शुक्रवार, 8 जुलाई 2011

कर जाता है....

कर जाता है....


दिखाता मुख की सुन्दरता,टूट जाता इक  झटके में,
वहम हम रखते हैं जितने खत्म उनको कर जाता है.

है हमने जब भी ये चाहा,करें पूरे वादे अपने,
दिखा कर अक्स हमको ये, दफ़न उनको कर जाता है.

करें हम वादे कितने भी,नहीं पूरे होते ऐसे,
दिखा कर असलियत हमको, जुबां ये बंद कर जाता है 

कहें वो आगे बढ़ हमसे ,करो मिलने का तुम वादा,
बांध हमको मजबूरी में, दगा उनको दे जाता है.
                       शालिनी कौशिक 
-- 

19 टिप्‍पणियां:

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल बहुत ही अच्छा लगा पढ़ कर!

ईं.प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति । बहुत अच्छा लिखा आपने ।

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (09.07.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

रविकर ने कहा…

यही दुनिया का दस्तूर बना जाता है |
सुन्दर रचना ||

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Sunder Gazal.... Bahut Umda Prastuti...

शिखा कौशिक ने कहा…

bahut khoob ...aabhar

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

चारो मिसरे बहुत अच्छे हैं मगर मतला और मक्ता नहीं है इसमें!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

चारो मिसरे बहुत अच्छे हैं मगर मतला और मक्ता नहीं है इसमें!

Vikas Garg ने कहा…

है हमने जब भी ये चाहा,करें पूरे वादे अपने,
दिखा कर अक्स हमको ये, दफ़न उनको कर जाता है.

बहुत सुन्दर पंक्ति
vikasgarg23.blogspot.com

S.N SHUKLA ने कहा…

sundar bhavabhivyakti ,sundar rachana

आशुतोष की कलम ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर गज़ल।

vidhya ने कहा…

बहुत सुन्दर

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

bahut hee khoobsurat

mahendra srivastava ने कहा…

क्या कहने, बहुत सुंदर

करें हम वादे कितने भी,नहीं पूरे होते ऐसे,
दिखा कर असलियत हमको, जुबां ये बंद कर जाता है

mahendra srivastava ने कहा…

क्या कहने, बहुत सुंदर

करें हम वादे कितने भी,नहीं पूरे होते ऐसे,
दिखा कर असलियत हमको, जुबां ये बंद कर जाता है

mahendra srivastava ने कहा…

क्या कहने, बहुत सुंदर

करें हम वादे कितने भी,नहीं पूरे होते ऐसे,
दिखा कर असलियत हमको, जुबां ये बंद कर जाता है

अजय कुमार ने कहा…

अच्छी रचना , बधाई

mridula pradhan ने कहा…

bahut achchi lagi.....

''बेटी को इंसाफ -मरने से पहले या मरने के बाद ?

   '' वकील साहब '' कुछ करो ,हम तो लुट  गए ,पैसे-पैसे को मोहताज़ हो गए ,हमारी बेटी को मारकर वो तो बरी हो गए और हम .....तारी...