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सितंबर, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

इसलिए राहुल सोनिया पर ये प्रहार किये जाते हैं .

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इसलिए राहुल सोनिया पर ये प्रहार किये जाते हैं . जगमगाते अपने तारे गगन पर गैर मुल्कों के , तब घमंड से भारतीय सीने फुलाते हैं . टिमटिमायें दीप यहाँ आकर विदेशों से , धिक्कार जैसे शब्द मुहं से निकल आते हैं . नौकरी करें हैं जाकर हिन्दुस्तानी और कहीं , तब उसे भारतीयों की काबिलियत बताते हैं . करे सेवा बाहर से आकर गर कोई यहाँ , हमारी संस्कृति की विशेषता बताते हैं . राजनीति में विराजें ऊँचे पदों पे अगर , हिन्दवासियों के यशोगान गाये जाते हैं . लोकप्रिय विदेशी को आगे बढ़ देख यहाँ , खून-खराबे और बबाल किये जाते हैं. क़त्ल होता अपनों का गैर मुल्कों में अगर , आन्दोलन करके विरोध किये जाते हैं . अतिथि देवो भवः गाने वाले भारतीय , इनके प्रति अशोभनीय आचरण दिखाते हैं . विश्व व्यापी रूप अपनी संस्था को देने वाले , संघी मानसिकता से उबार नहीं पाते हैं . भारतीय कहकर गर्दन उठाने वाले , वसुधैव कुटुंबकम कहाँ अपनाते हैं  भारत का छोरा जब गाड़े झंडे इटली में , भारतीयों की तब बांछें खिल जाती हैं . इटली की बेटी अगर भारत में बहु बने , जिंदा

उत्तर प्रदेश सरकार राजनीति छोड़ जमीनी हकीकत से जुड़े.

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उत्तर प्रदेश सरकार राजनीति छोड़ जमीनी हकीकत से जुड़े. सरकारें बदलती हैं पर राज्य प्रशासन चलने के तरीके नहीं बदलते .मायावती सरकार ने राज्य का धन वोट बटोरने को जिले बनाने में खर्च कर दिया पहले पूर्ण विकसित बडौत की जगह अविकसित बागपत बनाया और अब जाते जाते कानून व्यवस्था में अविकसित शामली को जिले का दर्जा दे वहां के खेतों के लिए मुसीबत खड़ी कर गयी मुसीबत इसलिए क्योंकि प्रशासन अब किरण में समस्त न्यायालयों की सुविधा होने के बावजूद जिला न्यायालय मुख्यालय पर होने के बहाने की पूर्ति के लिए खेतो की जमीन की ओर देख रहा है .दूसरी ओर अखिलेश यादव हैं जिनकी सरकार कभी  बेरोजगारी भत्ता तो कभी कन्या विद्या धन के रूप में राज्य का पैसा लुटा रही है और ये लुटाना ही कहा जायेगा जब पात्र व्यक्ति तो सरकार की सहायता से वंचित रह जाएँ और ''अपात्र '' जुगाड़  भिडाकर राज्य के धन को हासिल कर लें .मैंने अपने एक पूर्व आलेख में शामली जिला न्यायलय के लिए कैराना को उचित स्थान कहा था आप भी चाहें तो उस आलेख का निम्न प्रस्तुति करण में अवलोकन कर सकते हैं    कैराना  उपयुक्त  स्थान  : जनपद  न्यायाधीश  शामली 

अब आई कॉंग्रेस की बारी

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बहुत  उछल  रहे  थे  अभी  तक  भाजपा वाले कॉंग्रेस के कोल  ब्लोक आवंटन के घोटाले को लेकर समझ रहे थे कि अबकी सत्ता हमीं लेकर रहेंगे लेकिन महाराष्ट्र में अंजली ने उनके इन उछलते क़दमों को मचलते और तड़पते क़दमों में पलट दिया है नवभारत  टाइम्स पर प्रकाशित प्रस्तुत समाचार भाजपा अध्यक्ष को भी उसी श्रेणी में ले आया है जिसमे वे  कॉग्रेसियो को घसीट रहे थे आखिर वे स्वयं को नेताओं की  जमात से कैसे अलग रख रहे हैं जो कि पूरी की  पूरी भ्रष्टाचार के दलदल में डूबी हुई है  नई दिल्ली।।  महाराष्ट्र के सिंचाई घोटाले को सामने लाने वाली आरटीआई ऐक्टिविस्ट अंजलि दमानिया ने आरोप लगाया है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के सिंचाई घोटाले को दबाया था। इंडिया अंगेस्ट करप्शन की सदस्य अंजलि के मुताबिक गडकरी ने शरद पवार से पारिवारिक और कारोबारी रिश्ते होने का हवाला देकर हवाला देकर मामले को उठाने से मना कर दिया था। उधर, अंजलि के आरोपों से बीजेपी बौखला गई है। फरीदाबाद में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावेड़कर ने मीडिया से बातचीत में इस पर तीखी प्रति

अब आई कॉंग्रेस की बारी

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बहुत  उछल  रहे  थे  अभी  तक  भाजपा वाले कॉंग्रेस के कोल  ब्लोक आवंटन के घोटाले को लेकर समझ रहे थे कि अबकी सत्ता हमीं लेकर रहेंगे लेकिन महाराष्ट्र में अंजली ने उनके इन उछलते क़दमों को मचलते और तड़पते क़दमों में पलट दिया है नवभारत  टाइम्स पर प्रकाशित प्रस्तुत समाचार भाजपा अध्यक्ष को भी उसी श्रेणी में ले आया है जिसमे वे  कॉग्रेसियो को घसीट रहे थे आखिर वे स्वयं को नेताओं की  जमात से कैसे अलग रख रहे हैं जो कि पूरी की  पूरी भ्रष्टाचार के दलदल में डूबी हुई है  नई दिल्ली।।  महाराष्ट्र के सिंचाई घोटाले को सामने लाने वाली आरटीआई ऐक्टिविस्ट अंजलि दमानिया ने आरोप लगाया है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के सिंचाई घोटाले को दबाया था। इंडिया अंगेस्ट करप्शन की सदस्य अंजलि के मुताबिक गडकरी ने शरद पवार से पारिवारिक और कारोबारी रिश्ते होने का हवाला देकर हवाला देकर मामले को उठाने से मना कर दिया था। उधर, अंजलि के आरोपों से बीजेपी बौखला गई है। फरीदाबाद में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावेड़कर ने मीडिया से बातचीत में इस पर तीखी प्रति

औलाद की कुर्बानियां न यूँ दी गयी होती

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   औलाद की कुर्बानियां न यूँ दी गयी होती .    शबनम का क़तरा थी मासूम अबलखा , वहशी दरिन्दे के वो चंगुल में फंस गयी . चाह थी मन में छू लूं आकाश मैं उड़कर , कट गए पर पिंजरे में उलझकर रह गयी .         थी अज़ीज़ सभी को घर की थी लाड़ली , अब्ज़ा की तरह पाला था माँ-बाप ने मिलकर . आई थी आंधी समझ लिया तन-परवर उन्होंने , तहक़ीक में तबाह्कुन वो निकल गयी .   महफूज़ समझते थे वे अजीज़ी का  फ़रदा     , तवज्जह नहीं देते थे तजवीज़ बड़ों की . जो कह गयी जा-ब-जा हमसे ये तवातुर , हर हवा साँस लेने के काबिल नहीं होती . जिन हाथों में खेली थी वो अफुल्ल तन्वी , जिन आँखों ने देखी थी अक्स-ए-अबादानी . खाली पड़े हैं हाथ अब बेजान से होकर , आँखें किन्ही अंजान अंधेरों में खो गयी . नादानी ये माँ-बाप की बच्चे हैं भुगतते , बाज़ार-ए-जहाँ में यूँ करिश्मे नहीं होते . न होती उन्हें  तुन्द्ही  छूने की फलक को , औलाद की कुर्बानियां न यूँ दी गयी होती . शब्दार्थ -अबलखा-एक चिड़िया ,अज़ीज़ -प्रिय ,अब्ज़ा -लक्ष्मी सीपी मोती ,तन परवर -तन पोषक ,            तहकीक -असलियत ,तबाह्कुन -बर्बाद करने वाला ,अजीज़ी -प्यारी बेटी ,फ़रदा -आने

''बेरोजगारों की भीड़ ''.

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बेरोजगारों की भीड़ ''.      भीड़ भीड़ भीड़ हर ओर भीड़ ही भीड़ देख  माथा  ठनक सा जाता है और अब एक और भीड़ बढ़ाने चली है हमारी उत्तर प्रदेश सरकार -''बेरोजगारों की भीड़ ''. यही कहना पड़  रहा है जो हाल हमने इस योजना का अभी हाल ही में देखा है उसे देखकर ,जिसे देखो  इस योजना में मिलने  वाले    1000/- रुपये प्रति महीने पाने को लालायित हो रहा है .पहले कभी किसी नौकरी के लिए भले ही आवेदन न किया हो तब भी इस योजना के लिए  मूल   निवास प्रमाण पत्र ,राशन  कार्ड  की फोटो प्रति दो पासपोर्ट साइज़ फोटो लिए भागा फिर रहा है . कमाल की बात तो  ये   है कि बेरोजगार लोग आवेदन पत्र जमा करने के लिए अपनी कारों बल्कि यूं कहूं तो जयादा सही रहेगा कि अपनी  निजी कारों में लदकर वहां  पहुंचे और सड़कों पर जरा से जाम पर हो हल्ला  करने  वाले ये  युवा  वहां   शांति पूर्वक लाइन में खड़े रहे .जिस  किसी से भी हमारी बात हुई  उसका  यही कहना था  कि महीने में  1000 रुपये मिल  रहे हैं  तो कोई  बुरी  बात थोड़े  ही है इन्हें  लेने में . जब हम पढ़े लिखे हैं ,इसी आयु सीमा में आते हैं तो इसका फायदा क्यों न उठा

माननीय शिक्षकों को शालिनी का प्रणाम

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माननीय शिक्षकों को शालिनी का प्रणाम  अर्पण करते स्व-जीवन शिक्षा की अलख जगाने में , रत रहते प्रतिपल-प्रतिदिन  शिक्षा की राह बनाने में . आओ मिलकर करें स्मरण नमन करें इनको मिलकर , जिनका जीवन हुआ सहायक हमको सफल बनाने में . जीवन-पथ पर आगे बढ़ना इनसे ही हमने सीखा , ये ही निभाएं मुख्य भूमिका हमको राह  दिखाने में    . खड़ी बुराई जब मुहं खोले हमको खाने को तत्पर , रक्षक बनकर आगे बढ़कर ये ही लगे बचाने में . मात-पिता ये नहीं हैं होते मात-पिता से भी बढ़कर , गलत सही का भेद बताकर लगे हमें समझाने में . पुष्प समान खिले जब शिष्य प्रफुल्लित मन हो इनका , करें अनुभव गर्व यहाँ ये उसको श्रेय दिलाने में . शीश झुकाती आज ''शालिनी ''अहर्नीय के चरणों में , हुए सहाय्य ये ही सबके आगे कदम बढ़ाने में .                शालिनी कौशिक                     [कौशल ]

शिक्षक दिवस की बधाइयाँ

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शिक्षक दिवस की बधाइयाँ    शिक्षक दिवस एक ऐसा दिवस जिसकी नीव ही हमारे दूसरे राष्ट्रपति श्रद्धेय पुरुष डॉ.राधा कृष्णन जी के जन्म  दिवस पर पड़ी .डॉ.राधा कृष्णन जी को श्रृद्धा सुमन अर्पित करने हेतु ही देश प्रतिवर्ष ५ सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाता है . सर्वप्रथम डॉ.राधाकृष्णन जी को जन्मदिन पर मैं उन्हें ह्रदय से नमन करती हूँ. . मैं जब बी.ए. में थी तो आगे के लिए करियर चुनने को मुझसे जब कहा एम्.ए.संस्कृत व् आगे पीएच डी.कर शिक्षण क्षेत्र को अपनाने का सुझाव दिया गया तो मैंने साफ इंकार कर दिया क्योंकि मैं अपने में वह योग्यता नहीं देख रही थी जो एक शिक्षक में होती है  मेरी मम्मी जिन्होंने हमें हमारे विद्यालय की अपेक्षा उत्तम शैक्षिक वातावरण घर में ही दिया वे शिक्षक बनने के योग्य होने के बावजूद घर के  कामों में ऐसी रमी की उसमे ही उलझ कर रह गयी और कितने ही छात्र छात्राएं जो उनसे स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर सकते थे वंचित रह गए..परिवार को प्रथम पाठशाला  और माता को प्रथम शिक्षिका कहा जाता है इसलिए मैंने सबसे पहले  अपनी शिक्षिका अपनी मम्मी को ही इस अवसर पर याद किया है ये उनका ही प्रभाव है कि