रविवार, 30 सितंबर 2012

इसलिए राहुल सोनिया पर ये प्रहार किये जाते हैं .


इसलिए राहुल सोनिया पर ये प्रहार किये जाते हैं .

Sunita Williams
जगमगाते अपने तारे गगन पर गैर मुल्कों के ,
तब घमंड से भारतीय सीने फुलाते हैं .
टिमटिमायें दीप यहाँ आकर विदेशों से ,
धिक्कार जैसे शब्द मुहं से निकल आते हैं .

नौकरी करें हैं जाकर हिन्दुस्तानी और कहीं ,
तब उसे भारतीयों की काबिलियत बताते हैं .
करे सेवा बाहर से आकर गर कोई यहाँ ,
हमारी संस्कृति की विशेषता बताते हैं .
Sonia Gandhi, Rahul Gandhi and Prime Minister Manmohan Singh look at newly elected party state presidents of the Indian Youth Congress seek blessings at a convention in New Delhi. Sonia in action
राजनीति में विराजें ऊँचे पदों पे अगर ,
हिन्दवासियों के यशोगान गाये जाते हैं .
लोकप्रिय विदेशी को आगे बढ़ देख यहाँ ,
खून-खराबे और बबाल किये जाते हैं.
Demonstrators from the Samajwadi Party, a regional political party, shout slogans after they stopped a passenger train during a protest against price hikes in fuel and foreign direct investment (FDI) in retail, near Allahabad railway station September 20, 2012 (Reuters / Jitendra Prakash)
क़त्ल होता अपनों का गैर मुल्कों में अगर ,
आन्दोलन करके विरोध किये जाते हैं .
अतिथि देवो भवः गाने वाले भारतीय ,
इनके प्रति अशोभनीय आचरण दिखाते हैं .

विश्व व्यापी रूप अपनी संस्था को देने वाले ,
संघी मानसिकता से उबार नहीं पाते हैं .
भारतीय कहकर गर्दन उठाने वाले ,
वसुधैव कुटुंबकम कहाँ अपनाते हैं 

भारत का छोरा जब गाड़े झंडे इटली में ,
भारतीयों की तब बांछें खिल जाती हैं .
इटली की बेटी अगर भारत में बहु बने ,
जिंदादिल हिंद की जान निकल जाती है .

अलग-अलग मानक अपनाने वाले ये देखो ,
एक जगह एक जैसे मानक अपनाते हैं ,
देशी हो विदेशी हो भारत की या इटली की ,
बहुओं को सारे ये पराया कह जाते हैं .


मदर टेरेसा आकर घाव पर लगायें मरहम ,
सेवा करवाने को ये आगे बढ़ आते हैं .
सोनिया गाँधी जो आकर राज करे भारत पर ,
ऐसी बुरी हार को सहन न कर पाते हैं.
The dead Indira Gandhi with her son, Prime Minister Ranjiv Ghandi.
सारा परिवार देश हित कुर्बान किया ,
ऐसी क़ुरबानी में ये ढूंढ स्वार्थ लाते हैं .
नेहरु गाँधी परिवार की देख प्रसिद्धि यहाँ ,
विरोधी गुट सारे जल-भुन जाते हैं .
सोनिया की सादगी लुभाए नारियों को यहाँ ,
इसीलिए उलटी सीधी बाते कहे जाते हैं .
पद चाह छोड़कर सीखते जो ककहरा ,
राहुल के सामने खड़े न हो पाते हैं .

राजनीति में विराजें कितने ही अंगूठा टेक ,
पीछे चल जनता उन्हें सर पर बैठाती है .
राहुल गाँधी कर्मठता से छा न जाये यहाँ कहीं ,
उनकी शिक्षा को लेकर हंसी करी जाती है .

भेदभाव भारत में कानूनन निषिद्ध हुआ ,
लोग पर इसे ही वरीयता दिए जाते हैं 
योग्यता और मेहनत को मिलता तिरस्कार यहाँ ,
इसलिए राहुल सोनिया पर ये प्रहार किये जाते हैं .
                      शालिनी कौशिक 
                                   [कौशल ]








शुक्रवार, 28 सितंबर 2012

उत्तर प्रदेश सरकार राजनीति छोड़ जमीनी हकीकत से जुड़े.


उत्तर प्रदेश सरकार राजनीति छोड़ जमीनी हकीकत से जुड़े.

सरकारें बदलती हैं पर राज्य प्रशासन चलने के तरीके नहीं बदलते .मायावती सरकार ने राज्य का धन वोट बटोरने को जिले बनाने में खर्च कर दिया पहले पूर्ण विकसित बडौत की जगह अविकसित बागपत बनाया और अब जाते जाते कानून व्यवस्था में अविकसित शामली को जिले का दर्जा दे वहां के खेतों के लिए मुसीबत खड़ी कर गयी मुसीबत इसलिए क्योंकि प्रशासन अब किरण में समस्त न्यायालयों की सुविधा होने के बावजूद जिला न्यायालय मुख्यालय पर होने के बहाने की पूर्ति के लिए खेतो की जमीन की ओर देख रहा है .दूसरी ओर अखिलेश यादव हैं जिनकी सरकार कभी  बेरोजगारी भत्ता तो कभी कन्या विद्या धन के रूप में राज्य का पैसा लुटा रही है और ये लुटाना ही कहा जायेगा जब पात्र व्यक्ति तो सरकार की सहायता से वंचित रह जाएँ और ''अपात्र ''जुगाड़ भिडाकर राज्य के धन को हासिल कर लें .मैंने अपने एक पूर्व आलेख में शामली जिला न्यायलय के लिए कैराना को उचित स्थान कहा था आप भी चाहें तो उस आलेख का निम्न प्रस्तुति करण में अवलोकन कर सकते हैं  
कैराना उपयुक्त स्थान :जनपद न्यायाधीश शामली : 


जिला न्यायालय के लिए शामली के अधिवक्ता इस सत्य को परे रखकर सात दिन से न्यायालय के कार्य  को ठप्प किये हैं जबकि सभी के साथ शामली इस प्रयोजन हेतु कितना उपयुक्त है वे स्वयं जानते हैं.
             शामली 28 सितम्बर २०११ को मुज़फ्फरनगर से अलग करके  एक जिले के रूप में स्थापित किया गया .जिला बनने से पूर्व शामली तहसील रहा है और यहाँ तहसील सम्बन्धी कार्य ही निबटाये जाते रहे हैं. न्यायिक कार्य दीवानी ,फौजदारी आदि के मामले शामली से कैराना और मुज़फ्फरनगर जाते रहे हैं .
    आज कैराना न्यायिक व्यवस्था  के मामले में उत्तरप्रदेश में एक सुदृढ़ स्थिति रखता है    कैराना में न्यायिक व्यवस्था की पृष्ठभूमि के बारे में बार एसोसिएशन कैराना के अध्यक्ष ''श्री कौशल प्रसाद एडवोकेट ''जी बताते हैं -
                                    
     ''   '' सन १८५७ में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रथम  स्वतंत्रता संग्राम के द्वारा ऐतिहासिक क्रांति का बिगुल बजने के बाद मची उथल-पुथल से घबराये ब्रिटिश शासन के अंतर्गत संयुक्त प्रान्त [वर्तमान में उत्तर प्रदेश ] ने तहसील शामली को सन 1887 में महाभारत काल के राजा कर्ण की राजधानी कैराना में स्थानांतरित कर दिया तथा तहसील स्थानांतरण के दो वर्ष पश्चात् सन १८८९ में मुंसिफ शामली के न्यायालय  को भी कैराना में स्थानांतरित कर दिया .ब्रिटिश शासन काल की संयुक्त प्रान्त सरकार द्वारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश [तत्कालीन संयुक्त प्रान्त ]में स्थापित होने वाले चार मुंसिफ न्यायालयों -गाजियाबाद ,नगीना ,देवबंद व् कैराना है.मुंसिफ कैराना के क्षेत्राधिकार  में  पुरानी तहसील कैराना व् तहसील बुढ़ाना का  परगना कांधला सम्मिलित था .मुंसिफी कैराना में मूल रूप से दीवानी मामलों का ही न्यायिक कार्य होता था .विचाराधीन वादों  की संख्या को देखते हुए समय समय पर अस्थायी अतिरिक्त मुंसिफ कैराना के न्यायालय की स्थापना भी हुई ,परन्तु सन १९७५ के आसपास माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा कैराना में स्थायी अतिरिक्त मुंसिफ कैराना के न्यायालय की स्थापना की गयी .इस न्यायालय के भवन के लिए ९ मार्च सन १९७८ को उच्च न्यायालय इलाहाबाद के प्रशासनिक न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री ह्रदयनाथ सेठ द्वारा भवन का शिलान्यास किया गया .बार एसोसिएशन कैराना  की निरंतर मांग के उपरांत दिनांक ६ मई 1991 को कैराना में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय की स्थापना की गयी .तथा बाद में ४ जनवरी 1993 से कैराना में सिविल  जज सीनियर डिविजन का न्यायालय स्थापित हुआ  २ अप्रैल २०११ में यहाँ ए.डी.जे.कोर्ट की स्थापना हुई .''
ऐसे में राजनीतिक फैसले के कारण शामली को भले ही जिले का दर्जा मिल गया हो किन्तु न्यायिक व्यवस्था के सम्बन्ध में अभी शामली बहुत पीछे है .शामली में अभी कलेक्ट्रेट  के लिए भूमि चयन का मामला भी पूरी तरह से तय नहीं हो पाया है जबकि कैराना में अध्यक्ष महोदय के अनुसार तहसील भवन के नए भवन में स्थानांतरित होने के कारण ,जहाँ १८८७ से २०११ तक तहसील कार्य किया गया वह समस्त क्षेत्र इस समय रिक्त है और वहां जनपद न्यायाधीश के न्यायलय के लिए उत्तम भवन का निर्माण हो सकता है .साथ ही कैराना कचहरी में भी ऐसे भवन हैं जहाँ अभी हाल-फ़िलहाल में भी जनपद न्यायाधीश बैठ सकते हैं और इस सम्बन्ध में किसी विशेष आयोजन की आवश्यकता नहीं है.फिर कैराना कचहरी शामली मुख्यालय से मात्र १० किलोमीटर दूरी पर है ऐसे में यदि हाईकोर्ट ध्यान दे तो शामली जनपद न्यायाधीश के लिए कैराना उपयुक्त स्थान है क्योंकि शामली में अभी भी केवल तहसील कार्य ही संपन्न हो रहे हैं और जनपद न्यायधीश की कोर्ट वहां होने के लिए अभी शामली को बहुत लम्बा सफ़र तय करना है.
                 और उपरोक्त के सम्बन्ध में कैराना के वकीलों ने ओ एस डी श्री उमेश चन्द्र श्रीवास्तव जी को ज्ञापन भी दिया किन्तु इस सबके बावजूद यह कहकर ''जिला न्यायालय जिला मुख्यालय पर होते हैं ''अब शामली के गावों की,जंगलों की भूमि जो की खेती आदि के काम आती है 
में निरीक्षण कर राज्य का पैसा व् समय दोनों बर्बाद किये जा रहे हैं .जिस राज्य की हाईकोर्ट ही मुख्यालय राजधानी लखनऊ के स्थान पर इलाहाबाद में स्थापित है वहां यह तर्क कुतर्क ही प्रतीत होता है और यदि यह कहा जाये की हाईकोर्ट वहां पहले से ही स्थापित है तो कैराना में भी पहले से ही इतनी कोर्ट स्थापित  हैं जितनी की स्थापना के लिए अभी शामली जिले को नाकों चने चबाने पड़ सकते हैं  फिर रही यातायात की सुविधा की बात तो जो सरकार जनता के पैसे का दुरूपयोग कर जनता की जमीन हड़प कर जिला न्यायालय के लिए कदम आगे बढ़ा सकती है क्या वह एक कदम सरकरी धन के सदुपयोग में खर्च नहीं कर सकती .कैराना में जिला न्यायालय स्थापित कर वादकारियों को सीधी  बस सेवा प्रदान कर .इसलिए सरकार से बस यही अनुरोध है की एक बार राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर जनता के हित की सोचें व् सरकारी धन का दुरूपयोग बंद करें .
                                           शालिनी कौशिक 
                                         [कौशल] 
  

गुरुवार, 27 सितंबर 2012

अब आई कॉंग्रेस की बारी



बहुत उछल रहे थे अभी तक भाजपा वाले कॉंग्रेस के कोल  ब्लोक आवंटन के घोटाले को लेकर समझ रहे थे कि अबकी सत्ता हमीं लेकर रहेंगे लेकिन महाराष्ट्र में अंजली ने उनके इन उछलते क़दमों को मचलते और तड़पते क़दमों में पलट दिया है नवभारत  टाइम्स पर प्रकाशित प्रस्तुत समाचार भाजपा अध्यक्ष को भी उसी श्रेणी में ले आया है जिसमे वे कॉग्रेसियो को घसीट रहे थे आखिर वे स्वयं को नेताओं की जमात से कैसे अलग रख रहे हैं जो कि पूरी की पूरी भ्रष्टाचार के दलदल में डूबी हुई है 


नई दिल्ली।। महाराष्ट्र के सिंचाई घोटाले को सामने लाने वाली आरटीआई ऐक्टिविस्ट अंजलि दमानिया ने आरोप लगाया है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के सिंचाई घोटाले को दबाया था। इंडिया अंगेस्ट करप्शन की सदस्य अंजलि के मुताबिक गडकरी ने शरद पवार से पारिवारिक और कारोबारी रिश्ते होने का हवाला देकर हवाला देकर मामले को उठाने से मना कर दिया था।

उधर, अंजलि के आरोपों से बीजेपी बौखला गई है। फरीदाबाद में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावेड़कर ने मीडिया से बातचीत में इस पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्होंने इसे कांग्रेस की साजिश करार दिया। जावेड़कर ने कहा कि कांग्रेस ने सिंचाई घोटाले से ध्यान बंटाने के लिए यह साजिश रची है।

अंजलि के मुताबिक गडकरी से उनकी मुलाकात 14 अगस्त को दस बजे वर्ली स्थित गडकरी के घर पर हुई थी। इस सिलसिले में अब तक उनकी तीन मुलाकातें हुईं, जिनमें दिल्ली में हुई एक मुलाकात भी शामिल है। उन्होंने दावा किया घोटाले को दबाने के लिए गडकरी पर भय्यू जी महाराज ने भी दबाव बनाया था।
anjali-damania
भय्यू जी महाराज अन्ना के आंदोलन के दौरान चर्चा में आए थे। अगस्त 2011 में जब अन्ना रामलीला मैदान में अनशन पर बैठे थे, तो भय्यू जी महाराज को बाकायदा महाराष्ट्र से दिल्ली लाया गया था। अंजलि के मुताबिक, आध्यात्मिक गुरु भय्यू जी महाराज 13 अगस्त को गडकरी से मिले थे। अंजलि का आरोप है कि इस मुलाकात में भय्यू जी ने गडकरी से इस मामले को ज्यादा तूल ना देने और किरीट सोमैया पर पीआईएल न दाखिल करने के लिए दबाब बनाने को कहा था।

हालांकि, गडकरी ने अंजलि नाम की किसी महिला को जानने या इस तरह की कोई मुलाकात होने से इनकार किया है। बीजेपी ने पवार और गडकरी के बीच अंजलि के कारोबारी रिश्ते होने के दावे का भी खंडन किया है। सोमैया और भैय्यू जी महाराज ने भी अंजलि के दावों को सिरे से नकार दिया है।

भय्यू जी के मुताबिक, 13 अगस्त के दिन वह पुणे में अपने परिवार के साथ थे और रात में उज्जैन में थे। इसका सबूत भी वह अपने पास होने का दावा कर रहे हैं। उनका तो यहां तक कहना है कि अगर यह बात साबित हो जाती है कि वह 13 अगस्त को गडकरी से मिले थे तो वह सार्वजनिक जीवन से संन्यास ले लेंगे। सोमैया ने अपने ऊपर किसी तरह के दबाव की बात को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि घोटालों का खुलासा नहीं करने को लेकर उन पर किसी तरह का दबाव नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो क्या वह घोटालों को लेकर अपनी मुहिम जारी रख पाते?

हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि इससे पहले बुधवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंजलि सीधे-सीधे गडकरी का नाम लेने से बचती रही थीं। उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि वह सिंचाई घोटाले की जानकारी को लेकर विपक्षी पार्टी के पास गई थीं, ताकि इस मामले को उठाया जाए। लेकिन उस पार्टी के अध्यक्ष ने यह कहकर मामले को उठाने से इनकार कर दिया था कि मेरे उनसे कारोबारी रिश्ते हैं। जब अंजलि से उस पार्टी अध्यक्ष के नाम के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने यह कहते हुए नाम बताने से इनकार कर दिया था कि उनके पास बातचीत का कोई सबूत नहीं है।

अब इसके बारे में तो हम ''शिखा कौशिक ''जी के शब्दों में बस यही कह सकते हैं -
''देश बेचकर खाने का जिस पर आरोप लगाते हैं ,
परदे की पीछे उससे  ही दोस्ती निभाते हैं .
हम नेता हैं देश के मांगे सबकी खैर 
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर.''

   शालिनी कौशिक 

अब आई कॉंग्रेस की बारी



बहुत उछल रहे थे अभी तक भाजपा वाले कॉंग्रेस के कोल  ब्लोक आवंटन के घोटाले को लेकर समझ रहे थे कि अबकी सत्ता हमीं लेकर रहेंगे लेकिन महाराष्ट्र में अंजली ने उनके इन उछलते क़दमों को मचलते और तड़पते क़दमों में पलट दिया है नवभारत  टाइम्स पर प्रकाशित प्रस्तुत समाचार भाजपा अध्यक्ष को भी उसी श्रेणी में ले आया है जिसमे वे कॉग्रेसियो को घसीट रहे थे आखिर वे स्वयं को नेताओं की जमात से कैसे अलग रख रहे हैं जो कि पूरी की पूरी भ्रष्टाचार के दलदल में डूबी हुई है 


नई दिल्ली।। महाराष्ट्र के सिंचाई घोटाले को सामने लाने वाली आरटीआई ऐक्टिविस्ट अंजलि दमानिया ने आरोप लगाया है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के सिंचाई घोटाले को दबाया था। इंडिया अंगेस्ट करप्शन की सदस्य अंजलि के मुताबिक गडकरी ने शरद पवार से पारिवारिक और कारोबारी रिश्ते होने का हवाला देकर हवाला देकर मामले को उठाने से मना कर दिया था।

उधर, अंजलि के आरोपों से बीजेपी बौखला गई है। फरीदाबाद में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावेड़कर ने मीडिया से बातचीत में इस पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्होंने इसे कांग्रेस की साजिश करार दिया। जावेड़कर ने कहा कि कांग्रेस ने सिंचाई घोटाले से ध्यान बंटाने के लिए यह साजिश रची है।

अंजलि के मुताबिक गडकरी से उनकी मुलाकात 14 अगस्त को दस बजे वर्ली स्थित गडकरी के घर पर हुई थी। इस सिलसिले में अब तक उनकी तीन मुलाकातें हुईं, जिनमें दिल्ली में हुई एक मुलाकात भी शामिल है। उन्होंने दावा किया घोटाले को दबाने के लिए गडकरी पर भय्यू जी महाराज ने भी दबाव बनाया था।
anjali-damania
भय्यू जी महाराज अन्ना के आंदोलन के दौरान चर्चा में आए थे। अगस्त 2011 में जब अन्ना रामलीला मैदान में अनशन पर बैठे थे, तो भय्यू जी महाराज को बाकायदा महाराष्ट्र से दिल्ली लाया गया था। अंजलि के मुताबिक, आध्यात्मिक गुरु भय्यू जी महाराज 13 अगस्त को गडकरी से मिले थे। अंजलि का आरोप है कि इस मुलाकात में भय्यू जी ने गडकरी से इस मामले को ज्यादा तूल ना देने और किरीट सोमैया पर पीआईएल न दाखिल करने के लिए दबाब बनाने को कहा था।

हालांकि, गडकरी ने अंजलि नाम की किसी महिला को जानने या इस तरह की कोई मुलाकात होने से इनकार किया है। बीजेपी ने पवार और गडकरी के बीच अंजलि के कारोबारी रिश्ते होने के दावे का भी खंडन किया है। सोमैया और भैय्यू जी महाराज ने भी अंजलि के दावों को सिरे से नकार दिया है।

भय्यू जी के मुताबिक, 13 अगस्त के दिन वह पुणे में अपने परिवार के साथ थे और रात में उज्जैन में थे। इसका सबूत भी वह अपने पास होने का दावा कर रहे हैं। उनका तो यहां तक कहना है कि अगर यह बात साबित हो जाती है कि वह 13 अगस्त को गडकरी से मिले थे तो वह सार्वजनिक जीवन से संन्यास ले लेंगे। सोमैया ने अपने ऊपर किसी तरह के दबाव की बात को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि घोटालों का खुलासा नहीं करने को लेकर उन पर किसी तरह का दबाव नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो क्या वह घोटालों को लेकर अपनी मुहिम जारी रख पाते?

हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि इससे पहले बुधवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंजलि सीधे-सीधे गडकरी का नाम लेने से बचती रही थीं। उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि वह सिंचाई घोटाले की जानकारी को लेकर विपक्षी पार्टी के पास गई थीं, ताकि इस मामले को उठाया जाए। लेकिन उस पार्टी के अध्यक्ष ने यह कहकर मामले को उठाने से इनकार कर दिया था कि मेरे उनसे कारोबारी रिश्ते हैं। जब अंजलि से उस पार्टी अध्यक्ष के नाम के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने यह कहते हुए नाम बताने से इनकार कर दिया था कि उनके पास बातचीत का कोई सबूत नहीं है।

अब इसके बारे में तो हम ''शिखा कौशिक ''जी के शब्दों में बस यही कह सकते हैं -
''देश बेचकर खाने का जिस पर आरोप लगते हैं ,
परदे की पीछे उससे  ही दोस्ती निभाते हैं .
हम नेता हैं देश के मांगे सबकी खैर 
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर.''

   शालिनी कौशिक 

गुरुवार, 13 सितंबर 2012

औलाद की कुर्बानियां न यूँ दी गयी होती


  औलाद की कुर्बानियां न यूँ दी गयी होती .
flying_bird.gif image by lukysubiantoro  Geetika Sharma suicide case: Delhi police may seek extension of Kanda’s remand bird.gif image by yolande-bucket-bucket

शबनम का क़तरा थी मासूम अबलखा ,
वहशी दरिन्दे के वो चंगुल में फंस गयी .
चाह थी मन में छू लूं आकाश मैं उड़कर ,
कट गए पर पिंजरे में उलझकर रह गयी .
   
   थी अज़ीज़ सभी को घर की थी लाड़ली ,
अब्ज़ा की तरह पाला था माँ-बाप ने मिलकर .
आई थी आंधी समझ लिया तन-परवर उन्होंने ,
तहक़ीक में तबाह्कुन वो निकल गयी .
 महफूज़ समझते थे वे अजीज़ी का फ़रदा   ,
तवज्जह नहीं देते थे तजवीज़ बड़ों की .
जो कह गयी जा-ब-जा हमसे ये तवातुर ,
हर हवा साँस लेने के काबिल नहीं होती .

जिन हाथों में खेली थी वो अफुल्ल तन्वी ,
जिन आँखों ने देखी थी अक्स-ए-अबादानी .
खाली पड़े हैं हाथ अब बेजान से होकर ,
आँखें किन्ही अंजान अंधेरों में खो गयी .

नादानी ये माँ-बाप की बच्चे हैं भुगतते ,
बाज़ार-ए-जहाँ में यूँ करिश्मे नहीं होते .
न होती उन्हें तुन्द्ही छूने की फलक को ,
औलाद की कुर्बानियां न यूँ दी गयी होती .

शब्दार्थ -अबलखा-एक चिड़िया ,अज़ीज़ -प्रिय ,अब्ज़ा -लक्ष्मी सीपी मोती ,तन परवर -तन पोषक ,
           तहकीक -असलियत ,तबाह्कुन -बर्बाद करने वाला ,अजीज़ी -प्यारी बेटी ,फ़रदा -आने वाला दिन ,
            जा-ब-जा -जगह जगह ,तवातुर -निरंतर ,बाज़ार-ए-जहाँ -दुनिया का बाज़ार ,अक्स-ए-अबादानी-आबाद होने का चित्र ,
             तन्वी-कोमल अंगो वाली ,अफुल्ल-अविकसित ,तुन्द्ही -जल्दी 
                                                                   शालिनी कौशिक  

मंगलवार, 11 सितंबर 2012

''बेरोजगारों की भीड़ ''.

बेरोजगारों की भीड़ ''.

  
 भीड़ भीड़ भीड़ हर ओर भीड़ ही भीड़ देख माथा ठनक सा जाता है और अब एक और भीड़ बढ़ाने चली है हमारी उत्तर प्रदेश सरकार -''बेरोजगारों की भीड़ ''.
यही कहना पड़ रहा है जो हाल हमने इस योजना का अभी हाल ही में देखा है उसे देखकर ,जिसे देखो  इस योजना में मिलने वाले  1000/- रुपये प्रति महीने पाने को लालायित हो रहा है .पहले कभी किसी नौकरी के लिए भले ही आवेदन न किया हो तब भी इस योजना के लिए मूल  निवास प्रमाण पत्र ,राशन  कार्ड  की फोटो प्रति दो पासपोर्ट साइज़ फोटो लिए भागा फिर रहा है .कमाल की बात तो ये  है कि बेरोजगार लोग आवेदन पत्र जमा करने के लिए अपनी कारों बल्कि यूं कहूं तो जयादा सही रहेगा कि अपनी निजी कारों में लदकर वहां पहुंचे और सड़कों पर जरा से जाम पर हो हल्ला करने वाले ये युवा वहां  शांति पूर्वक लाइन में खड़े रहे .जिस  किसी से भी हमारी बात हुई  उसका  यही कहना था  कि महीने में 1000 रुपये मिल  रहे हैं  तो कोई  बुरी  बात थोड़े  ही है इन्हें  लेने में . जब हम पढ़े लिखे हैं ,इसी आयु सीमा में आते हैं तो इसका फायदा क्यों न उठायें.और आज इसी कारण  ये हाल है कि स्व रोजगार में सफलता पूर्वक जुटे युवा इस ओर मुड़ रहे हैं और उत्तर प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या को चार गुनी दिखा रहे हैं .उत्तर   प्रदेश सरकार की मुफ्त में कुछ न कुछ बाँटने की नीति  के बारे  में यही कहा जा सकता है कि ये केवल  भिखारियों की संख्या बढ़ा  रही है और कुछ नहीं .
                                
                                                
                                  शालिनी कौशिक 
                                     [कौशल ]

मंगलवार, 4 सितंबर 2012

माननीय शिक्षकों को शालिनी का प्रणाम


माननीय शिक्षकों को शालिनी का प्रणाम 
Successfu...

अर्पण करते स्व-जीवन शिक्षा की अलख जगाने में ,
रत रहते प्रतिपल-प्रतिदिन  शिक्षा की राह बनाने में .


Teacher : teacher with a group of high school students  in classroom

आओ मिलकर करें स्मरण नमन करें इनको मिलकर ,
जिनका जीवन हुआ सहायक हमको सफल बनाने में .


Teacher : Children standing in row in front of teacher who gives or receives test paper

जीवन-पथ पर आगे बढ़ना इनसे ही हमने सीखा ,
ये ही निभाएं मुख्य भूमिका हमको राह दिखाने में  .


Teacher : Santa and students!


खड़ी बुराई जब मुहं खोले हमको खाने को तत्पर ,
रक्षक बनकर आगे बढ़कर ये ही लगे बचाने में .
मात-पिता ये नहीं हैं होते मात-पिता से भी बढ़कर ,
गलत सही का भेद बताकर लगे हमें समझाने में .
पुष्प समान खिले जब शिष्य प्रफुल्लित मन हो इनका ,
करें अनुभव गर्व यहाँ ये उसको श्रेय दिलाने में .

Sarvepalli Radhakrishnan

शीश झुकाती आज ''शालिनी ''अहर्नीय के चरणों में ,
हुए सहाय्य ये ही सबके आगे कदम बढ़ाने में .
               शालिनी कौशिक 
                   [कौशल ]

रविवार, 2 सितंबर 2012

शिक्षक दिवस की बधाइयाँ


शिक्षक दिवस की बधाइयाँ   
Sarvepalli Radhakrishnan

शिक्षक दिवस एक ऐसा दिवस जिसकी नीव ही हमारे दूसरे राष्ट्रपति श्रद्धेय पुरुष डॉ.राधा कृष्णन जी के जन्म  दिवस पर पड़ी .डॉ.राधा कृष्णन जी को श्रृद्धा सुमन अर्पित करने हेतु ही देश प्रतिवर्ष ५ सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाता है .सर्वप्रथम डॉ.राधाकृष्णन जी को जन्मदिन पर मैं उन्हें ह्रदय से नमन करती हूँ.
.मैं जब बी.ए. में थी तो आगे के लिए करियर चुनने को मुझसे जब कहा एम्.ए.संस्कृत व् आगे पीएच डी.कर शिक्षण क्षेत्र को अपनाने का सुझाव दिया गया तो मैंने साफ इंकार कर दिया क्योंकि मैं अपने में वह योग्यता नहीं देख रही थी जो एक शिक्षक में होती है मेरी मम्मी जिन्होंने हमें हमारे विद्यालय की अपेक्षा उत्तम शैक्षिक वातावरण घर में ही दिया वे शिक्षक बनने के योग्य होने के बावजूद घर के  कामों में ऐसी रमी की उसमे ही उलझ कर रह गयी और कितने ही छात्र छात्राएं जो उनसे स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर सकते थे वंचित रह गए..परिवार को प्रथम पाठशाला  और माता को प्रथम शिक्षिका कहा जाता है इसलिए मैंने सबसे पहले  अपनी शिक्षिका अपनी मम्मी को ही इस अवसर पर याद किया है ये उनका ही प्रभाव है कि हमें कभी ट्यूशन के ज़रुरत नहीं पड़ी जबकि हमारे साथ की अन्य छात्राएं लगभग २-३ विषयों के ट्यूशन सारे साल पढ़ती थी और आजकल की आधुनिक मम्मी जब ये कहती हैं कि हमारे बच्चे हमसे नहीं  पढ़ते तब हमारा मन ये मानने को तैयार ही नहीं होता क्योंकि हमारी मम्मी ने मारने की जगह मारकर और समझाने की जगह समझाकर हमें उत्तम शिक्षा प्रदान की है और ये सब उन्होंने तब किया जबकि वे स्वयं एक एडवोकेट हैं कभी समय की  कमी दिखाकर उन्होंने हमारी इस आवश्यकता को नज़रंदाज़ नहीं किया .
आज शिक्षक विवादों के घेरे में हैं  .इसके साथ ही विद्यालय में छात्रों पर दबाव डाला जाता है की वे सम्बंधित विषय के अध्यापक का ट्यूशन लगायें और छात्र अधिक नंबरों के फेर में ऐसा करने को मजबूर हैं हमें ये सब शिक्षक दिवस पर कहना अच्छा नहीं लग रहा है किन्तु ह्रदय की व्यथा तभी सामने आती है जब उसी विषय पर बात की जाती है जिसने ह्रदय को पीड़ित किया है .जहाँ एक ओर हमने अपने विद्यालय में शिक्षिकाओं का पक्षपात पूर्ण रवैया देखा वहीँ हमारी एक शिक्षिका ने वास्तव में अपने आदर्श को हमारे ह्रदय में स्थापित किया और ये बताया कि वास्तव में शिक्षक कैसे होने चाहिए ?
बचपन से लेकर अभी तक के जीवन में हमें अपनी श्रीमती सुरेश बाला गुप्ता दीदी  [यही  कहती थी उस वक़्त छात्राएं अपनी मैडम को] ने हमारा एक अच्छी शिक्षिका की तरह मार्गदर्शन किया और एक अच्छे हमदर्द की भांति साथ निभाया .वे हमसे गलतियाँ  होने पर मारती भी थी और अच्छा काम करने पर खुलकर सराहना भी करती थी .उनकी ये बात हम बच्चों में बहुत सराही गयी थी कि विद्यालय में एक सुन्दर कुशल  न्रित्यान्गना छात्रा  को उन्होंने हमारे कार्यक्रम में से केवल इसलिए अलग कर दिया था कि वह विध्यालय के और बहुत से कार्यक्रमों में भाग ले रही थी उनका  कहना था कि इसे तो सब ले लेंगे अपने कार्यक्रम में मैं तो अपने इन्ही बच्चों को लूंगी 
जब एल एल .बी के बाद पी.सी.एस.[जे] के लिए मुझे उर्दू सीखने की आवशयकता थी तब उन्होंने विद्यालय में नव नियुक्त होकर आये उर्दू अध्यापक से हमारी पहचान करायी और उनसे हमें उर्दू सिखाने का आग्रह किया साथ ही मैं आभार व्यक्त करती हूँ उर्दू अध्यापक श्री मुनव्वर हुसैन जी का जिन्होंने हमसे कोई जानकारी न होते हुए भी हमें उर्दू सिखाई और हमसे इसका कोई पारिश्रमिक भी नहीं लिया .
         शिक्षक दिवस पर मैं अपने जीवन के इन सभी श्रेष्ठ अध्यापकों को दिल से नमन करती हूँ.
                                   
                         शालिनी कौशिक 

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