शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

देख लेना तब जिस्म में रूह न रहेगी.





इस कदर धोखे मिलेंगे ज़माने में,
            तो ये जिंदगी जिंदगी न रहेगी.
कैसे जी पाएंगे इस ज़माने में ,
               जो आपकी नज़रें इनायत न रहेंगी.

तुमको पाने की खातिर दुनिया में,
                 चाहा अनचाहा बहुत कुछ कर गए.
क्या तुम मिलोगे हमें तब जाकर ,
             जब इन चिरागों में रोशनी न रहेगी.

अब तो चाहत है बस यही अपनी ,
                तुमको कभी कभी याद आ जाएँ हम .
हमसे मिलने भी  आओगे गर तुम,
                देख लेना तब जिस्म में रूह न रहेगी.
-- 

22 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

अरे भाई ऐसा उलाहना मत दो |
कई फंस गया होगा दुनिया दारी में--
इतनी शिद्दत से कोई याद कर और बन्दा तवज्जो न दे गलत बात ||
ऐसे में कान -खिंचाई जरुर करना ||

जबरदस्त भाव ||
बधाई शालिनी जी ||

S.N SHUKLA ने कहा…

तुमको पाने की खातिर दुनिया में,
चाहा अनचाहा बहुत कुछ कर गए.
क्या तुम मिलोगे हमें तब जाकर ,
जब इन चिरागों में रोशनी न रहेगी.

Bahut sundar bhav,behatar prastuti

Sunil Kumar ने कहा…

यही तो इंतजार की हद है , बहुत खूब .....

रेखा ने कहा…

बहुत खूब ......कहते हैं कि सच्ची श्रद्धा और लगन से अगर भगवान को भी पुकारा जाय तो वे दौड़े चले आते हैं...

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

शालिनी जी इस सुन्दर भावपूर्ण रचना के लिए बधाई और शुभकामनाएं |

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना। बधाई स्‍वीकारें।

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जीवन का सूत्र...
NO French Kissing Please!

Vikas Garg ने कहा…

इस कदर धोखे मिलेंगे ज़माने में,
तो ये जिंदगी जिंदगी न रहेगी.
कैसे जी पाएंगे इस ज़माने में ,
जो आपकी नज़रें इनायत न रहेंगी.
bhut khub
vikasgarg23.blogspot.com

Maheshwari kaneri ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति....

Maheshwari kaneri ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति....

रविकर ने कहा…

meri tippani to thi idhar |
gai kidhar ||

fir bhi dubaara badhai ||

शिखा कौशिक ने कहा…

बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति .बधाई

Anita ने कहा…

वाह ! इंतजार भी और शिकायत भी, अच्छा अंदाज है !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

गहरी पंक्तियाँ।

सदा ने कहा…

गहन भावों का समावेश इन पंक्तियों में बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

ZEAL ने कहा…

तुमको पाने की खातिर दुनिया में,
चाहा अनचाहा बहुत कुछ कर गए.
क्या तुम मिलोगे हमें तब जाकर ,
जब इन चिरागों में रोशनी न रहेगी....

Brilliant creation Shalini ji !

.

ZEAL ने कहा…

.

kumar ने कहा…

हमसे मिलने भी आओगे गर तुम,
देख लेना तब जिस्म में रूह न रहेगी
sundar abhivyakti....achhi lagi....

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

bhaavpoorn abhivyaktee

Suman ने कहा…

bahut sunder rachna .....

LAXMI NARAYAN LAHARE ने कहा…

मन की कुछ अल्फाज दिल से निकल गई चंद शब्दों में सारी दिल की बात बह गई ,हार्दिक बधाई .....

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

इंतजारी कि भी एक हद होती है... और उस हद को परिलक्षित करती आपकी रचना बेहद सटीक...

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति.

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