तो ये हैं मोदी के अच्छे दिन

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''कर दिया न मोदी ने फिर सर्जिकल स्ट्राइक ''कह जैसे ही साथी अधिवक्ता ने मोदी की तारीफ सुननी चाही तो सही में इस बार मन कड़वा हो गया अभी तक तो अपनी राजनीतिक नापसंदगी के कारण मोदी की तारीफ करने को मुंह नहीं खुलता था किन्तु आज मोदी के इस काम के कारण उसकी तारीफ करने को सच में मन ही नहीं किया .हमारे क़ानूनी जीवन में एक उक्ति है ''भले ही निन्यानवे गुनाहगार बच जाएँ किन्तु एक निर्दोष को सजा नहीं मिलनीचाहिए . ''और यहाँ निर्दोषों को ही सजा मिल रही है .जिस दिन से मोदी ने ५००-१००० के नोट बैन किये हैं हमारे समाचार पत्र व् आस-पास का जगत निर्दोषों की मृत्यु के समाचारों से भरा पड़ा है और मोदी के अंध-भक्त मीडिया की इन ख़बरों को उसके प्रचार करने की पुरानी आदत कह रहे है अब भला इन्हें कोई ये बताये कि अगर आप ही सही हैं तो पिछले दिनों जो मीडिया मोदी मोदी की तारीफों के पुल बांधे था क्या वह इसकी इसी आदत के कारण था या वास्तव में आपके मोदी में कुछ खास होने के कारण था ?
        श्री रामचरितमानस में एक प्राचीन कहावत है -
     ''जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी ,
             सो नृप अवसि नरक अधिकारी .''
   और मोदी ३० दिसंबर के बाद काले धन पर और सख्त कदम उठाने की बात कह रहे हैं ,कह रहे हैं कि बेईमानों से लूँगा आज़ादी के बाद से अब तक की पाई पाई का हिसाब जबकि पहले वे ये तो पता लगा लें कि जिस कदम से वे काले धन के खिलाफ कदम उठा रहे हैं वह कदम उनका आम जनता को कितना भारी पड़ रहा है और जिन राम का नाम लेकर वे सत्ता में आये हैं उन्ही राम के आदर्श जीवन के अनुसार ये कदम उनकी प्रजा के लिए काल का मुख बन रहा है और इस कदम के बारे में उनके अंध-भक्तों के अनुसार सर्जिकल स्ट्राइक जैसी उपाधि  आने के कारण सुप्रीम कोर्ट तक को कहना पड़ गया है -''कि काले धन और नकली नोटों पर लगाम लगाने के लिए आपका कदम अच्छा हो सकता है  लेकिन पुराने नोट रखने वाले हर व्यक्ति के लिए यह नहीं कहा जा सकता कि उसके पास काला धन है ..अदालत ने कहा कि आप काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक कर सकते हैं ,लेकिन देश के लोगों पर नहीं .  पीठ ने सरकार से कहा कि आम धारणा ये है कि उन लोगों को परेशानी हो रही है जिनका काले धन से कोई लेना देना नहीं है .काले धन को लेकर जिन लोगों पर टारगेट है ,क़तर में खड़ा व्यक्ति वे नहीं हैं .पीठ ने कहा ये कार्पेट बॉम्बिंग है क्योंकि इससे सभी लोग प्रभावित हो रहे हैं .''पीठ ने कहा ,''लोग अपने पैसे निकालने के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं .हो सकता है कि उनकी रकम जायज हो ,यानि कि इसके लिए उन्होंने कर अदा किया हो .''
         दिहाड़ी मजदूर ,सब्जी विक्रेता बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें परेशानी हो रही है लेकिन स्वतंत्र भारत के अंध-भक्तों को मोदी से बेहतरीन प्रधानमंत्री नहीं दिखता जबकि मोदी इस वक्त अपने इस कदम के कारण हमारी इस कहावत के कारण नरक के अधिकारी हैं क्योंकि उन्हें जनता का कष्ट नहीं दिख रहा है वे जनता को कभी बेईमान कह रहे हैं तो कभी उससे रो-रोकर ५० दिन मांग रहे हैं जबकि बेहाल जनता ५० घंटे भी देने को तैयार नहीं है और कौन दे सकता है उन स्थितियों में जिनमे मोदी ने ५००-१००० के नोट बैन कर दिए  .''देवोत्थान एकादशी '' हिंदुओं में शादी विवाह के प्रारम्भ का मुहूर्त है और सभी जानते हैं कि शादी विवाहों में बड़ी संख्या में बड़े नोट प्रयोग में आते हैं ऐसे में ठीक एक दिन पहले दोनों ही बड़े नोटों को बैन कर मोदी जी ने आम जनता को मरने  के लिए मजबूर कर दिया है कहीं किसान बेटी के विवाह के जमा पैसों से खरीदारी न कर पाने के कारण आत्म हत्या कर रहा है कहीं शगुन के कार्ड पर लिखवाया जा रहा है कि ''कृपया शगुन में ५००-१००० के नोट न दें .''कहीं नोट बदलने के लिए जनता सारे सारे दिन कतारों में खड़ी है तो कहीं शादी का सामान न खरीद नोट होते हुए भी न खरीद पाने के कारण भाई बाप बेहाल परेशान घर लौट रहे हैं और ऊपर से मोदी जी कह रहे हैं मेरे कड़क फैसले से सिर्फ बेईमान ही परेशान है .''तब तो वे सीधी तरह से सम्पूर्ण भारतवासियों को बेईमान कह रहे हैं क्योंकि जिस दिन से नोट बैन हुए हैं बैंकों के आगे लंबी लंबी कतारों में घंटों घंटों खड़े रह भूख प्यास से मरने वाले आम भारतीय ही हैं .जबकि मोदी जी के अनुसार केवल बेईमान परेशान हैं तब तो सभी आम भारतीय बेईमान ही हुए .
           विपक्ष द्वारा आलोचना वह भी ''अपने मुंह मियां मिट्ठू की ''तो जरुरी थी ,पर उस आलोचना का मोदी ने जिस मूर्खतापूर्ण तरीके से जवाब दिया उसकी ही उम्मीद उनसे थी क्योंकि अपने भूत में भी वे ऐसी ही बहुत गलतियां कर चुके हैं .वे कहते हैं कि ''कांग्रेस ने जब चवन्नी बंद की तो हमने क्या कहा ? जबकि जनता तो उनसे यही पूछती है कि '''क्यों नहीं कहा अगर कहना चाहिए था और अगर आप अपनी तुलना कांग्रेस से ही करते हैं तो कांग्रेस के ही भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने एक रेल दुर्घटना होने पर रेल मंत्री के पद से त्याग पत्र दे दिया था आपके इस कदम से जनता के इतने लोग मर रहे हैं आप उनसे ५० दिन का इंतज़ार कर सजा देने को क्यों कह रहे हैं त्यागपत्र तुरंत क्यों नहीं दे रहे हैं ?और रही बात चवन्नी की तो चवन्नी उस वक्त चलन से बाहर हो चुकी थी जबकि ५००-१००० के नोट इस वक्त जबरदस्त चलन में हैं बैंक में भी अगर पैसे निकालने जाओ तो वहां से ५००-१००० के नोट ही मिलते हैं इसलिए मोदी जी की चवन्नी की तुलना ५००-१००० के नोट से बेकार है अगर वे इस वक्त ५० पैसे बैन करते तो कोई कुछ नहीं कहता क्योंकि वे भी चलन से बाहर हो चुके हैं किन्तु क्या करें मोदी जी को सर्जिकल स्ट्राइक  का भूत चढ़ चूका है भले ही उसकी पीड़ित आम जनता ही हो जाये .
              सर्जिकल स्ट्राइक काले धन के खिलाफ है कहना मुश्किल है क्योंकि ५००-१००० के नकली नोट बंद तो बाद में होंगे २००० के नकली नोट बाजार में पहले ही आ चुके हैं और यही नहीं मालिकों के नोट बदलवाकर मजदूर रोजी रोटी कमा रहे हैं.बार बार नोट बदलने वालों को रोकने के लिए वोट डालने पर लगने वाली स्याही लगायी जा रही है जबकि ये स्याही बार बार वोट डालना तक नहीं रोक पायी तो बार बार नोट निकालना क्या  रोकेगी ?नोट के लिए सारे देशवासी तरस रहे हैं और कोई काम नहीं रह गया है नोट बदलवाने के सिवाय .आज ही अख़बार १२ और लोगों के मरने का समाचार नोटबंदी के कारण  दे  रहे हैं और मोदी के अंधभक्त कह रहे हैं कि मौत का कारण दूसरा है मीडिया तो यूँ ही मोदी के खिलाफ प्रचार कर रहा है .अब मोदी व् मोदी के अंध-भक्त कैसे नोटों से देश चलाएंगे ये जनता की आँखों के सामने है .
शालिनी कौशिक
    [ कौशल ]

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