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#क्या वाकई निर्भया?

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जो दिखाई देता है, हम सभी जानते हैं कि वह हमेशा सत्य नहीं होता है किन्तु फिर भी हम कुछ ऐसी मिट्टी के बने हुए हैं  कि तथ्यों की जांच परख किए बगैर दिखाए जा रहे परिदृश्य पर ही यकीन करते हैं और इसका फायदा भले ही कोई भी उठाता हो लेकिन हम अपनी भावुकतावश नुकसान में ही रहते हैं.  अभी दो दिन पहले ही तेलंगाना में एक पशु चिकित्सक डॉ प्रियंका रेड्डी की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गयी और हत्या भी ऐसे कि लाश को इस बुरी तरह जला दिया गया कि उसकी पहचान का आधार बना एक अधजला स्कार्फ और गले में पड़ा हुआ गोल्ड पैंडैंट और मच गया चारों ओर कोहराम महिला के साथ निर्दयता का, सोशल मीडिया पर भरमार छा गई #kabtaknirbhaya की, सही भी है नारी क्या यही सब कुछ सहने को बनी हुई है, क्या वास्तव में उसका इस दुनिया में कुछ भी करना इतना मुश्किल है कि वह अगर घर से बाहर कहीं किसी मुश्किल में पड़ गई तो अपनी इज्ज़त, जिंदगी सब गंवाकर ही रहेगी, आज की परिस्थितियों में तो यही कहा जा सकता है किन्तु अगर बाद में सच कुछ और निकलता है तब हम सोशल मीडिया पर क्या लिखेंगे? सोचिए.           स्टार भारत पर प्रसारित किए जा रहे सावधान इंडिया में दि…

काँग्रेस की महान देन देश के लिए - जे एन यू.

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जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, देश की विख्यात शिक्षण संस्थानों में से एक, पिछले कुछ समय से, विशेष तौर पर उस समय से जब से नेहरू विरोधी सत्ता उभरकर सामने आई है एक ऐसे संस्थान के रूप में दिखाया जा रहा है जैसे यह संस्थान राष्ट्र विरोधी ताकतों का "अड्डा" हो, जबकि इस संस्थान का स्थापना से लेकर आज तक देश के विभिन्न मुद्दों पर क्या नजरिया रहा है और देश के संकट की घड़ी में यह संस्थान किस तरह देश के साथ खड़ा रहा है इस पर "अमर उजाला दैनिक" ने एक विस्तृत अवलोकन 22 नवंबर 2019 को प्रस्तुत किया और इस सभी की जानकारी देश को भटकाव की तरफ ले जाने वाले, देश के लिए कुर्बानी का जज्बा और समर्पण की भावना रखने वाले संस्थान की प्रसिद्धि को देश विरोधी गुट से जोड़ने की कोशिश करने वालों की कोशिशों को नाकाम करने के लिए हम सभी आम भारतीयों द्वारा जानना आवश्यक है -  14 नवंबर 1969 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी। भारतीय संसद द्वारा 22 दिसंबर 1966 में इसके निर्माण के लिए प्रस्ताव पारित किया गया था। जेएनयू को अधिनियम 1966 (1966 का 53) के तहत बनाया गया।
जेएनयू का उद्देश्य रहा है- अध्…

भारतीय ध्रुव तारा इंदिरा गांधी

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जब ये शीर्षक मेरे मन में आया तो मन का एक कोना जो सम्पूर्ण विश्व में पुरुष सत्ता के अस्तित्व को महसूस करता है कह उठा कि यह उक्ति  तो किसी पुरुष विभूति को ही प्राप्त हो सकती है  किन्तु तभी आँखों के समक्ष प्रस्तुत हुआ वह व्यक्तित्व जिसने समस्त  विश्व में पुरुष वर्चस्व को अपनी दूरदर्शिता व् सूक्ष्म सूझ बूझ से चुनौती दे सिर झुकाने को विवश किया है .वंश बेल को बढ़ाने ,कुल का नाम रोशन करने आदि न जाने कितने ही अरमानों को पूरा करने के लिए पुत्र की ही कामना की जाती है किन्तु इंदिरा जी ऐसी पुत्री साबित हुई जिनसे न केवल एक परिवार बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र गौरवान्वित अनुभव करता है  और  इसी कारण मेरा मन उन्हें ध्रुवतारा की उपाधि से नवाज़ने का हो गया और मैंने इस पोस्ट का ये शीर्षक बना दिया क्योंकि जैसे संसार के आकाश पर ध्रुवतारा सदा चमकता रहेगा वैसे ही इंदिरा प्रियदर्शिनी  ऐसा  ध्रुवतारा थी जिनकी यशोगाथा से हमारा भारतीय आकाश सदैव दैदीप्यमान  रहेगा। १९ नवम्बर १९१७ को इलाहाबाद के आनंद भवन में जन्म लेने वाली इंदिरा जी के लिए श्रीमती सरोजनी नायडू जी ने एक तार भेजकर कहा था -''वह भारत की नई आत्मा है .&…

और कितनी शहादत चाहिए नेहरू गाँधी परिवार से

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राहुल गांधी अपने व्यक्तित्व व परिवारिक लोकप्रियता के कारण जनता के दिलों में अपना एक अलग मुकाम रखते हैं और जनता के दिलों में राहुल गांधी के व उनके परिवार के प्रति यह प्यार विपक्षी भाजपा को इस कदर खटकता है कि वे कुछ भी करें तो भी और कुछ न करें तो भी उसे मुद्दा बनाकर देश की भोली-भाली जनता के मन में उनके लिए जहर घोलने की कोशिशें की जाती हैं और भारतीय जनता पार्टी में तो कुछ नेताओं को, कार्यकर्ताओं को यह ही जिम्मेदारी दी गई है कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी पर नज़र रखो और समय समय पर इन्हें लेकर जो कुछ भी कह सकते हो, कहो, क्योंकि ये पार्टी जानती है कि अगर निरंतर किसी जगह पर चोट की जाए तो वह चोट निशान अवश्य छोड़ती है और आज इसी निरंतर प्रहार का असर ही है कि भारतीय जनता पार्टी सत्ता में कायम है और देश के लिए अपनी कुर्बानी देने वाला यह परिवार अंध भक्तों के द्वारा कभी चोर तो कभी भ्रष्टाचारी कहा जा रहा है किन्तु ऐसा तभी है जब इस पार्टी द्वारा अपने अंध भक्तों की आंखों पर पूरी तरह से झूठ का पर्दा डाल दिया गया है और सच देखने के सभी रास्ते बंद कर दिए गए हैं साथ ही एक ऐसी हिप्नोटिज्म क…

मोदी के अभियान पर जैन महिला भारी

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श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन की नई दिल्ली, राजपथ पर शुरूआत करते हुए कहा था कि “एक स्वच्छ भारत के द्वारा ही देश 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर अपनी सर्वोत्तम श्रद्धांजलि दे सकते हैं।” 2 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत मिशन देश भर में व्यापक तौर पर राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में शुरू किया गया था। इस अभियान के अंतर्गत 2 अक्टूबर 2019 तक “स्वच्छ भारत” की परिकल्पना को साकार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। स्वच्छता के जन अभियान की अगुआई करते हुए प्रधान मंत्री ने जनता को महात्मा गांधी के स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक वातावरण वाले भारत के निर्माण के सपने को साकार करने के लिए प्रेरित किया। श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं मंदिर मार्ग पुलिस थाने में स्वच्छता अभियान को शुरू किया। धूल-मिट्टी को साफ़ करने के लिए झाडू उठाकर स्वच्छ भारत अभियान को पूरे राष्ट्र के लिए एक जन-आंदोलन का रूप दिया और कहा कि लोगों को न तो स्वयं गंदगी फैलानी चाहिए और न ही किसी और को फैलाने देना चाहिए। उन्होंने “न गंदगी करेंगे, न करने देंगे।” का मंत्र भी दिया। श्री नरेन्द्र मोदी ने नौ लोगों को स्वच्छता अभियान में शा…

उल्लू पर बैठी लक्ष्मी......

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वसुंधरा के हर कोने को जगमग आज बनायेंगे ,
जाति-धर्म का भेद-भूलकर मिलकर दीप जलाएंगे .
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पूजन मात्र आराधन से मात विराजें कभी नहीं ,
होत कृपा जब गृहलक्ष्मी को हम सम्मान दिलायेंगें .
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आतिशबाजी छोड़-छोड़कर बुरी शक्तियां नहीं मरें ,
करें प्रण अब बुरे भाव को दिल से दूर भगायेंगे .
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चौदह बरस के बिछड़े भाई आज के दिन ही गले मिले ,
गले लगाकर आज अयोध्या भारत देश बनायेंगे .
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सफल दीवाली तभी हमारी शिक्षित हो हर एक बच्चा ,
छाप अंगूठे का दिलद्दर घर घर से दूर हटायेंगे .
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भ्रष्टाचार ने मारा धक्का मुहं खोले महंगाई खड़ी ,
स्वार्थ को तजकर मितव्ययिता से इसको धूल चटाएंगे .
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वकीलों का कत्ल प्रदेश - वेस्ट यू पी

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कैराना कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता गुलजार की कल शाम अज्ञात बाईक सवारों ने उस समय हत्या कर दी जब वे अपने मुन्शी सचिन के साथ अपने गाँव सिक्का वापस जा रहे थे. हत्या के कारण में उनके भाई का अपनी पत्नी से विवाद सामने आ रहा है जिसमें मृतक अधिवक्ता गुलजार पैरवी कर रहे थे. यह अधिवक्ता की हत्या का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अभी हाल ही में कोई पहला मामला नहीं है बल्कि अगर कहा जाए कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश अधिवक्ताओं के लिए कत्ल प्रदेश बन गया है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी.  12 जून 2019 अधिवक्ता दरवेश यादव की गोली मारकर हत्या: उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की पहली महिला अध्यक्ष यादव की आगरा के दीवानी कचहरी के परिसर के भीतर बुधवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जहां वह रविवार को यूपी बार काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में अपने चुनाव के बाद समारोह में भाग लेने गई थी. सत्कार समारोह के तुरंत बाद, यादव वरिष्ठ वकील अरविंद मिश्रा के कक्ष में गई , जहाँ उनके दोस्त मनीष शर्मा आए और अपने लाइसेंसी रिवॉल्वर से खुद को गोली मारने से पहले उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। जब यह हादसा हुआ उस समय यादव समर्थकों औ…