रविवार, 31 जुलाई 2011

जख्म देकर जाएँगी.





उलझने हावी हैं दिल पर कब तलक ये जाएँगी,
जिंदगी लेके रहेंगी या तहीदस्त जाएँगी.

है अजब अंगेज़ हाल-ए-दिल हमारा क्या कहें,
मीठी बातें उनकी हमको खाक ही कर जाएँगी.

भोली सूरत चंचल आँखें खींचे हमको अपनी ओर ,
फसलें-ताबिस्ता में ये यकायक आग लगा जाएँगी.

रवां-दवां रक्स इनका है इसी जद्दोजहद में ,
कैसे भी फ़ना करेंगी ले सुकून जाएँगी.

सोच सोच में व्याकुल क्या करेगी ''शालिनी''
जाते जाते भी उसे ये जख्म देकर जाएँगी.

                    शालिनी कौशिक


18 टिप्‍पणियां:

vidhya ने कहा…

आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें
बहुत ही खुबसूरत शब्दों का समायोजन....
लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/
अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

Rajesh Kumari ने कहा…

haale dil bayan kar dala bato hi bato me....jakhm dekar jayengi...bahut achchi abhvyakti.

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

Bhut sundar..par wo katil hai kaun...jisne ye haal kiya hai aapka:)

kumar ने कहा…

उलझने हावी हैं दिल पर कब तलक ये जाएँगी,
जिंदगी लेके रहेंगी या तहीदस्त जाएँगी.
बहुत खूबसूरत ग़ज़ल.....

रविकर ने कहा…

सुन्दर रचना |
बधाई |

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

सोच सोच में व्याकुल क्या करेगी ''शालिनी''
जाते जाते भी उसे ये जख्म देकर जाएँगी.

बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल बहुत ही अच्छा लगा पढ़ कर!

रेखा ने कहा…

सुन्दर ग़ज़ल .

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर ग़ज़ल लिखी है आपने!
--
आज पूरे 36 घंटे बाद ब्लॉग पर आया हूँ!
धीरे-धीरे सब जगह पहुँच जाऊँगा!

kshama ने कहा…

उलझने हावी हैं दिल पर कब तलक ये जाएँगी,
जिंदगी लेके रहेंगी या तहीदस्त जाएँगी.

है अजब अंगेज़ हाल-ए-दिल हमारा क्या कहें,
मीठी बातें उनकी हमको खाक ही कर जाएँगी.
Kya baat hai! Gazab kee panktiyan!

शिखा कौशिक ने कहा…

bahut khoob shalini ji .aabhar

S.N SHUKLA ने कहा…

बहुत खूबसूरत भावाभिव्यक्ति , बहुत सुन्दर

ईं.प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

बहुत खुब |

sunita upadhyay ने कहा…

bahut bahut sundar.meri subhkamnayen

Dr Varsha Singh ने कहा…

अंतर्मन को उद्देलित करती पंक्तियाँ, बधाई....

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

सोच सोच में व्याकुल क्या करेगी ''शालिनी''
जाते जाते भी उसे ये जख्म देकर जाएँगी.

khoobsoorat gazal ka meetha zakhm!!

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

आपकी इस गज़ल ने मन को मोह लिया है .. बहुत ही सुन्दर .. कुछ शेर तो दिल में बस गए है .. बधाई

आभार

विजय

कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

बहुत बढिया ।

Steve ने कहा…

Nice write up, Truly i inspired from this write up.

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