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रफ़्तार जिंदगी में सदा चलके पायेंगें.

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लम्हे कभी फुर्सत के हमें मिल न पायेंगें, रफ़्तार जिंदगी में सदा चलके पायेंगें. बैठे अगर उदास कहीं टूट जायेंगें, इस दिल में जोश भरके ही कुछ ढूंढ पायेंगें. ये जिंदगी देती हमें कई राहें निरंतर , पाएंगे मंजिल इनपे गर हम बढ़ते जायेंगें. न देखना मुड़कर कभी भूले से भी पीछे, राहों के पत्थर रोकने को रोज़ आयेंगें . बढ़ना है जिंदगी में अगर तुमको ''शालिनी'' ऐसे ख्याल दिल में तेरे खूब आयेंगे.                            शालिनी कौशिक                                         [कौशल]

प्रणव देश के १४ वें राष्ट्रपति :कृपया सही आकलन करें

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२६ जनवरी १९५० भारत में संविधान द्वारा गणतंत्र लागू किया गया और मई १९५२ में हुए प्रथम राष्ट्रपति के चुनाव में डॉ.राजेंद्र प्रसाद विजयी हुए और देश के प्रथम राष्ट्रपति बने  मई १९५७ में हुए दूसरे चुनाव में भी डॉ.राजेंद्र प्रसाद ही देश के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए भले ही वे इस पद पर रहने वाले एक  ही व्यक्ति थे किन्तु गणना की दृष्टि से देश के दूसरे राष्ट्रपति कहे जायेंगे और यदि देश के आंकड़ों में उनके सम्बन्ध में की गयी ये   गणना सही  की जाये तो अन्य आंकड़े स्वयं सही होते जायेंगे- १ मई १९५२           राजेंद्र प्रसाद  २-मई १९५७           राजेंद्र प्रसाद  ३-मई १९६२          एस.राधा कृष्णन    ४ -मई १९६७           ज़ाकिर  हुसेन  ५ -अगस्त १९६९      वी.वी.गिरी  ६ -अगस्त १९७४        फखुरुद्दीन अली अहमद  ७ -जुलाई १९७७           नीलम  संजीव रेड्डी  ८ -जुलाई १९८२           जैल  सिंह  ९ -जुलाई १९८७           आर.वैंकेट रमण  १० -जुलाई १९९२         डॉ.शंकर दयाल शर्मा  ११ -जुलाई १९९७         डॉ.के.आर.नारायणन  १२ -जुलाई २००२        डॉ.ए.पी .जे. अब्दुल कलाम  १३ -जुलाई २००७         श्रीमती  प्रतिभा  देवी 

हमें आप पर गर्व है कैप्टेन लक्ष्मी सहगल

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हमें आप पर गर्व  है कैप्टेन लक्ष्मी सहगल                                                             ''हजारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है ,          बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दी-दावर पैदा .'' २३ जुलाई २०१२ सुबह ११.२० पर हमारे देश की महान स्वतंत्रता सेनानी कैप्टेन लक्ष्मी सहगल स्वर्ग सिधार गयी और छोड़ गयी अपने मरीजों जिन्हें वे ९७ साल की उम्र में भी नित्य अपनी सेवाएं दे रही थी और हमें बहुत सी ऐसी बातें सोचने को जो एक ओर तो लक्ष्मी जी के देशप्रेम की यादें ताज़ा करती हैं तो दूसरी ओर हमें अपने नेताओं के मानसिक स्तर के पतन पर चुल्लू भर पानी में डूब मरने को विवश करती हैं. सिंगापुर में आजाद हिंद फ़ौज की महिला शाखा का १९४२ में गठन हुआ .इसमें महिलाओं के विकास विभाग की अध्यक्ष डॉ.लक्ष्मी सहगल बनायीं गयी.जब महिला सेना बनाने का प्रस्ताव सुभाष चन्द्र बोस ने रखा तो डॉ.लक्ष्मी ने उत्साह से इस कार्य को अंजाम दिया .जब महिला शाखा की अध्यक्स श्रीमती चिदंबरम ने कागज और कलम लेकर उन महिलाओं के नाम लिखे जो सेना में भर्ती होना चाहती थी तो डॉ.लक्ष्मी ने उस समय कहा -'&

प्रतिभा जी :एक आदर्श

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प्रतिभा जी :एक आदर्श  २४ जुलाई २०१२ वह दिन  है  जब हमारे देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल जी अपने पद से सेवानिवृत्त होंगी .प्रतिभा जी का इस पद को सुशोभित  करना सम्पूर्ण  विश्व   में महिलाओं  के  शीश    को  उंचा   करता  है कारण सभी जानते हैं जिस देश में महिलाओं  के ३३ %आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिज्ञ  जहर खाने  या   गंगा में कूदने की बाते करते हों वहां संविधान के सर्वोच्च पद पर एक महिला का सुशोभित होना बहुत मायने रखता है और प्रतिभा जी ने इसी पुरुष सत्तात्मक समाज को अपनी काबिलियत द्वारा आइना  दिखाया  है  . प्रतिभा जी ने अपने कार्यकाल में बहुत से ऐसे   कार्यों को अंजाम  दिया है जिनके बारे में अधिसंख्य  जनता को ये  संदेह  था  कि एक महिला होने के कारण वे इन  कार्यों को नहीं कर पाएंगी  .जैसे कि सभी  जानते हैं कि राष्ट्रपति तीनों सेनाओं का  सर्वोच्च  कमांडर होता  है और सेनाओं में आज भी लड़कियों का वह स्थान नहीं है जो कि लड़कों का है जबकि  लड़कियों को जहाँ भी अवसर मिल रहे हैं वे अपनी श्रेष्ठता  साबित कर रही हैं .ऐसी स्थितियों में अधिकांश  की नज़रों में इस पद

सृष्टि में एक नारी,

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सृष्टि में एक नारी, धरती पर जीवन रचने की भावना जब आई  तब प्रभु ने औजार छोड़कर तूलिका उठाई. सेवक ने तब प्रभु से पूछा ऐसे क्या रचोगे, औजारों का काम आप इससे कैसे करोगे? बोले प्रभु मुझको है बनानी सृष्टि में एक नारी, कोमलता के भाव बना न सकती कोई आरी. पत्थर पर जब मैं हथोडी से वार कई करूंगा, ऐसे दिल में प्यार के सुन्दर भाव कैसे भरूँगा? क्षमा करुणा भाव हैं ऐसे उसमे तभी ये आयेंगे, जब रंगों के संग सिमट कर उसके मन बस जायेंगे. इसीलिए अपने हाथों में तूलिका को थामा, पहनाने दे अब मेरी योजना को अमली जामा.                                                      शालिनी कौशिक                                                       [कौशल ]

समझें हम.

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कैप्शन जोड़ें googal  से  sabhar    भारत पाकिस्तान की जनता के लिए ये एक खुशखबरी से कम नहीं है कि दिसंबर -जनवरी   में भारत पाकिस्तान   3 वन डे और २  टवेंटी   - 20 मैच  खेलेंगें   . २००७ के बाद भारत पाक की ये पहली क्रिकेट सीरीज कही जा सकती है .मुंबई हमले के बाद संबंधों पर ज़मी ये बर्फ अब पिघलने की ओर है और  यही  प्रार्थना है कि ये सम्बन्ध अब कभी दुश्मनी     के  धुंध लके    में न रहें और  पुराने   समय में जो हिन्दू-मुस्लिम प्रेम की कहानियां हमारे बड़ों के द्वारा हमे सुनाई जाती रही आज फिर वे  हमारी   आँखों  के समक्ष  प्रत्यक्ष हो जाएँ . मेरी एक ग़ज़ल इसी सम्बन्ध में मेरे  देशवासियों   की  भाव नाओं को कुछ  यूँ उजागर  करती  है-                       ''मुख्तलिफ   ख्यालात  भले  रखते हों मुल्क से बढ़कर न खुद  को समझें हम, बेहतरी हो जिसमे अवाम की अपनी ऐसे क़दमों को  बेहतर   समझें हम. है ये  चाहत  तरक्की की राहें आप और हम  मिलके पार करें , जो सुकूँ साथ मिलके चलने में इस हकीक़त को ज़रा समझें हम . कभी हम एक साथ रहते थे ,रहते हैं आज जुदा थोड़े से , अपनी आपस क

अपराध तो अपराध है और कुछ नहीं ...

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 अपराध तो अपराध है और कुछ नहीं .. बलात्कार ,छेड़छाड़ ऐसे अपराध जो नारी जाति के विरुद्ध घटित होते हैं और  जिनकी पीड़ित हमेशा से नारी जाति ही  होती है .ऐसे अपराध जिनका दंड पीडिता ही भुगतती आई है और इस कारण  या  तो ये  अपराध पीडिता द्वारा छिपा लिया जाता   है और या इसे उजागर करने का परिणाम उसे निंदा या ये कहूं कि घोर निंदा के रूप में भुगतना पड़ता है जिसका परिणाम अंततः पीडिता को  आत्म हत्या के रूप में ही अपनाना पड़ता है.    अभी ताज़ा घटनाक्रम में गुवाहाटी  असम में एक नाबालिग किशोरी  के साथ छेड़छाड़ की घटना चर्चा में है और हमेशा की तरह नारी चरित्र  पर  उंगली उठनी आरम्भ हो चुकी है  जिसे    आप  हमारी  प्रबुद्ध    ब्लोगर  अंशुमाला    जी   के  ब्लॉग  mengopeople पर प्रत्यक्षतः  पढ़  सकते हैं लिंक ये है -   गुवाहाटी मामले में पहले लड़की की असलियत जानिए फिर लड़को को कुछ कहिये - - - - -mangopeople   और शायद ऐसी ही मानसिकता ने कानून को कुछ कठोर उपाय अपनाने को विवश  किया  है .भारतीय साक्ष्य अधिनियम १८७२ की धारा १४६ में  प्रतिपरीक्षा में  विधि पूर्ण   प्रश्न  के  विषय  में प्रावधान  किया  है . धारा

ऐसा हादसा कभी न हो

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ऐसा हादसा कभी न हो  १२ जुलाई  2012 -अमर उजाला समाचार पत्र एक ऐसे हादसे की भयावहता से भरा था जो हम सभी के रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है. समाचार था "गैस रिसाव से  हुआ  वैन  हादसा -पंद्रह  मिनट तक  चली जिंदगी और  मौत  की जंग " कांधला {प्रबुद्ध नगर}में दिल्ली  यम नौत्री  मार्ग पर एलम के पास मंगलवार को चंद मिनट में एक वैन  परिवार के १४ लोगों को लील गयी  कारण गैस रिसाव . एक ऐसा हादसा जो हम सभी को झकझोर कर रख देने वाला है किन्तु केवल उन परिजनों को छोड़ कर जो इस हादसे के बाद अकेले रह गए हैं    शायद   ही  कोई  इस हादसे को याद  रखे  किन्तु ऐसे हादसे भूलने के लिए नहीं  होते बल्कि हमें  सबक सिखाने के लिए होते हैं हम जो आये  दिन  ऐसी गाड़ियों का उपयोग   कर रहे हैं जो गैस से चलती हैं और हमारे बच्चे जो विभिन्न स्कूलों  में पढने  जाते  हैं वहां भी ऐसी  ही गाड़ियाँ उन्हें  लाने  ले  जाने  के लिए लगायी  जाती  हैं जो गैस से चलती हैं और उन गाड़ियों  में बच्चे इस कदर  भरे  जा  रहे  हैं कि यदि  दुर्भाग्यवश  ऐसी कोई  घटना   घटने  भी  लगे  तो  उन पर बाहर निकलने  की सोचने का भी सम

धिक्कार तुम्हे है तब मानव ||

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धिक्कार तुम्हे है तब मानव ||                                                    आंसू न किसी के रोक सके धिक्कार तुम्हे है तब मानव | खुशियाँ  न किसी को दे सके धिक्कार तुम्हे है तब मानव || ये जीवन  परोपकार  में तुम गर लगा सके तो धन्य है , गर स्वार्थ पूर्ति  में लगे रहो धिक्कार तुम्हे है तब मानव || जब बनते खुशियाँ लोगों की सच्ची खुशियाँ तब पाते हो , जब छीनो  चैन  किसी का भी धिक्कार तुम्हे है तब मानव || न छीनो हक़ किसी का तुम जो  जिसका   है उसको दे दो , जब  लूटपाट  मचाते  तुम धिक्कार तुम्हे है तब मानव || जब समझे गैर को तुम अपना तब जग अपना हो जाता है, करते जब अपने को  पराया  धिक्कार तुम्हे है तब मानव || लायी "शालिनी"धर्मों से  कुछ बाते तुम्हे बताने  को, न समझ  सके गर अब   भी तुम धिक्कार तुम्हे है तब मानव||                                                 शालिनी कौशिक                                                         {कौशल }