चोर पक्के बने हुए हैं.

जोश में खड़े हुए हैं,
     हाथ इनके मुड़े हुए हैं .
कवियों ने जो कवितायेँ लिखी
         उनको पढने में लगे हुए हैं .
चापलूस चेहरे पर अपने ,
     कृत्रिम हंसी लिए हुए हैं.
बाहर बाहर प्रेम दिखाकर,
      भीतर भीतर जले हुए हैं.
अपनी टांग को अड़ाकर,
     दूसरों में फंसे हुए हैं.
कहने को कवि मगर,
     चोर पक्के बने हुए हैं.
     
                     शालिनी कौशिक 

टिप्पणियाँ

kshama ने कहा…
Behad sashakt rachana hai!
Patali-The-Village ने कहा…
बहुत सुन्दर अभिब्यक्ति|
S.N SHUKLA ने कहा…
बेहतरीन, कविता भी, कटाक्ष भी
Pappu Parihar ने कहा…
वाह जी वाह !!!!!
ऐसे कवियों के तो सपने बहुत बड़े हैं |
दूसरों की कविताओं पे नज़रें गड़े हैं |
vidhya ने कहा…
बहुत ही सुन्दर
रविकर ने कहा…
kya bhai naaraaj hain kya ?

chori se hi aadhi duniya roshan hai

बधाई ||
DUSK-DRIZZLE ने कहा…
Laxana sabaad sakati main sari bat hai KAVITA ki SABADO ke PATAN se hi pura SAMAL aj gart main hai
तगड़ा कटाक्ष।
शिखा कौशिक ने कहा…
शालिनी जी बहुत ही बढ़िया व्यंग्य किया है saahity -choro पर .aabhar
mahendra verma ने कहा…
चोरों की अच्छी खबर ली है आपने।

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