रविवार, 3 जुलाई 2011

पीछे देखोगे साथ में भीड़ जुट जाएगी.







है  अगर चाहत तुम्हारी सेवा परोपकार की,
तो जिंदगी समझो तुम्हारी पुरसुकूं पायेगी. 
दुनिया में किसी को मिले न मिले 
दुनियावी  झंझटों से मुक्ति मिल जाएगी.

हैं फंसे आकर अनेकों इस नरक के जाल में,
मुक्ति चाह जब उनकी आत्मा तडपायेगी     .
तब उन्हें देख तुमको हँसते मुस्कुराते हुए
जिंदगी जीने की नयी राह एक मिल जाएगी.

मोह अज्ञानवश फिर रहे भटक रहे,
मौत के आगोश में गर जिंदगी जाएगी.
अंत समय ज्ञान पाने की ललक को देखना
इच्छा अधूरी है ये मन में दबी रह जाएगी.

देख तुमको एक भी शख्स सुधर जाये अगर,
सफलता खुशियाँ तुम्हारे गले लग जाएँगी.
साथ पाकर एक और एक ग्यारह बनोगे
पीछे देखोगे साथ में भीड़ जुट जाएगी.
               शालिनी कौशिक 
http://shalinikaushik2.blogspot.com



18 टिप्‍पणियां:

शिखा कौशिक ने कहा…

है अगर चाहत तुम्हारी सेवा परोपकार की,
तो जिंदगी समझो तुम्हारी पुरसुकूं पायेगी.
sach me seva bhav hi hame manav hone ki anubhooti karata hai .badhai

आशुतोष की कलम ने कहा…

कविता के विचार सुन्दर है..
मगर कुछ पंक्तियों में काव्यात्मक दृष्टि से सुधार किया जा सकता है..

रेखा ने कहा…

सही इरादे से अगर चलेंगे तो भीड़ जरूर जुट जाएगी. बेहतर पोस्ट . धन्यवाद

mridula pradhan ने कहा…

साथ पाकर एक और एक ग्यारह बनोगे
पीछे देखोगे साथ में भीड़ जुट जाएगी.
very good.ekdam theek kah rahin hain aap.

रविकर ने कहा…

साथ पाकर एक और एक ग्यारह बनोगे ||

achchhi prastuti ||

badhaai ||

रविकर ने कहा…

साथ पाकर एक और एक ग्यारह बनोगे ||

बहुत-बहुत बधाई |

प्रेरणा मिली |

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

स्वयं पर नेतृत्व करने का विश्वास हो तो अच्छे लोग साथ खड़े मिलते हैं।

एस.एम.मासूम ने कहा…

मोह अज्ञानवश फिर रहे भटक रहे,
मौत के आगोश में गर जिंदगी जाएगी.
अंत समय ज्ञान पाने की ललक को देखना
इच्छा अधूरी है ये मन में दबी रह जाएगी.
,
बहुत गहरी बात कही हैं

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत सुंदर क्या बात है यही सच्चाई है.....

sm ने कहा…

साथ पाकर एक और एक ग्यारह बनोगे
beautiful poem

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Sach hai.... Himmat ho to sab mimkin hai... Behtreen abhivykti

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

आपका स्वागत है "नयी पुरानी हलचल" पर...यहाँ आपके पोस्ट की है हलचल...जानिये आपका कौन सा पुराना या नया पोस्ट कल होगा यहाँ...........
नयी पुरानी हलचल

kshama ने कहा…

है अगर चाहत तुम्हारी सेवा परोपकार की,
तो जिंदगी समझो तुम्हारी पुरसुकूं पायेगी.
दुनिया में किसी को मिले न मिले
दुनियावी झंझटों से मुक्ति मिल जाएगी.
Sach hai!

कुश्वंश ने कहा…

है अगर चाहत तुम्हारी सेवा परोपकार की,
तो जिंदगी समझो तुम्हारी सुकूं पायेगी.

सुन्दर विचार बधाई.

अभिषेक मिश्र ने कहा…

Prerak panktiyan. Shubhkaamanayin.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

देख तुमको एक भी शख्स सुधर जाये अगर,
सफलता खुशियाँ तुम्हारे गले लग जाएँगी...

सच है जिंदगी में अगर एक अच्छा काम भी हो जाए तो बहुत है ... खुशियाँ मी जाती हैं ढेरों ..

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

अच्छी और प्रेरणादायक रचना

Anita ने कहा…

बहुत सुंदर प्रेरणादायक कविता! बधाई और शुभकामनायें!