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जुलाई, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कब मिलेगा फरीदा को न्याय

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करंट से बालक की मौत मकान में उतरा करंट, फुफेरी बहन झुलसी, लोगों ने जाम लगाया अमर उजाला ब्यूरो खतौली। बरसात के दौरान अचानक हाईटेंशन लाइन का करंट मकान में दौड़ जाने से मासूम बालक की मौत हो गई, जबकि उसकी फुफेरी बहन झुलस गई। बालक की मौत से गुस्साए लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ हंगामा कर प्रदर्शन किया और शव को सड़क पर रख कर जाम लगा दिया। सूचना पर पहुंचे एसडीएम और सीओ ने परिजनों और लोगों को समझा बुझाकर जाम खुलवाया। बालाजीपुरम निवासी विनोद पुत्र प्रकाश के मकान के पास से ही हाईटेंशन लाइन जा रही है, जिसकी एंगल दीवार पर ही लगा रखी है। मंगलवार दाेपहर करीब एक बजे बरसात के दौरान अचानक हाईटेंशन लाइन के एंगल पर लगा इंसुलेटर फट गया और करंट मकान में फैल गया। इस दौरान विनोद का चार साल का बेटा मानू जीने पर खेल रहा था, जिसकी करंट से मौत हो गई। जबकि उसकी फुफेरी बहन बबीता झुलस गई। बालक की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना पर माेहल्ले वालों की भीड़ एकत्र हो गई। फोन करके आपूर्ति बंद कराई गई। लोगों ने बिजली वालों के खिलाफ हंगामा करते हुए शव को इंदिरा मूर्ति के पास सड़क पर रख कर जाम लगा दि

सभी को ईद मुबारक के साथ ही हरियाली तीज की शुभकामनायें

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ईद मुबारक के  साथ ही सभी को हरियाली तीज की  शुभकामनायें मुबारकबाद सबको दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे , महक इस मौके में भर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे , ********************************************* मुब्तला आज हर बंदा ,महफ़िल -ए -रंग ज़माने में , मिलनसारी यहाँ भर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे , ************************************************************* मुक़द्दस दूज का महताब ,मुकम्मल हो गए रमजान , शमा हर रोशन अब कर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे , ********************************************************** रहे मज़लूम न कोई ,न हो मज़रूह हमारे से , मरज़ हर दूर अब कर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे . ************************************************************* ईद खुशियाँ मनाने को ,ख़ुदा का सबको है तौहफा , मिठास मुरौव्वत की भर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे . ******************************************************************** भुलाकर मज़हबी मुलम्मे ,मुहब्बत से गले मिल लें , मुस्तहक यारों का कर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे . ******************************************

सानिया विरोध :भाजपा की अंदरुनी शक्ल

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आपने एक फ़िल्मी गाना तो सुना ही होगा - ''मेरी मर्ज़ी     मैं चाहे ये करूँ ,मैं चाहे वो करूँ ,                        मेरी मर्ज़ी'' और इसी गाने की तर्ज़ पर आप आजकल एक सत्तारूढ़ दल को देख व् परख सकते हैं जो इसे कुछ मोड़कर यूँ गाते फिरते हैं - ''मेरी मर्ज़ी     मैं चाहे ये कहूँ  ,मैं चाहे वो कहूँ  ,                        मेरी मर्ज़ी'' आप सभी वैसे इनके पक्ष में कभी नहीं बोलेंगे किन्तु जो सच्चाई है उसे नाकारा भी तो नहीं जा सकता और सच्चाई ये है कि सोनिया गांधी जिनकी शादी भारतीय नागरिक राजीव गांधी से हुई उन्हें कभी भारत की बहू न स्वीकारने वाले भाजपाई हमेशा उन्हें इटली की बेटी ही कहते फिरते हैं और आज जब अपनी बेटी पर बात आई तो उसे अपनी बेटी न कहकर पाकिस्तान की बहू कहकर अपने से अलग करने की कोशिश की जा रही है .        सानिया मिर्जा भारत की एक ऐसी टेनिस स्टार जिसने भारत का नाम टेनिस के आकाश में सुनहरे अक्षरों में अंकित किया .भारत में उनसे पहले कोई महिला टेनिस खिलाड़ी हुई हो हमें याद नहीं पड़ता .जिस दिन से सानिया मिर्जा ने इस क्षेत्र में पदार्पण किया उस दिन से वे भ

धर्म भी आज यही कह रहा है -

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     कविवर गोपाल दास ''नीरज''ने कहा है -   ''जितनी देखी दुनिया सबकी दुल्हन देखी ताले में    कोई कैद पड़ा मस्जिद में ,कोई बंद शिवाले में ,     किसको अपना हाथ थमा दूं किसको अपना मन दे दूँ ,    कोई लूटे अंधियारे में ,कोई ठगे उजाले में .'' धर्म के   ये ही दो रूप हमें भी दृष्टिगोचर होते हैं .कोई धर्म के पीछे अँधा है तो किसी के लिए धर्म मात्र दिखावा बनकर रह गया है .धर्म के नाम पर सम्मेलनों की ,विवादों की ,शोर-शराबे की संख्या तो दिन-प्रतिदिन तेजी से बढती जा रही है लेकिन जो धर्म का मर्म है उसे एक ओर रख दिया गया है .आज जहाँ देखिये कथा वाचक कहीं भगवतगीता ,कहीं रामायण बांचते नज़र आयेंगे ,महिलाओं के सत्संगी संगठन नज़र आएंगे .विभिन्न समितियां कथा समिति आदि नज़र आएँगी लेकिन यदि आप इन धार्मिक समारोहों में कथित सौभाग्य से  सम्मिलित होते हैं तो ये आपको पुरुषों का  बड़े अधिकारियों, नेताओं से जुड़ने का बहाना ,महिलाओं का एक दूसरे की चुगली करने का बहाना  ही नज़र आएगा .      दो धर्म विशेष ऐसे जिनमे एक में संगीत पर पाबन्दी है तो गौर फरमाएं तो सर्वाधिक कव्वाली,ग़ज़ल गायक आप

विकास के लिए वी.आई.पी. के कन्धों के सहारे की उम्मीद आखिर क्यूँ ?

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Stephanie Strom Born c. 1963 Dickinson, Texas Occupation journalist Notable credit(s) The New York Times स्टेफ़नी स्ट्रॉम [अमर उजाला में प्रकाशित ] अपने एक आलेख ''बनारस को कैसे संवारेंगे मोदी ''  में लिखती हैं -''इस शहर के लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिजली कब तक साथ देगी ?नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गंगा किनारे बसे इस शहर के लोगों को तकरीबन निर्बाध बिजली मिल रही है वरना पहले आठ से दस घण्टे उन्हें बिजली के बिना रहना पड़ता था .कालीन निर्यातक और कार डीलर एहसान खान कहते हैं पिछले महीने उन्हें जेनरेटर की खास ज़रुरत नहीं पड़ी .''       ऐसे ही हाल इटावा मैनपुरी के होते हैं जब मुलायम सिंह सत्ता में आते हैं इसी तरह बादलपुर-सहारनपुर चमकते हैं जब मायावती सत्ता में आती हैं आखिर क्यों होता है ऐसा ? जिस देश में लोकतंत्र हो और लोकतंत्र को चलाने वाली प्रधान संस्था संसद के अहम सदन लोकसभा तक में यह रिवाज़ हो कि वहां लोकसभा अध्यक्ष चुने जाने पर अध्यक्ष मात्र अध्यक्ष होगा किसी पार्टी विशेष का सदस्य नहीं ,वहां इस तरह का भेदभाव कहाँ तक स्वीकार

लखनऊ की निर्भया की कहानी, पिता की जुबानी;ये है उत्तर प्रदेश की हवा सुहानी

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ल खनऊ की निर्भया की कहानी, पिता की जुबानी विवेक त्रिपाठी शनिवार, 19 जुलाई 2014 अमर उजाला, लखनऊ Updated @ 11:44 AM IST मोहनलालगंज कोतवाली में बैठे उस दुबले-पतले शख्स का शरीर कांप रहा था। चेहरा दर्द, चिंता, उलझनों और अबूझ सवालों से बोझिल हो चुका था। मन कहीं खोया हुआ था। रह-रहकर आंखें भीग जाती थीं। रुलाई रोकने की कोशिश में कई बार चेहरा दोनों हथेलियों से ढक लिया। डीआईजी नवनीत सिकेरा ने उनसे बातचीत शुरू की तो आंखों से आंसुओं का सैलाब निकल गया। बोले, ‘ऐसा क्यों हो गया?’ यह शख्स बलसिंहखेड़ा प्राथमिक विद्यालय में दरिंदगी की शिकार युवती के पिता हैं। उन्होंने बताया कि बेटी हिम्मत हारने वाली नहीं थी। छह साल पहले पति की मौत के बाद से वह अकेले ही बच्चों को संभाल रही थी। बोले-ससुरालवालों ने भी मुंह मोड़ लिया। बेटी के लिए जिंदगी का एक-एक दिन बड़ा मुश्किल था। फोन पर वह अपनी तकलीफों का जिक्र करती तो कलेजा मुंह में आ जाता। अक्सर वह बेटी से सबकुछ छोड़कर घर आने की बात कहते थे, तो बेटी उनसे सिर्फ जमाने से लड़ने का हौसला और आशीर्वाद मांगती थी। कहती थी, ‘कुछ सपने

सभी धर्म एक हैं

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''बाद तारीफ़ में एक और बढ़ाने के लिए, वक़्त तो चाहिए रू-दाद सुनाने के लिए. मैं दिया करती हूँ हर रोज़ मोहब्बत का सबक़, नफ़रतो-बुग्ज़ो-हसद दिल से मिटाने के लिए.'' हमारा भारत वर्ष संविधान  द्वारा धर्म निरपेक्ष घोषित किया गया है कारण आप और हम सभी जानते हैं किन्तु स्वीकारना नहीं चाहते,कारण वही है यहाँ विभिन्न धर्मों का वास होना और धर्म आपस में तकरार की वजह न बन जाएँ इसीलिए संविधान ने भारत को धर्म-निरपेक्ष राज्य घोषित किया ,किन्तु जैसी कि आशंका भारत के स्वतंत्र होने पर संविधान निर्माताओं को थी अब वही घटित हो रहा है और सभी धर्मों के द्वारा अपने अनुयायियों  को अच्छी शिक्षा देने के बावजूद आज लगभग सभी धर्मों के अनुयायियों में छतीस का आंकड़ा तैयार हो चुका है.   सभी धर्मो  के प्रवर्तकों ने अपने अपने ढंग से मानव जीवन सम्बन्धी आचरणों को पवित्र बनाने के लिए अनेक उपदेश दिए हैं लेकिन यदि हम ध्यान पूर्वक देखें तो हमें पता चलेगा कि सभी धर्मों की मूल भावना एक है और सभी धर्मों का अंतिम लक्ष्य मानव जाति को मोक्ष प्राप्ति की और अग्रसर करना है .संक्षेप में स

नारी से भी वही मिलेगा जो तुम दोगे साथ निभाकर .

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  आज करूँ आगाज़ नया ये अपने ज़िक्र को चलो छुपाकर , कदर तुम्हारी नारी मन में कितनी है ये तुम्हें बताकर . ................................................................................................................   जिम्मेदारी समझे अपनी सहयोगी बन काम करे , साथ खड़ी है नारी उसके उससे आगे कदम बढाकर . ...............................................................................   बीच राह में साथ छोड़कर नहीं निभाता है रिश्तों को , अपने दम पर खड़ी वो होती ऐसे सारे गम भुलाकर . .................................................................................................................   कैद में रखना ,पीड़ित करना ये न केवल तुम जानो , जैसे को तैसा दिखलाया है नारी ने हुक्म चलाकर . ............................................................................................................   धीर-वीर-गंभीर पुरुष का हर नारी सम्मान करे , आदर पाओ इन्हीं गुणों को अपने जीवन में अपनाकर . ...................................................................................................

पश्चिमी यूपी से न्याय करे मोदी सरकार

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 पश्चिमी यूपी से न्याय करे मोदी सरकार                                                                                                                           पश्चिमी यू.पी.उत्तर प्रदेश का सबसे समृद्ध क्षेत्र है .चीनी उद्योग ,सूती वस्त्र उद्योग ,वनस्पति घी उद्योग ,चमड़ा उद्योग आदि आदि में अपनी पूरी धाक रखते हुए कृषि क्षेत्र में यह उत्तर प्रदेश सरकार को सर्वाधिक राजस्व प्रदान करता है .इसके साथ ही अपराध के क्षेत्र में भी यह विश्व में अपना दबदबा रखता है .यहाँ का जिला मुजफ्फरनगर तो बीबीसी पर भी अपराध के क्षेत्र में ऊँचा नाम किये है और जिला गाजियाबाद के नाम से तो अभी हाल ही में एक फिल्म का भी निर्माण किया गया है .यही नहीं अपराधों की राजधानी होते हुए भी यह क्षेत्र धन सम्पदा ,भूमि सम्पदा से इतना भरपूर है कि बड़े बड़े औद्योगिक घराने यहाँ अपने उद्योग स्थापित करने को उत्सुक रहते हैं और इसी क्रम में बरेली मंडल के शान्ह्जहापुर में अनिल अम्बानी ग्रुप के रिलायंस पावर ग्रुप की रोज़ा  विद्युत परियोजना में २८ दिसंबर २००९ से उत्पादन शुरू हो गया है .सरकारी नौकरी में लगे अधिकारी भले ही न्याय विभा

न कोशिश ये कभी करना -gazal

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न कोशिश ये कभी करना . दुखाऊँ दिल किसी का मैं -न कोशिश ये कभी करना , बहाऊँ आंसूं उसके मैं -न कोशिश ये कभी करना. नहीं ला सकते हो जब तुम किसी के जीवन में सुख चैन , करूँ महरूम फ़रहत से-न कोशिश ये कभी करना . चाहत जब किसी की तुम नहीं पूरी हो कर सकते , करो सब जो कहूं तुमसे-न कोशिश ये कभी करना . किसी के ख्वाबों को परवान नहीं हो तुम चढ़ा सकते , हक़ीकत इसको दिखलाऊँ-न कोशिश ये कभी करना . ज़िस्म में मुर्दे की जब तुम सांसे ला नहीं सकते , बनाऊं लाश जिंदा को-न कोशिश ये कभी करना . समझ लो '' शालिनी '' तुम ये कहे ये जिंदगी पैहम , तजुर्बें मेरे अपनाएं-न कोशिश ये कभी करना .                                   शालिनी कौशिक                                         [कौशल]

मुकम्मल है वही सम्बन्ध मुहब्बत नींव है जिसकी

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तमन्ना जिसमे होती है कभी अपनों से मिलने की रूकावट लाख भी हों राहें उसको मिल ही जाती हैं , खिसक जाये भले धरती ,गिरे सर पे आसमाँ भी खुदा की कुदरत मिल्लत के कभी आड़े न आती है . ............................................................................................ फ़िक्र जब होती अपनों की समय तब निकले कैसे भी दिखे जब वे सलामत हाल तसल्ली दिल को आती है , दिखावा तब नहीं होता प्यार जब होता अपनों में मुकाबिल कोई भी मुश्किल रोक न इनको पाती है . ....................................................................... मुकद्दर साथ है उनके मुक़द्दस ख्याल रखते जो नहीं मायूसी की छाया राह में आने पाती है , मुकम्मल है वही सम्बन्ध मुहब्बत नींव है जिसकी महक ऐसे ही रिश्तों की सदा ये सदियाँ गाती हैं . .......................................................................... खोलती है अपनी आँखें जनम लेते ही नन्ही जान फ़ौज वह नातेदारों की सहमकर देखे जाती है, गोद माँ की ही देती है सुखद एहसास वो उसको जिसे पाकर अनजानों में सुकूँ से वो सो पाती है . ............................................

शामली कैराना को संयुक्त रूप से जिला घोषित करे उत्तर प्रदेश सरकार

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शामली 28 सितम्बर २०११ को मुज़फ्फरनगर से अलग करके एक जिले के रूप में स्थापित किया गया .जिला बनने से पूर्व शामली तहसील रहा है और यहाँ तहसील सम्बन्धी कार्य ही निबटाये जाते रहे हैं. न्यायिक कार्य दीवानी ,फौजदारी आदि के मामले शामली से कैराना और मुज़फ्फरनगर जाते रहे हैं और जिला बनने से लेकर आज तक शामली तरस रहा है एक जिले की तरह की स्थिति पाने के लिए क्योंकि सरकार द्वारा अपने वोट बैंक को बढ़ाने के लिए जिलों की स्थापना की घोषणा तो कर दी जाती है किन्तु सही वस्तुस्थिति जो क़ि एक जिले के लिए चाहिए उसके बारे में उसे न तो कोई जानकारी चाहिए न उसके लिए कोई प्रयास ही सरकार द्वारा किया जाता है .पूर्व में उत्तर प्रदेश सरकार ऐसा बड़ौत क्षेत्र के साथ भी कर चुकी है जिले की सारी आवश्यक योग्यता रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बागपत को जिला बना दिया गया . आज शामली जो क़ि न्यायिक व्यवस्था में बिलकुल पिछड़ा हुआ है उसके न्यायालयों को जिले के न्यायालय का दर्ज देने की कोशिश की जा रही है उसके लिए शामली के अधिवक्ता भवन स्थापना के लिए शामली में अस्थायी भवनों की तलाश करते फिर रहे हैं और कैराना जो क़ि इस संबंध में बहुत

''आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है ..''

किसी शायर ने कहा है - ''कौन कहता है आसमाँ में सुराख़ हो नहीं सकता , एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों .'' भारतवर्ष सर्वदा से ऐसी क्रांतियों की भूमि रहा है जिन्होंने हमेशा ''असतो मा सद्गमय ,तमसो मा ज्योतिर्गमय ,मृत्योर्मामृतं गमय''का ही सन्देश दिया है और क्रांति कभी स्वयं नहीं होती सदैव क्रांति का कारक भले ही कोई रहे पर दूत हमेशा आम आदमी ही होता है क्योंकि जिस तरह से लावा ज्वालामुखी के फटने पर ही उत्पन्न होता है वैसे ही क्रांति का श्रीगणेश भी आम आदमी के ह्रदय में उबलते क्रोध के फटने से ही होता है . आम आदमी की ताकत क्या है ये अभी हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में देखने को मिला जब आम जनता ने वोट के अधिकार का इस्तेमाल कर सत्तारूढ़ दल को उखाड़ फेंका और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को बरसों बाद स्पष्ट बहुमत दिया .इन चुनावों में जनता ने दिखा दिया कि आम जनता बेवकूफ बनने वालों में नहीं है .लुभावने वादों और साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण को दरकिनार कर जनता ने देशहित देखते हुए एकजुट होकर वोट दिया और जनता को उसकी इस ताकत का एहसास दिलाने वाला शख्स भी एक