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पीछे से वार करते हैं वे जनाब आली....

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नुमाइंदगी करते हैं वे जनाब आली ,
जजमान बने फिरते हैं वे जनाब आली . ............................................................... देते हैं जख्म हमें रुख बदल-बदल , छिड़कते फिर नमक हैं वे जनाब आली . .................................................................... मुखालिफों को हक़ नहीं मुहं खोलने का है , जटल काफिये उड़ाते हैं वे जनाब आली . ................................................................ ज़म्हूर को कहते जो जनावर जूनून में , फिर बात से पलटते हैं वे जनाब आली . .................................................................. फरेब लिए मुहं से मिलें हाथ जोड़कर , पीछे से वार करते हैं वे जनाब आली . ........................................................................ मैदान-ए-जंग में आते हैं ऐयार बनके ये , ठोकर बड़ों के मारते हैं वे जनाब आली . ...................................................................... जम्हूरियत है दागदार इनसे ही ''शालिनी '' झुंझलाके क़त्ल करते हैं वे जनाब आली . ...............................................................                     …