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तिरंगे की आह

फ़िरदौस इस वतन में फ़रहत नहीं रही ,
पुरवाई मुहब्बत की यहाँ अब नहीं रही .
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नारी का जिस्म रौंद रहे जानवर बनकर ,
हैवानियत में कोई कमी अब नहीं रही .
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 फरियाद करे औरत जीने दो मुझे भी ,
इलहाम रुनुमाई को हासिल नहीं रही .

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अंग्रेज गए बाँट इन्हें जात-धरम में ,
इनमे भी अब मज़हबी मिल्लत नहीं रही .
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 फरेब ओढ़ बैठा नाजिम ही इस ज़मीं पर ,
फुलवारी भी इतबार के काबिल नहीं रही .
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 लाये थे इन्कलाब कर गणतंत्र यहाँ पर ,
हाथों में जनता के कभी सत्ता नहीं रही .
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  वोटों में बैठे आंक रहे आदमी को वे ,
खुदगर्जी में कुछ करने की हिम्मत नहीं रही .
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  इल्ज़ाम लगाते रहे ये हुक्मरान पर ,
अवाम अपन…

बहकावे में धरने पर बैठे शामली अधिवक्ता

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शामली के अधिवक्ता अनैतिक धरना-प्रदर्शन की राह पर चल पड़े हैं ,जहाँ कैराना में जिला न्यायाधीश की कोर्ट की स्थापना के लिए हाईकोर्ट व् सरकार के कदम बढ़ते हैं तभी शामली के अधिवक्ता अपना काम-काज ठप्प कर धरना प्रदर्शन करने बैठ जाते हैं ,            2011 में प्रदेश सरकार ने शामली को जिला बनाया किन्तु वहां एक  तो स्थान का अभाव है दूसरे वहां अभी तक केवल तहसील स्तर तक के ही न्यायालय काम कर रहे हैं ऐसे में वहां जनपद न्यायालय की कोर्ट की स्थापना से पहले की सारी कोर्ट्स की स्थापना ज़रूरी है  जिसमे अभी लगभग 8 से 10 साल लगने संभव हैं दूसरी और शामली जिले की ही  तहसील कैराना में एडीजे कोर्ट तक के न्यायालय स्थापित हैं और वहां कई ऐसे भवन भी हैं जहाँ जनपद न्यायाधीश आनन्-फानन में बैठ सकते है ,          इतनी अच्छी व्यवस्था अपने जनपद में ही होते हुए भी जब तक शामली जिले का जनपद न्यायाधीश का कार्य मुज़फ्फरनगर से चलता रहता है तब तक शामली के अधिवक्ताओं के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती और जैसे  कैराना में जनपद न्यायाधीश के बैठने की बात सामने आती है वे मरने मारने पर उतारू हो जाते हैं ,केवल इसलिए कि उन्हें मुज़फ्फरनगर क…

जिला जज कोर्ट कैराना में

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शामली 28 सितम्बर २०११ को मुज़फ्फरनगर से अलग करके एक जिले के रूप में स्थापित किया गया .जिला बनने से पूर्व शामली तहसील रहा है और यहाँ तहसील सम्बन्धी कार्य ही निबटाये जाते रहे हैं. न्यायिक कार्य दीवानी ,फौजदारी आदि के मामले शामली से कैराना और मुज़फ्फरनगर जाते रहे हैं और जिला बनने से लेकर आज तक शामली तरस रहा है एक जिले की तरह की स्थिति पाने के लिए क्योंकि सरकार द्वारा अपने वोट बैंक को बढ़ाने के लिए जिलों की स्थापना की घोषणा तो कर दी जाती है किन्तु सही वस्तुस्थिति जो क़ि एक जिले के लिए चाहिए उसके बारे में उसे न तो कोई जानकारी चाहिए न उसके लिए कोई प्रयास ही सरकार द्वारा किया जाता है .पूर्व में उत्तर प्रदेश सरकार ऐसा बड़ौत क्षेत्र के साथ भी कर चुकी है जिले की सारी आवश्यक योग्यता रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बागपत को जिला बना दिया गया . आज शामली जो क़ि न्यायिक व्यवस्था में बिलकुल पिछड़ा हुआ है उसके न्यायालयों को जिले के न्यायालय का दर्जा  देने की कोशिश की जा रही है उसके लिए शामली के अधिवक्ता भवन स्थापना के लिए शामली में अस्थायी भवनों की तलाश करते रहे हैं और कैराना जो क़ि इस संबंध में बहुत अग…

झुका दूँ शीश...... पितृ दिवस के अवसर पर

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झुका दूं शीश अपना ये बिना सोचे जिन चरणों में , ऐसे पावन चरण मेरे पिता के कहलाते हैं . ...................................................................................  बेटे-बेटियों में फर्क जो करते यहाँ , ऐसे कम अक्लों को वे आईना दिखलाते हैं . ............................................................................... शिक्षा दिलाई हमें बढाया साथ दे आगे , मुसीबतों से हमें लड़ना सिखलाते हैं . ......................................................................... मिथ्या अभिमान से दूर रखकर हमें , सादगी सभ्यता का पाठ वे पढ़ाते हैं . ................................................................................... कर्मवीरों की महत्ता जग में है चहुँ ओर, सही काम करने में वे आगे बढ़ाते हैं . .............................................................................. जैसे पिता मिले मुझे ऐसे सभी को मिलें , अनायास दिल से ये शब्द निकल आते हैं . .................................... शालिनी कौशिक [कौशल]

औरतें जी का जंजाल - कांधला से कैराना

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कांधला से कैराना और पानीपत ,एक ऐसी बस यात्रा जिसे भुला पाना शायद भारत के सबसे बड़े घुमक्कड़ व् यात्रा वृतांत लिखने वाले राहुल सांकृत्यायन जी के लिए भी संभव नहीं होता यदि वे इधर की कभी एक बार भी यात्रा करते .
       कोई भी बात या तो किसी अच्छे अनुभव के लिए याद की जाती है या किसी बुरे अनुभव के लिए ,लेकिन ये यात्रा एक ऐसी यात्रा है जिसे याद किया जायेगा एकमात्र इसलिए कि इसमें महिलाओं की और वह भी ऐसी महिलाओं की बहुतायत है जिसके पास देश की जनसँख्या को बढ़ाने वाले बच्चे बहुत अधिक मात्रा में उपलब्ध हैं और सारा देश भले ही नारी सशक्तिकरण के लिए तरस रहा हो किन्तु इस सफर में नारी की सशक्तता देखते ही बनती है और पुरुष सशक्त होने के लिए तड़पता दिखाई देता है .
       कांधला से कैराना जाने वालों में एक बड़ी संख्या उस वर्ग की है जिन्हें कैराना पहुंचकर डग्गामार की सवारी द्वारा पानीपत जाना होता है ,डग्गामार वे वाहन हैं जो वैन या जीप में सीट से अधिक ही क्या बहुत अधिक संख्या में यात्रियों को बैठाकर या कहूं ठूसकर पानीपत ले जाते हैं और ठीक यही स्थिति कांधला से कैराना यात्रामार्ग की है जिसमे लगभग एक सीट के हिस…

जज नियुक्ति -NO NEED SUGGESTION OF GOVT

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जजों की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार व् सुप्रीम कोर्ट में विवाद फिर से गहरा गया है ,जहाँ सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम जजों के नाम की सिफारिश नियुक्ति हेतु कर पहली पसंद जाहिर करता है वहीँ दूसरी व् अंतिम पसंद केंद्र सरकार की होती है जिसके चलते कोलेजियम द्वारा की गयी छंटनी और संक्षिप्त बनकर रह जाती है जिसका परिणाम अभी हाल ही में जस्टिस के एम् जोसफ  को कोलेजियम द्वारा सिफारिश किये जाने के बाद  केंद्र सरकार द्वारा नियुक्ति न दिए जाने  रूप में भुगतना पड़ा ,
         और अभी इसी स्थगन को लेकर एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश जी डी इनामदार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल दायर की गयी है -
केंद्र कॉलेजियम की सिफारिशों पर “पिक एंड चूज़” नहीं कर सकता, जस्टिस जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति पर केंद्र के कदम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती ...
 महाराष्ट्र के सोलापुर के एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश जीडी इनामदार द्वारा दायर पीआईएल में न्यायमूर्ति जोसेफ को परिणामस्वरूप वरिष्ठता के संबंध में नियुक्ति के वारंट जारी करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग की गई है। ...
इनामदार ने कहा कि उन्हें कोर्ट …

आसाराम बेटियों का सहारा

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आसाराम दोषी करार, बिटिया के पिता ने कोर्ट का किया धन्यवाद जोधपुर में आसाराम और उसके सहयोगियों को दोषी करार दिए जाने के बाद बिटिया के पिता के चेहरे पर खुशी देखने को मिली। उन्होंने अपने मकान से बाहर आकर मीडिया से कहा कि कोर्ट ने आसाराम और उसके सहयोगियों को दोषी करार दिया है, इसके लिए वह कोर्ट का धन्यवाद करते हैं।  जोधपुर में आसाराम और उसके सहयोगी शिल्पी,शरत को दोषी करार दिए जाने के बाद पहली प्रतिक्रिया देते हुए बिटिया के पिता की पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कहा कि कोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूं। आसाराम और उसके सहयोगियों को आरोपी से दोषी करार दिए जाने पर कोर्ट का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि जिन गवाहों को मरवाया गया, जिन पर हमला कराया गया, जिसे गायब कराया गया, उन मामलों में भी आसाराम और उसके लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। आसाराम केस में बिटिया के पिता ने सबसे पहले मीडिया को धन्यवाद दिया फिर न्यायपालिका पर भरोसा जताया। बोले कि इस लड़ाई में सभी ने मेरा साथ दिया।         ये तो रही एक बिटिया के पिता के ह्रदय की खुशी की बात लेकिन यह फैसला जिस वक़्त आया है वह करोड़ों बिटियाओं के माँ-बाप …

सरकार फिर सफल ?

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सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को अपने फैसले में एस-सी -एस -टी एक्ट के तहत तुरंत गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी और साथ ही सुभाष महाजन के इस केस में अग्रिम जमानत दिए जाने के निर्देश भी दिए ,इसी फैसले के मद्देनज़र दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को विरोध स्वरुप भारत बंद बुलाया और सोशल मीडिया के स्तर पर इसे सफल बनाने की कार्यवाही भी आरम्भ कर दी ,सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी लगातार कहते रहे कि हम पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे लेकिन अफ़सोस 2 अप्रैल से पहले सरकार को इसके लिए समय ही नहीं मिला ,
         2 अप्रैल आयी ,आनी ही थी संगठन इकट्ठे हो गए ,पूरे भारत में भारत बंद का आयोजन जोर-शोर से हुआ और ऐसी ही आशा की भी जा रही थी कम से कम जनता तो ऐसा ही सोच रही थी और सरकार या शाह की तरह वह निश्चिन्त नहीं  थी इसीलिए उस दिन बसों में भीड़ कम थी ,सदियों भी जिन बसों में बैठने को आधी सीट भी नसीब नहीं होती उस दिन दो-दो सीट एक-एक को मिल रही थी और हुआ वही जिसके इंतज़ाम शाह की सोच में भी  थे क्या हम ऐसा विश्वास कर सकते हैं ?
         2 अप्रैल को देश के दस राज्यों में उग्र आंदोलन हुए ,इनमे 15 लोगों की मौत हुई ,मध…

भगवा=एकता

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सरकारी भवनों का रंग तो भाजपानीत सरकार ने पलटा ही था अब भाजपा इस देश को पूर्णतया भगवा रंग में रंगने की साज़िश को अंजाम देने पर आ गयी है जिससे सारे विश्व में भारत की पहचान भगवा रंग ही रह जाये और इसी कड़ी में अब भाजपा लेकर आयी है आपदा प्रबंधन टीम के लिए  भगवा रंग और उस पर तुर्रा ये कि इसमें काला रंग भी है  ऐसा इसलिए कि यह टीम अलग दिखाई दे ,
             सम्पूर्ण विश्व में जिस भारत की पहचान अनेकता में एकता वाली संस्कृति की रही है भाजपा उस पहचान को पूरी तरह मटियामेट करने पर आ गयी है ,आज तक किसी भी सैन्य टुकड़ी की वर्दी ऐसी नहीं रही जो  देश के किसी भी राजनीतिक दल की खास पहचान हो किन्तु भाजपा कॉंग्रेस मुक्त भारत के साथ साथ लगता है देश के संविधान व् संस्कृति को बदलने की ठान कर आयी है,
        पुलिस के किसी भी दल की वर्दी ऐसी होती है जो आमतौर पर एकदम से प्रकृति के रंग से मेल वाली हो और लोगों में सुरक्षा का भरोसा उत्पन्न करने वाली हो लेकिन जो वर्दी एसडीआरएफ टीम की रखी गयी है वह देश में भेदभाव की जड़ें और गहरी खोद देगी क्योंकि यही रंग हिन्दुओं के साधु महात्मा धारण करते हैं ऐसे में मुस्लमान सम…

औरत की तकदीर

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औरत की तकदीर में देखो ,हरदम रोना-धोना है , मिलना उसको नहीं है कुछ भी ,सब कुछ हर पल खोना है , -------------------------------------------------------------------------- तड़प रहेगी उसके दिल में ,जग में कुछ कर जाने की , नहीं पायेगी वो कुछ भी कर ,बोझ जनम का ढोना है , ---------------------------------------------------------------------------- सपना था इस जीवन में कि सबके काम वो आएगी , सच्चाई ये उसका जीवन ,सबकी रोटी पोना है , ----------------------------------------------------------------------- टूट रही है तिल-तिल गलकर ,कुछ भी हाथ न आता है , पता चल गया भाग्य में उसके ,थक हारकर सोना है , ------------------------------------------------------------------------ नारी जीवन में देने को ,प्रभु की झोली खाली है , ''शालिनी '' का मन तड़पाकर ,भला देव का होना है , --------------------------------------------------------------------------- शालिनी कौशिक  [कौशल ]

सुप्रीम कोर्ट से टक्कर लेती खाप पंचायतें

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को खाप पंचायत को लेकर बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने खाप पंचायतों को झटका देते हुए कहा कि शादी को लेकर खाप पंचायतों के फरमान गैरकानूनी हैं। अगर दो बालिग अपनी मर्जी से शादी कर रहे हैं तो कोई भी इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने आगे यह भी कहा है कि जब तक केंद्र सरकार इस मसले पर कानून नहीं लाती तब तक यह आदेश प्रभावी रहेगा किन्तु लगता है खाप पंचायतें भी सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ कमर कसकर बैठी हैं ,             सुप्रीम कोर्ट के अनुसार दो बालिगों की अपनी मर्जी की शादी में किसी को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है किन्तु गठवाला खाप के बहावड़ी थांबेदार चौधरी बाबा श्याम सिंह का कहना है -''सगोत्रीय विवाह मंजूर नहीं होगा क्योंकि इससे संस्कृति को खतरा है अपने गोत्र को बचाकर कहीं भी शादी की जा सकती है ,''            सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्णय दिया वह हिन्दू विवाह अधिनियम १९५५ की रौशनी में दिया जिसमे सगोत्रीय व् सप्रवर विबाह मान्य हैं किन्तु खाप जिस रौशनी में काम करती हैं वे प्राचीन हिन्दू धर्मशास्त्रों में रहा उनका विश्वास है ,जिसके अनुस…

जीना है तो जल बचा -ओ ! इंसान

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शामली अधिवक्ता अनैतिक धरना-प्रदर्शन की राह पर

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शामली के अधिवक्ता अनैतिक धरना-प्रदर्शन की राह पर चल पड़े हैं ,जहाँ कैराना में जिला न्यायाधीश की कोर्ट की स्थापना के लिए हाईकोर्ट व् सरकार के कदम बढ़ते हैं तभी शामली के अधिवक्ता अपना काम-काज ठप्प कर धरना प्रदर्शन करने बैठ जाते हैं ,            2011 में प्रदेश सरकार ने शामली को जिला बनाया किन्तु वहां एक  तो स्थान का अभाव है दूसरे वहां अभी तक केवल तहसील स्तर तक के ही न्यायालय काम कर रहे हैं ऐसे में वहां जनपद न्यायालय की कोर्ट की स्थापना से पहले की सारी कोर्ट्स की स्थापना ज़रूरी है  जिसमे अभी लगभग 8 से 10 साल लगने संभव हैं दूसरी और शामली जिले की ही  तहसील कैराना में एडीजे कोर्ट तक के न्यायालय स्थापित हैं और वहां कई ऐसे भवन भी हैं जहाँ जनपद न्यायाधीश आनन्-फानन में बैठ सकते है ,          इतनी अच्छी व्यवस्था अपने जनपद में ही होते हुए भी जब तक शामली जिले का जनपद न्यायाधीश का कार्य मुज़फ्फरनगर से चलता रहता है तब तक शामली के अधिवक्ताओं के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती और जैसे  कैराना में जनपद न्यायाधीश के बैठने की बात सामने आती है वे मरने मारने पर उतारू हो जाते हैं ,केवल इसलिए कि उन्हें मुज़फ्फरनगर क…

उड़ती खुशखबरी -जनपद न्यायाधीश कैराना बैठेंगे

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जिला न्यायालय के लिए शामली के अधिवक्ताओं ने पहले भी  इस सत्य को परे रखकर  न्यायालय के कार्य  को ठप्प किया और अब भी जब से कैराना में जनपद न्यायाधीश के बैठने की सम्भावना बनी है तबसे फिर उनके द्वारा काम ठप्प किये जाने ,आंदोलन किये जाने की धमकियाँ दी जा रही हैं  जबकि सभी के साथ शामली इस प्रयोजन हेतु कितना उपयुक्त है वे स्वयं जानते हैं.          शामली 28 सितम्बर २०११ को मुज़फ्फरनगर से अलग करके  एक जिले के रूप में स्थापित किया गया .जिला बनने से पूर्वशामली तहसील रहा है और यहाँ तहसील सम्बन्धी कार्य ही निबटाये जाते रहे हैं. न्यायिक कार्य दीवानी ,फौजदारी आदि के मामले शामली से कैराना और मुज़फ्फरनगर जाते रहे हैं .
    आज कैराना न्यायिक व्यवस्था  के मामले में उत्तरप्रदेश में एक सुदृढ़ स्थिति रखता है    कैराना में न्यायिक व्यवस्था की पृष्ठभूमि के बारे में बार एसोसिएशन कैराना के पूर्व अध्यक्ष ''श्री कौशल प्रसाद एडवोकेट ''जी ने बताया था - '' सन १८५७ में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रथम  स्वतंत्रता संग्राम के द्वारा ऐतिहासिक क्रांति का बिगुल बजने के बाद मची उथल-पुथल से घबराये ब्रिटिश…