कल आप हैं निशाना
" कहने को हैं बहुत कुछ, गर कहने पर आयें, फट जायेगा कलेजा, गर दास्ताने हकीकत सुनायें." सर्दियों की शाम, 7.30 का वक्त, अचानक दो स्कूटी तीन मोटर साइकिल आकर रूकती हैं, दस बारह लड़के दुकान का शटर गिरा रहे एक लड़के को घेर लेते हैं और लड़के के धांय धांय धांय कर तीन गोलियां मार देते हैं और फिर आराम से अपनी अपनी बाईक स्कूटी पर बैठते हैं और तमंचे लहराकर फुर्र हो जाते हैं, सारा बाजार अपलक ये सब देखता है और किसी की हिम्मत नहीं जो आगे जाकर किसी को रोके और पुलिस के हवाले कर दे, पहचान तो दूर की बात है कहना भी बस इतना कि पलक झपकते ही क्या हो गया हमारी तो समझ में ही नहीं आया. लोगों से ठसाठस भरी बस, बीच में एक सीट पर दो औरतों के साथ बैठी एक लड़की, शायद कालेज जा रही थी, कालेज में शायद पेपर थे इसलिए लगातार पढने में लगी हुई थी, तभी एक जगह सवारी चढाने को बस रूकती है, बस में चार-पांच लड़के चढते हैं और लड़की को छेडना शुरू करते हैं, बस से खींचने की कोशिश करते हैं और अन्त में बस को रूकवा कर लड़की को बस से उतार लेते हैं, लड़की चीखती रहती है, मदद की गुहार लगाती है पर कोई नहीं सुनता, कोई हाथ मदद को...