मंगलवार, 4 सितंबर 2012

माननीय शिक्षकों को शालिनी का प्रणाम


माननीय शिक्षकों को शालिनी का प्रणाम 
Successfu...

अर्पण करते स्व-जीवन शिक्षा की अलख जगाने में ,
रत रहते प्रतिपल-प्रतिदिन  शिक्षा की राह बनाने में .


Teacher : teacher with a group of high school students  in classroom

आओ मिलकर करें स्मरण नमन करें इनको मिलकर ,
जिनका जीवन हुआ सहायक हमको सफल बनाने में .


Teacher : Children standing in row in front of teacher who gives or receives test paper

जीवन-पथ पर आगे बढ़ना इनसे ही हमने सीखा ,
ये ही निभाएं मुख्य भूमिका हमको राह दिखाने में  .


Teacher : Santa and students!


खड़ी बुराई जब मुहं खोले हमको खाने को तत्पर ,
रक्षक बनकर आगे बढ़कर ये ही लगे बचाने में .
मात-पिता ये नहीं हैं होते मात-पिता से भी बढ़कर ,
गलत सही का भेद बताकर लगे हमें समझाने में .
पुष्प समान खिले जब शिष्य प्रफुल्लित मन हो इनका ,
करें अनुभव गर्व यहाँ ये उसको श्रेय दिलाने में .

Sarvepalli Radhakrishnan

शीश झुकाती आज ''शालिनी ''अहर्नीय के चरणों में ,
हुए सहाय्य ये ही सबके आगे कदम बढ़ाने में .
               शालिनी कौशिक 
                   [कौशल ]

9 टिप्‍पणियां:

kshama ने कहा…

Behad achhee post!

yashoda agrawal ने कहा…

आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 05/09/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आयें, शिक्षा की अलख जगायें..

Dr. sandhya tiwari ने कहा…

bahut sundar shalini ji shikshak diwas ki shubhkamna

Anil Singh ने कहा…


vehad khoobshurat najariya,

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ!

प्रतीक माहेश्वरी ने कहा…

खूबसूरत..
शिक्षकों को प्रणाम!

मन्टू कुमार ने कहा…

"खड़ी बुराई जब मुहं खोले हमको खाने को तत्पर,रक्षक बनकर आगे बढ़कर ये ही लगे बचाने में"

गुरु का गुणगान...लाजवाब...|

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

एक भाव वाचक वन्दना सी गुनगुनी कविता गुरुजनों को आपने पूरे आदर से समर्पित की ,बहुत अच्छा लगा .आप बहुत अच्छे टीचर्स की बेहतरीन देन हैं इस समाज को .