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मुस्लिम महिलाओं को भी मिले तीन तलाक का अधिकार

मुस्लिम विधि में तलाक का एक तरीका है - "तलाक - उल - बिददत". वर्तमान में यह तरीका ही विवाद का विषय बना हुआ है और आंध्र व तेलंगाना के मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष आबिद रसूल खान का इसी तलाक के दुष्परिणाम के लिए कहना है "कि आज मुस्लिम समुदाय के सामने यह बड़ी सामाजिक समस्या है क्योंकि सही मायने में लाखों की संख्या में महिलाएं तलाक से पीड़ित हैं. उनके पतियों ने तीन बार तलाक शब्द का इस्तेमाल कर उन्हें अलग कर दिया. मैंने पर्सनल लॉ बोर्ड व जमियत - उलेमा - ए-हिंद को लिखा है कि 3 साल के मेरे कार्यकाल में मैने पाया है कि तमाम मुस्लिम महिलाएं उत्पीड़न, परित्याग, गुजारा भत्ता न मिलने जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं. "उन्होंने कहा कि बोर्ड तीन तलाक पर जोर देता है तो वह हमारी लाखों बहनों के साथ अन्याय कर रहा है.                                                                                     ...