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अभी पूरी नहीं कोर्ट सुरक्षा

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बिजनौर कोर्ट में हुई घटना के बाद प्रशासन अदालतों की सुरक्षा के लिए सक्रिय हुआ है और उसे लेकर अदालतों के परिसर की दीवार ऊंची कराना, अदालतों में प्रवेश के लिए मेटल डिटेक्टर लगाया जाना, वकीलों को, मुन्शीयों को परिचय पत्र जारी किया जाना आदि कदम उठाए जा रहे हैं, ऐसे में बहुत कुछ सराहनीय किया जा रहा है तो बहुत कुछ ऐसा है जो कि अनदेखा किया जा रहा है.            अदालतों में कोर्ट में जाने का काम वकीलों का है और उनके मुन्शीयों का है किन्तु अगर देख लिया जाए कि अदालतों के परिसर में वादकारियों के अलावा और भी बहुत सी भीड़ रहती है जिसका भी वहां के अदालती कार्यवाही में काफी हस्तक्षेप रहता है और वह भीड़ है वहां के टाइपिस्ट और कैंटीन वालों की और अभी इनके संबंध में कोई भी दिशानिर्देश न अदालतों को और न ही संबंधित बार एसोसिएशन को मिल पाए हैं.          अतः इलाहाबाद हाई कोर्ट से यह विनम्र निवेदन है कि वह इस संबंध में अति शीघ्र संज्ञान लेते हुए कार्यवाही करे क्योंकि टाइपिस्ट व कैन्टीन वाले इस संबंध में संदिग्ध सूची में शामिल होने की कगार पर हैं और कोर्ट व बार एसोसिएशन की तरफ मदद के लिए देख रहे हैं.  शालिनी…

जनता अधिवक्ता जिंदाबाद का नारा बुलंद हो 🇮🇳

वेस्ट यू पी हाई कोर्ट बेंच एक ऐसा मुद्दा है जिसे लेकर अब वेस्ट यू पी के वकील भी यह विश्वास करने से बच रहे हैं कि यह कभी भी सफल होगा क्योंकि अगर देखा जाए तो इस आंदोलन को लेकर सरकार का रवैय्या तो भेदभावपूर्ण रहा ही है साथ ही, अधिवक्ता भी इसे लेकर बंटे हुए ही नजर आए हैं क्योंकि अधिवक्ताओं का एक वर्ग इसे अपने लिए और अपने क्षेत्र के निवासियों के लिए हितकारी मानता है मगर एक वर्ग ऐसा भी है जो देखता है कि अगर वेस्ट यू पी में हाई कोर्ट बेंच स्थापित हो गयी तो इससे उनके काम पर फर्क़ पड़ेगा और मुवक्किल हाई कोर्ट में कार्यरत वकीलों को उनसे ऊपर तरजीह देगा और अपनी इसी सोच को लेकर वह आंदोलन के लिए उपेक्षित रवैय्या रख असहयोगी मुद्रा को अपनाए हुए है किन्तु यह असहयोगी अधिवक्ता वर्ग आन्दोलन की अब तक की असफलता के लिए उतना जिम्मेदार नहीं है जितना जिम्मेदार आंदोलन में लगा हुआ अधिवक्ता वर्ग है क्योंकि उसके द्वारा आंदोलन के लिए बहुत से जरूरी कदम आज तक उठाए ही नहीं गए हैं जिनका उठाया जाना आंदोलन के लिए न केवल जरूरी बल्कि परमावश्यक भी है.
              वेस्ट यू पी में हाई कोर्ट बेंच के लिए आंदोलन करने व…

हाई कोर्ट बेंच के लिए वकील बनें मोदी - शाह

पश्चिमी उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट बेंच स्थापना संघर्ष समिति की बैठक कल दिनाँक 4.1.2020 को बिजनौर में हुई, बैठक में सभी दलों के नेताओं ने एक सुर में हाईकोर्ट बेंच की मांग का समर्थन किया। जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपा नेता साकेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट बेंच वेस्ट यूपी में खुल गई तो वादकारियों को अपने केस लड़ने के लिए प्रयागराज नहीं जाना होगा। जनता का पैसा और समय दोनों ही बचेंगे। इस मांग को हर हाल में पूरा किया जाना चाहिए। पूर्व मंत्री सपा नेता स्वामी ओमवेश ने कहा कि जिस दिन वकीलों के दिलो दिमाग में यह बात आ जाएगी कि उन्हें बेंच चाहिए तो उस दिन उन्हें बेंच मिल जाएगी। इसके लिए अभी वकील ही तैयार नहीं हैं। 
       बैठक में  सपा नेता स्वामी ओम वेश की बात ही सर्वाधिक विचारणीय है कि जिस दिन वकीलों के दिमाग में यह बात आ जाएगी कि उन्हें बेंच चाहिए तो उस दिन उन्हें बेंच मिल जाएगी और इस बात में वकीलों के लिए सर्वाधिक कचोटने वाली उनकी यह बात रही कि इसके लिए अभी वकील ही तैयार नहीं हैं कितना बड़ा कटाक्ष है यह वकीलों पर कि वे अभी बेंच के लिए तैयार नहीं हैं.
       1979 से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अ…

अब यू पी में होगा

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मोदी सरकार हो या योगी सरकार जब से आयी हैं तब से बदलावों के लिए खुद को तैयार रखना पड़ता है और सर्वाधिक महत्वपूर्ण यह है कि इनके खुद के जीवन में नारी का कोई विशेष स्थान नहीं है एक के लिए संगठन की शर्तों के कारण तो एक के लिए जीवन की धारा में परिवर्तन के कारण, एक ने विवाह करने के बाद पत्नी को त्याग दिया तो एक ने इस ओर गमन ही नहीं किया फिर भी दोनों को पत्नियों का बहुत ध्यान है अपनी नहीं औरों की, मोदी जी ने तो तीन तलाक को अपराध घोषित कराकर मुस्लिम महिलाओं के जीवन में फरिश्ते के रूप में पदार्पण किया है और अब योगी जी भी ऐसा ही कुछ करने जा रहे हैं. योगी सरकार उत्तर प्रदेश में जब से आयी है बहुत से क्रांतिकारी बदलाव लेकर आयी है और अब उन्हीं बदलावों में एक और वृद्धि करने जा रही है यहां की पीड़ित महिलाओं या यूं कहें कि पीड़ित पत्नियों के लिए, तो ज्यादा उचित रहेगा, एक सुकून भरे जीवन की शुरुआत और वह यह है -
मतलब यह है कि प्रदेश में तीन तलाक पीड़ित व परित्यक्ता पत्नी की मदद का मसौदा तैयार कर लिया गया है और चालू वित्त वर्ष में यह लागू कर दिया जाएगा जिसमें 5000 तीन तलाक पीड़िताओं को और 5000 परित्यक…

#क्या वाकई निर्भया?

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जो दिखाई देता है, हम सभी जानते हैं कि वह हमेशा सत्य नहीं होता है किन्तु फिर भी हम कुछ ऐसी मिट्टी के बने हुए हैं  कि तथ्यों की जांच परख किए बगैर दिखाए जा रहे परिदृश्य पर ही यकीन करते हैं और इसका फायदा भले ही कोई भी उठाता हो लेकिन हम अपनी भावुकतावश नुकसान में ही रहते हैं.  अभी दो दिन पहले ही तेलंगाना में एक पशु चिकित्सक डॉ प्रियंका रेड्डी की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गयी और हत्या भी ऐसे कि लाश को इस बुरी तरह जला दिया गया कि उसकी पहचान का आधार बना एक अधजला स्कार्फ और गले में पड़ा हुआ गोल्ड पैंडैंट और मच गया चारों ओर कोहराम महिला के साथ निर्दयता का, सोशल मीडिया पर भरमार छा गई #kabtaknirbhaya की, सही भी है नारी क्या यही सब कुछ सहने को बनी हुई है, क्या वास्तव में उसका इस दुनिया में कुछ भी करना इतना मुश्किल है कि वह अगर घर से बाहर कहीं किसी मुश्किल में पड़ गई तो अपनी इज्ज़त, जिंदगी सब गंवाकर ही रहेगी, आज की परिस्थितियों में तो यही कहा जा सकता है किन्तु अगर बाद में सच कुछ और निकलता है तब हम सोशल मीडिया पर क्या लिखेंगे? सोचिए.           स्टार भारत पर प्रसारित किए जा रहे सावधान इंडिया में दि…

काँग्रेस की महान देन देश के लिए - जे एन यू.

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जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, देश की विख्यात शिक्षण संस्थानों में से एक, पिछले कुछ समय से, विशेष तौर पर उस समय से जब से नेहरू विरोधी सत्ता उभरकर सामने आई है एक ऐसे संस्थान के रूप में दिखाया जा रहा है जैसे यह संस्थान राष्ट्र विरोधी ताकतों का "अड्डा" हो, जबकि इस संस्थान का स्थापना से लेकर आज तक देश के विभिन्न मुद्दों पर क्या नजरिया रहा है और देश के संकट की घड़ी में यह संस्थान किस तरह देश के साथ खड़ा रहा है इस पर "अमर उजाला दैनिक" ने एक विस्तृत अवलोकन 22 नवंबर 2019 को प्रस्तुत किया और इस सभी की जानकारी देश को भटकाव की तरफ ले जाने वाले, देश के लिए कुर्बानी का जज्बा और समर्पण की भावना रखने वाले संस्थान की प्रसिद्धि को देश विरोधी गुट से जोड़ने की कोशिश करने वालों की कोशिशों को नाकाम करने के लिए हम सभी आम भारतीयों द्वारा जानना आवश्यक है -  14 नवंबर 1969 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी। भारतीय संसद द्वारा 22 दिसंबर 1966 में इसके निर्माण के लिए प्रस्ताव पारित किया गया था। जेएनयू को अधिनियम 1966 (1966 का 53) के तहत बनाया गया।
जेएनयू का उद्देश्य रहा है- अध्…

भारतीय ध्रुव तारा इंदिरा गांधी

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जब ये शीर्षक मेरे मन में आया तो मन का एक कोना जो सम्पूर्ण विश्व में पुरुष सत्ता के अस्तित्व को महसूस करता है कह उठा कि यह उक्ति  तो किसी पुरुष विभूति को ही प्राप्त हो सकती है  किन्तु तभी आँखों के समक्ष प्रस्तुत हुआ वह व्यक्तित्व जिसने समस्त  विश्व में पुरुष वर्चस्व को अपनी दूरदर्शिता व् सूक्ष्म सूझ बूझ से चुनौती दे सिर झुकाने को विवश किया है .वंश बेल को बढ़ाने ,कुल का नाम रोशन करने आदि न जाने कितने ही अरमानों को पूरा करने के लिए पुत्र की ही कामना की जाती है किन्तु इंदिरा जी ऐसी पुत्री साबित हुई जिनसे न केवल एक परिवार बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र गौरवान्वित अनुभव करता है  और  इसी कारण मेरा मन उन्हें ध्रुवतारा की उपाधि से नवाज़ने का हो गया और मैंने इस पोस्ट का ये शीर्षक बना दिया क्योंकि जैसे संसार के आकाश पर ध्रुवतारा सदा चमकता रहेगा वैसे ही इंदिरा प्रियदर्शिनी  ऐसा  ध्रुवतारा थी जिनकी यशोगाथा से हमारा भारतीय आकाश सदैव दैदीप्यमान  रहेगा। १९ नवम्बर १९१७ को इलाहाबाद के आनंद भवन में जन्म लेने वाली इंदिरा जी के लिए श्रीमती सरोजनी नायडू जी ने एक तार भेजकर कहा था -''वह भारत की नई आत्मा है .&…