प्यार है पवित्र पुंज ,प्यार पुण्य धाम है
" प्यार है पवित्र पुंज ,प्यार पुण्य धाम है. पुण्य धाम जिसमे कि राधिका है श्याम है . श्याम की मुरलिया की हर गूँज प्यार है. प्यार कर्म प्यार धर्म प्यार प्रभु नाम है." एक तरफ प्यार को "देवल आशीष"की उपरोक्त पंक्तियों से विभूषित किया जाता है तो एक तरफ प्यार को "बेकार बेदाम की चीज़ है"जैसे शब्दों से बदनाम किया जाता है.कोई कहता है जिसने जीवन में प्यार नहीं किया उसने क्या किया?प्यार के कई आयाम हैं जिसकी परतों में कई अंतर कथाएं छिपी हैं .प्रेम विषयक दो विरोधी मान्यताएं हैं-एक मान्यता के अनुसार यह व्यर्थ चीज़ है तो एक के अनुसार यह जीवन में सब कुछ है .पहली मान्यता को यदि देखा जाये तो वह भौतिकवाद से जुडी है .जमाना कहता है कि लोग प्यार की अपेक्षा दौलत को अधिक महत्व देते हैं लेकिन यदि कुछ नए शोधों पर ध्यान दें तो प्यार का जीवन में स्थान केवल आकर्षण तक ही सीमित नहीं है वरन प्यार का जीवन में कई द्रष्टिकोण से महत्व है .न्यू हेम्पशायर विश्व विध्यालय के...