''आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है ..''
किसी शायर ने कहा है - ''कौन कहता है आसमाँ में सुराख़ हो नहीं सकता , एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों .'' भारतवर्ष सर्वदा से ऐसी क्रांतियों की भूमि रहा है जिन्होंने हमेशा ''असतो मा सद्गमय ,तमसो मा ज्योतिर्गमय ,मृत्योर्मामृतं गमय''का ही सन्देश दिया है और क्रांति कभी स्वयं नहीं होती सदैव क्रांति का कारक भले ही कोई रहे पर दूत हमेशा आम आदमी ही होता है क्योंकि जिस तरह से लावा ज्वालामुखी के फटने पर ही उत्पन्न होता है वैसे ही क्रांति का श्रीगणेश भी आम आदमी के ह्रदय में उबलते क्रोध के फटने से ही होता है . आम आदमी की ताकत क्या है ये अभी हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में देखने को मिला जब आम जनता ने वोट के अधिकार का इस्तेमाल कर सत्तारूढ़ दल को उखाड़ फेंका और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को बरसों बाद स्पष्ट बहुमत दिया .इन चुनावों में जनता ने दिखा दिया कि आम जनता बेवकूफ बनने वालों में नहीं है .लुभावने वादों और साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण को दरकिनार कर जनता ने देशहित देखते हुए एकजुट होकर वोट दिया और जनता को उसकी इस ताकत का एहसास दिलाने वाला शख्स भी एक ...