तो ये हैं मोदी के अच्छे दिन
''कर दिया न मोदी ने फिर सर्जिकल स्ट्राइक ''कह जैसे ही साथी अधिवक्ता ने मोदी की तारीफ सुननी चाही तो सही में इस बार मन कड़वा हो गया अभी तक तो अपनी राजनीतिक नापसंदगी के कारण मोदी की तारीफ करने को मुंह नहीं खुलता था किन्तु आज मोदी के इस काम के कारण उसकी तारीफ करने को सच में मन ही नहीं किया .हमारे क़ानूनी जीवन में एक उक्ति है ''भले ही निन्यानवे गुनाहगार बच जाएँ किन्तु एक निर्दोष को सजा नहीं मिलनीचाहिए . ''और यहाँ निर्दोषों को ही सजा मिल रही है .जिस दिन से मोदी ने ५००-१००० के नोट बैन किये हैं हमारे समाचार पत्र व् आस-पास का जगत निर्दोषों की मृत्यु के समाचारों से भरा पड़ा है और मोदी के अंध-भक्त मीडिया की इन ख़बरों को उसके प्रचार करने की पुरानी आदत कह रहे है अब भला इन्हें कोई ये बताये कि अगर आप ही सही हैं तो पिछले दिनों जो मीडिया मोदी मोदी की तारीफों के पुल बांधे था क्या वह इसकी इसी आदत के कारण था या वास्तव में आपके मोदी में कुछ खास होने के कारण था ? श्री रामचरितमानस में एक प्राचीन कहावत है - ''जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी , ...