवस्था पूरी कर देनी चाहिए थी तो ये अंध समर्थक तपाक से कहते हैं-''वाह जी ऐसे तो सारी बात पहले ही लीक हो जाती और कालाधन कैसे बाहर आता ?''
हिन्दू समाज में देवोत्थान एकादशी से आरम्भ विवाह का मौसम मोदी के इस कदम के कारण मृत्युकाल में परिवर्तित हो गया है ,पैसे न मिलने के कारण कहीं बाप मर रहा है तो कहीं ब्याहने जा रही कन्या ही अपने परिजनों पर पड़ी विपत्ति को देख छत से कूदकर आत्महत्या कर रही है और मोदी समर्थक इसे मीडिया की कोरी अफवाह बता रहे हैं .वही मीडिया जिसे अबसे कुछ ही समय पूर्व ''मोदी महिमा मंडन'' के कारण सिर आँखों पर बैठाया जा रहा था आज वही मीडिया पैरों तले कुचली जाने को विवश है क्योंकि वह आम जनता का दर्द सबके सामने ला रही है .
यही नहीं नोटबंदी इफेक्ट जो इस वक़्त सामने आ रहे हैं उनसे पूरी तरह बर्बादी की तस्वीर हमें दिखाई दे रही है .आलू बीज बाजार में मंदी,बीस लाख बोरी से अधिक आलू बीज फैंकने की नौबत से किसान मुश्किल में ,ढाबों की आमदनी घटी,करोड़ों के चेक डंप होने से ग्राहकों की परेशानी आदि बहुत सी ऐसी परेशानियां हैं जिन्हें मोदी जी की तानाशाही के रूप में आम जनता को भुगतना पड़ रहा है  और मोदी जी को ये सारी जनता बेईमान ही नज़र आ रही है  क्योंकि उनके अनुसार उनके इस कदम से केवल बेईमान ही परेशान हैं तो इसका साफ साफ़  मतलब सारी जनता अगर परेशान है तो सारी जनता ही बेईमान सिर्फ  मोदी के अंधभक्तों को छोड़कर क्योंकि उनका काम बगैर पैसे के हो रहा है और जो मोदी जी के कैशलैस सोसायटी का सपना देखने से पहले ही उसे अमल में ला रहे  है .
मोदी जी का ये कदम आम जनता को भले ही रोज़ी-रोटी के बारे में सोचने को विवश कर दे पर इनके समर्थकों व् पार्टी के लिए संजीवनी के समान समझा जा रहा है .नोटबंदी के बाद से चुनावों में मिली सफलता उन्हें उत्तर-प्रदेश को अपने कब्जे में लेने के सपने सजाने को तैयार कर रही है उसी यूपी की जनता जिसे उन्होंने रात-दिन बैंकों की लाइन में खड़े रहने को विवश कर दिया ,काले धन की सबसे बड़ी कब्जेदार मानी जाने वाली उसी यूपी की जनता को पहले राम मंदिर बनाने के नाम पर और अब नोटबंदी से भ्रष्टाचार के खिलाफ अचूक हथियार के नाम पर फुसलाया जा रहा है ,ठगा जा रहा है और नहीं देखा जा रहा है आम जनता की परेशानी को ,दिक्कत को .अपने स्वार्थ हित की पूर्ति के लिए मजबूर जनता को बैंकों के आगे कतार में खड़ा कर दिया गया जो  नोट बदलने का नंबर आ जाये इस इंतज़ार में रात के २-३ बजे से ही लिहाफ लेकर बैंक के आगे लाइन में सो रही है और सुबह से भूखे पेट खड़े रहकर भी खाली हाथ घर लौट रही है और कहीं कहीं लाइन में खड़ा आदमी आता जिन्दा है और जाता लाश बनकर है .और बैंक सरकार के पास जनता की मांग के अनुरूप नोट न होने पर मजबूरीवश जनता का आक्रोश झेल रहे हैं और निरंतर खौफ में जी रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि जितनी संख्या में जनता यहाँ उपस्थित है उतनी संख्या में सुरक्षा बल उन्हें प्राप्त नहीं है और अगर सुरक्षा बल यहाँ लगा दिया जाये तो देश की उन सीमाओं का क्या होगा जहाँ देश के दुश्मन निरंतर घात लगाए बैठे हैं और हमले भी कर रहे हैं .
राम मंदिर के नाम पर यूपी की जनता को पहले ही छला जा चुका  है और आजतक भी उस राम मंदिर की नींव की खुदाई तक का काम शुरू नहीं हो पाया है जिसके लिए भाजपा ने खुद की खाल बचाते हुए उत्तर प्रदेश की जनता को बलिदान देने तक को विवश कर दिया और अब नोटबंदी ,बेनामी संव्यवहार ,सोने पर नियंत्रण द्वारा भ्रष्टाचार की नकेल कसने का बहाना कर जिस तरह मोदी-शाह और इनकी भाजपा ने इस देश के रहनुमा बनने का ढोंग किया है वह कितना सफल रहेगा ये तो आने वाला वक़्त बताएगा ,हमारा मन तो मात्र इतना ही कह सकता है -
''आज माना कि इक्तदार में हो .
हुक्मरानी के तुम खुमार में हो ,
ये भी मुमकिन है वक़्त ले करवट
पांव ऊपर हों सिर तगार में हो .''

शालिनी कौशिक
[कौशल ]

शनिवार, 19 नवंबर 2016

इंदिरा गांधी जी के 100 वें जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

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अदा रखती थी मुख्तलिफ ,इरादे नेक रखती थी ,
वतन की खातिर मिटने को सदा तैयार रहती थी .
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मोम की गुड़िया की जैसी ,वे नेता वानर दल की थी ,,
मुल्क पर कुर्बां होने का वो जज़बा दिल में रखती थी .
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पाक की खातिर नामर्दी झेली जो हिन्द ने अपने ,
वे उसका बदला लेने को मर्द बन जाया करती थी .
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मदद से सेना की जिसने कराये पाक के टुकड़े ,
शेरनी ऐसी वे नारी यहाँ कहलाया करती थी .
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बना है पञ्च-अग्नि आज छुपी है पीछे जो ताकत ,
उसी से चीन की रूहें तभी से कांपा करती थी .
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जहाँ दोयम दर्जा नारी निकल न सकती घूंघट से ,
वहीँ पर ये आगे बढ़कर हुकुम मनवाया करती थी .
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कान जो सुन न सकते थे औरतों के मुहं से कुछ बोल ,
वो इनके भाषण सुनने को दौड़कर आया करती थी .
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न चाहती थी जो बेटी का कभी भी जन्म घर में हो ,
मिले ऐसी बेटी उनको वो रब से माँगा करती थी .
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जन्मदिन ये मुबारक हो उसी इंदिरा की जनता को ,
जिसे वे जान से ज्यादा हमेशा चाहा करती थी .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

गुरुवार, 17 नवंबर 2016

तो ये हैं मोदी के अच्छे दिन

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''कर दिया न मोदी ने फिर सर्जिकल स्ट्राइक ''कह जैसे ही साथी अधिवक्ता ने मोदी की तारीफ सुननी चाही तो सही में इस बार मन कड़वा हो गया अभी तक तो अपनी राजनीतिक नापसंदगी के कारण मोदी की तारीफ करने को मुंह नहीं खुलता था किन्तु आज मोदी के इस काम के कारण उसकी तारीफ करने को सच में मन ही नहीं किया .हमारे क़ानूनी जीवन में एक उक्ति है ''भले ही निन्यानवे गुनाहगार बच जाएँ किन्तु एक निर्दोष को सजा नहीं मिलनीचाहिए . ''और यहाँ निर्दोषों को ही सजा मिल रही है .जिस दिन से मोदी ने ५००-१००० के नोट बैन किये हैं हमारे समाचार पत्र व् आस-पास का जगत निर्दोषों की मृत्यु के समाचारों से भरा पड़ा है और मोदी के अंध-भक्त मीडिया की इन ख़बरों को उसके प्रचार करने की पुरानी आदत कह रहे है अब भला इन्हें कोई ये बताये कि अगर आप ही सही हैं तो पिछले दिनों जो मीडिया मोदी मोदी की तारीफों के पुल बांधे था क्या वह इसकी इसी आदत के कारण था या वास्तव में आपके मोदी में कुछ खास होने के कारण था ?
        श्री रामचरितमानस में एक प्राचीन कहावत है -
     ''जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी ,
             सो नृप अवसि नरक अधिकारी .''
   और मोदी ३० दिसंबर के बाद काले धन पर और सख्त कदम उठाने की बात कह रहे हैं ,कह रहे हैं कि बेईमानों से लूँगा आज़ादी के बाद से अब तक की पाई पाई का हिसाब जबकि पहले वे ये तो पता लगा लें कि जिस कदम से वे काले धन के खिलाफ कदम उठा रहे हैं वह कदम उनका आम जनता को कितना भारी पड़ रहा है और जिन राम का नाम लेकर वे सत्ता में आये हैं उन्ही राम के आदर्श जीवन के अनुसार ये कदम उनकी प्रजा के लिए काल का मुख बन रहा है और इस कदम के बारे में उनके अंध-भक्तों के अनुसार सर्जिकल स्ट्राइक जैसी उपाधि  आने के कारण सुप्रीम कोर्ट तक को कहना पड़ गया है -''कि काले धन और नकली नोटों पर लगाम लगाने के लिए आपका कदम अच्छा हो सकता है  लेकिन पुराने नोट रखने वाले हर व्यक्ति के लिए यह नहीं कहा जा सकता कि उसके पास काला धन है ..अदालत ने कहा कि आप काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक कर सकते हैं ,लेकिन देश के लोगों पर नहीं .  पीठ ने सरकार से कहा कि आम धारणा ये है कि उन लोगों को परेशानी हो रही है जिनका काले धन से कोई लेना देना नहीं है .काले धन को लेकर जिन लोगों पर टारगेट है ,क़तर में खड़ा व्यक्ति वे नहीं हैं .पीठ ने कहा ये कार्पेट बॉम्बिंग है क्योंकि इससे सभी लोग प्रभावित हो रहे हैं .''पीठ ने कहा ,''लोग अपने पैसे निकालने के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं .हो सकता है कि उनकी रकम जायज हो ,यानि कि इसके लिए उन्होंने कर अदा किया हो .''
         दिहाड़ी मजदूर ,सब्जी विक्रेता बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें परेशानी हो रही है लेकिन स्वतंत्र भारत के अंध-भक्तों को मोदी से बेहतरीन प्रधानमंत्री नहीं दिखता जबकि मोदी इस वक्त अपने इस कदम के कारण हमारी इस कहावत के कारण नरक के अधिकारी हैं क्योंकि उन्हें जनता का कष्ट नहीं दिख रहा है वे जनता को कभी बेईमान कह रहे हैं तो कभी उससे रो-रोकर ५० दिन मांग रहे हैं जबकि बेहाल जनता ५० घंटे भी देने को तैयार नहीं है और कौन दे सकता है उन स्थितियों में जिनमे मोदी ने ५००-१००० के नोट बैन कर दिए  .''देवोत्थान एकादशी '' हिंदुओं में शादी विवाह के प्रारम्भ का मुहूर्त है और सभी जानते हैं कि शादी विवाहों में बड़ी संख्या में बड़े नोट प्रयोग में आते हैं ऐसे में ठीक एक दिन पहले दोनों ही बड़े नोटों को बैन कर मोदी जी ने आम जनता को मरने  के लिए मजबूर कर दिया है कहीं किसान बेटी के विवाह के जमा पैसों से खरीदारी न कर पाने के कारण आत्म हत्या कर रहा है कहीं शगुन के कार्ड पर लिखवाया जा रहा है कि ''कृपया शगुन में ५००-१००० के नोट न दें .''कहीं नोट बदलने के लिए जनता सारे सारे दिन कतारों में खड़ी है तो कहीं शादी का सामान न खरीद नोट होते हुए भी न खरीद पाने के कारण भाई बाप बेहाल परेशान घर लौट रहे हैं और ऊपर से मोदी जी कह रहे हैं मेरे कड़क फैसले से सिर्फ बेईमान ही परेशान है .''तब तो वे सीधी तरह से सम्पूर्ण भारतवासियों को बेईमान कह रहे हैं क्योंकि जिस दिन से नोट बैन हुए हैं बैंकों के आगे लंबी लंबी कतारों में घंटों घंटों खड़े रह भूख प्यास से मरने वाले आम भारतीय ही हैं .जबकि मोदी जी के अनुसार केवल बेईमान परेशान हैं तब तो सभी आम भारतीय बेईमान ही हुए .
           विपक्ष द्वारा आलोचना वह भी ''अपने मुंह मियां मिट्ठू की ''तो जरुरी थी ,पर उस आलोचना का मोदी ने जिस मूर्खतापूर्ण तरीके से जवाब दिया उसकी ही उम्मीद उनसे थी क्योंकि अपने भूत में भी वे ऐसी ही बहुत गलतियां कर चुके हैं .वे कहते हैं कि ''कांग्रेस ने जब चवन्नी बंद की तो हमने क्या कहा ? जबकि जनता तो उनसे यही पूछती है कि '''क्यों नहीं कहा अगर कहना चाहिए था और अगर आप अपनी तुलना कांग्रेस से ही करते हैं तो कांग्रेस के ही भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने एक रेल दुर्घटना होने पर रेल मंत्री के पद से त्याग पत्र दे दिया था आपके इस कदम से जनता के इतने लोग मर रहे हैं आप उनसे ५० दिन का इंतज़ार कर सजा देने को क्यों कह रहे हैं त्यागपत्र तुरंत क्यों नहीं दे रहे हैं ?और रही बात चवन्नी की तो चवन्नी उस वक्त चलन से बाहर हो चुकी थी जबकि ५००-१००० के नोट इस वक्त जबरदस्त चलन में हैं बैंक में भी अगर पैसे निकालने जाओ तो वहां से ५००-१००० के नोट ही मिलते हैं इसलिए मोदी जी की चवन्नी की तुलना ५००-१००० के नोट से बेकार है अगर वे इस वक्त ५० पैसे बैन करते तो कोई कुछ नहीं कहता क्योंकि वे भी चलन से बाहर हो चुके हैं किन्तु क्या करें मोदी जी को सर्जिकल स्ट्राइक  का भूत चढ़ चूका है भले ही उसकी पीड़ित आम जनता ही हो जाये .
              सर्जिकल स्ट्राइक काले धन के खिलाफ है कहना मुश्किल है क्योंकि ५००-१००० के नकली नोट बंद तो बाद में होंगे २००० के नकली नोट बाजार में पहले ही आ चुके हैं और यही नहीं मालिकों के नोट बदलवाकर मजदूर रोजी रोटी कमा रहे हैं.बार बार नोट बदलने वालों को रोकने के लिए वोट डालने पर लगने वाली स्याही लगायी जा रही है जबकि ये स्याही बार बार वोट डालना तक नहीं रोक पायी तो बार बार नोट निकालना क्या  रोकेगी ?नोट के लिए सारे देशवासी तरस रहे हैं और कोई काम नहीं रह गया है नोट बदलवाने के सिवाय .आज ही अख़बार १२ और लोगों के मरने का समाचार नोटबंदी के कारण  दे  रहे हैं और मोदी के अंधभक्त कह रहे हैं कि मौत का कारण दूसरा है मीडिया तो यूँ ही मोदी के खिलाफ प्रचार कर रहा है .अब मोदी व् मोदी के अंध-भक्त कैसे नोटों से देश चलाएंगे ये जनता की आँखों के सामने है .
शालिनी कौशिक
    [ कौशल ]

शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2016

परिकर जी के लिए तालियां

सर्जिकल स्ट्राइक भारतीय  सेना का एक एेसा कार्य जिस  पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए और जो कि है भी और जिस कार्य के लिए विपक्ष तक ने प्रधानमंत्री तक की तारीफ करने में कोई कोताही नहीं बरती लेकिन सत्ता पक्ष सेना के इस कदम को पूरी तरह अपना कदम साबित करने में जुटा है घमंड रक्षा मंत्री के सिर चढ़कर बोल रहा है वे लगातार ये कहने में लगे हैं कि एेसी सर्जिकल स्ट्राइक पहली बार हुई, जबकि इतिहास गवाह है कि यूपीए के शासन में भी ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक होती रही है. भाजपा के सीनियर लीडर अरुण शौरी का ही दावा है कि मनमोहन सिंह ने ६ सर्जिकल स्ट्राइक करके भी लाभ लेने की कोशिश नहीं की थी क्योंकि वह खामोशी से अपना काम करते थे, ढिंढोरा नहीं पीटते थे. 2007,2009,2011,2013,2014और कई बार पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक हुई पर मनमोहन सिंह जी ने कभी भी उसका राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश नहीं की और वैसे भी ये सेना की वाहवाही है न कि सत्ता पक्ष की ये बात रक्षा मंत्री को समझ लेनी चाहिए और अगर अब भी नहीं समझ पाते तो अपने कार्यकाल की एक शोहरत और स्वीकार लेनी चाहिए जिसमें नागरिकों को ढाल बना फरार हुए आतंकवादी, बारामुला हमले में आतंकियों ने पहली बार किया बोट का इस्तेमाल, क्यूं परिकर जी अब तो पहली बार आपके कार्यकाल के लिए पहली बार तालियां बज ही जानी चाहिए.                                          
  शालिनी कौशिक एडवोकेट 

बुधवार, 12 अक्तूबर 2016

जशोदा बेन भी किसी की बेटी है मोदी जी

लखनऊ में मोदी का संदेश - आतंक की मदद करने और पनाह देने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. और एक बार पहले भी बाबा साहब भीम राव अंबेडकर की जयंती पर मोदी जी ने कहा था - कि अत्याचार की कोई भी घटना समाज पर कलंक है. सवाल ये है कि क्या ये बातें मात्र सभाओं में वाहवाही बटोरने तक ही सीमित रहेंगी, क्या ये मात्र वोट जुटाने का साधन ही रहेंगी?                                                                          
  सभा में  मोदी जी जोर शोर से कहते हैं कि जटायु एक स्त्री के सम्मान के लिए एक आताताई से भिड़ गए......... हम राम नही बन सकते तो हम जटायु तो बन ही सकते हैं जबकि अगर हम मोदी जी के जीवन चरित्र पर गौर करें तो उन्हें एेसा कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है उन्हें केवल अपनी पतिव्रता पत्नी जशोदा बेन को एक पत्नी का सम्मान देना है लेकिन हम सब जानते हैं मंच पर खड़े होकर बोलना आसान है, भीड़ में पैसे बांटकर तालियां बजवाना आसान है, सारी दुनिया को जो पता है कि ये एक मां की सन्तान हैं उस माँ से जन्मदिन पर आकर आशीर्वाद लेने का दिखावा करना आसान है लेकिन दुनिया से छिपा हुआ, अपनी जीवन शैली से विपरीत एक साधारण नारी को स्वीकार करना बेहद कठिन, वो तो कांग्रेस के दिग्विजय सिंह जी ने सबके सामने ये सच ला दिया अन्यथा मोदी जी अटल बिहारी वाजपेयी जी से पूरी बराबरी पर आ जाते. अब तो केवल उस दिन का इंतजार है जब ये अपने भीतर के राम को जागृत कर जशोदा बेन को सीता माता की पदवी दें.                                                
  शालिनी कौशिक एडवोकेट

शुक्रवार, 30 सितंबर 2016

कृतज्ञ दुनिया इस दिन की .-2 october

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एक की लाठी सत्य अहिंसा एक मूर्ति सादगी की,
दोनों ने ही अलख जगाई देश की खातिर मरने की .
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जेल में जाते बापू बढ़कर सहते मार अहिंसा में ,
आखिर में आवाज़ बुलंद की कुछ करने या मरने की .
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लाल बहादुर सेनानी थे गाँधी जी से थे प्रेरित ,
देश प्रेम में छोड़ के शिक्षा थामी डोर आज़ादी की .
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सत्य अहिंसा की लाठी ले फिरंगियों को भगा दिया ,
बापू ने अपनी लाठी से नीव जमाई भारत की .
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आज़ादी के लिए लड़े वे देश का नव निर्माण किया ,
सर्व सम्मति से ही संभाली कुर्सी प्रधानमंत्री की .
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मिटे गुलामी देश की अपने बढ़ें सभी मिलकर आगे ,
स्व-प्रयत्नों से दी है बढ़कर साँस हमें आज़ादी की .
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दृढ निश्चय से इन दोनों ने देश का सफल नेतृत्व किया
ऐसी विभूतियाँ दी हैं हमको कृतज्ञ दुनिया इस दिन की .
शालिनी कौशिक
[कौशल]