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.... गर रख लो जायदाद.

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दो पल सुकून के नहीं ,गर रख लो जायदाद , पलकें झपक न पाओगे ,गर रख लो जायदाद , चुभती हैं अपने हाथों पर अपनी ही रोटियां खाना भी खा न पाओगे ,गर रख लो जायदाद . ................................................................. क्या करती बड़े घर का तू ,इंसान बेऔलाद , रहने को घर न चाहिए ,गर रख लो जायदाद . .............................................................. मुझको भी रख ले साथ में,चाहत है सभी की, अकेले रह न पायेगी ,गर रख लो जायदाद . ................................................................ ज़ालिम तू इस ज़माने से ,क्यों नहीं डर रही , डर-डर के जी सके है तू ,गर रख लो जायदाद . ............................................................. मकान हो,दुकान हो ,हैं और किसी की, अकेले हो ज़माने में ,गर रख लो जायदाद. ............................................................... पहचान ले ज़माने की ,असलियत ''शालिनी '', फुकती ही रहेगी सदा ,गर रख लो जायदाद . ...शालिनी कौशिक [कौशल ]

खुदा की कुदरत.......

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तमन्ना जिसमे होती है कभी अपनों से मिलने की रूकावट लाख भी हों राहें उसको मिल ही जाती हैं , खिसक जाये भले धरती ,गिरे सर पे आसमाँ भी खुदा की कुदरत मिल्लत के कभी आड़े न आती है . ............................................................................................ फ़िक्र जब होती अपनों की समय तब निकले कैसे भी दिखे जब वे सलामत हाल तसल्ली दिल को आती है , दिखावा तब नहीं होता प्यार जब होता अपनों में मुकाबिल कोई भी मुश्किल रोक न इनको पाती है . ....................................................................... मुकद्दर साथ है उनके मुक़द्दस ख्याल रखते जो नहीं मायूसी की छाया राह में आने पाती है , मुकम्मल है वही सम्बन्ध मुहब्बत नींव है जिसकी महक ऐसे ही रिश्तों की सदा ये सदियाँ गाती हैं . .......................................................................... खोलती है अपनी आँखें जनम लेते ही नन्ही जान फ़ौज वह नातेदारों की सहमकर देखे जाती है, गोद माँ की ही देती है सुखद एहसास वो उसको जिसे पाकर अनजानों में सुकूँ से वो सो पाती है . ...............................................