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उत्तर प्रदेश में आज छठे चरण का मतदान कार्य चल रहा है और कहने  को जो बुद्धिजीवी हैं मैंने जहाँ तक देखा है घरों में समाचार पत्र पढने में और टेलीविजन  देखने में मशगूल हैं और जिसे ये बुद्धिजीवी अनपढ़ गंवार कहते   हैं वे  कभी अकेले और कभी मुहं ढक कर मतदान केन्द्रों की और जा रहे हैं क्या यही  है हमारा अपने लोकतंत्र के प्रति कर्तव्य निर्वहन?अधिकार पाने को तो हम संघर्षों से सरकार की नाक में दम कर देते हैं और कर्त्तव्य के नाम पर ''इसे राजनीति की दलदल" कह पीछे हट लेते हैं .हम यदि अपने को जागरूक नागरिक कहते हैं तो हमें अपने कर्तव्य के प्रति भी जागरूक होना होगा और एक योग्य,ईमानदार सरकार का निर्माण अपने इन हाथों से करना होगा.साथ ही  आप सुनिए ''शिखा जी ''का ये स्वयं लिखा व् स्वरबद्ध किया हुआ ये गाना जो आपको शायद सोते से जगा सकने में मेरे इस आलेख की अपेक्षा ज्यादा सक्षम होगा और यदि ये गाना आपको जरा भी इस कार्य में प्रेरित  करे तो कृपया यहाँ बताना और वोट डालना मत भूलियेगा  -

शालिनी  कौशिक 

नारी शक्ति का स्वरुप:कमजोरी केवल भावुकता/सहनशीलता

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नारी शक्ति का स्वरुप:कमजोरी केवल भावुकता/सहनशीलता




 ये सर्वमान्य तथ्य है कि महिला शक्ति का स्वरुप है और वह अपनों के लिए जान की बाज़ी  लगा भी देती है और दुश्मन की जान ले भी लेती है.नारी को अबला कहा जाता है .कोई कोई तो इसे बला भी कहता है  किन्तु यदि सकारात्मक रूप से विचार करें तो नारी इस स्रष्टि की वह रचना है जो शक्ति का साक्षात् अवतार है.धेर्य ,सहनशीलता की प्रतिमा है.जिसने माँ दुर्गा के रूप में अवतार ले देवताओं को त्रास देने वाले राक्षसों का संहार किया तो माता सीता के रूप में अवतार ले भगवान राम के इस लोक में आगमन के उद्देश्य को  साकार किया और पग-पग पर बाधाओं से निबटने में छाया रूप  उनकी सहायता की.भगवान विष्णु को अमृत देवताओं को ही देने के लिए और भगवान् भोलेनाथ  को भस्मासुर से बचाने के लिए नारी के ही रूप में आना पड़ा और मोहिनी स्वरुप धारण कर उन्हें विपदा से छुड़ाना पड़ा.    हमारे संस्कृत ग्रंथों में कहा गया है - "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते,रमन्ते तत्र देवता."        प्राचीन काल  का इतिहास नारी की गौरवमयी  कीर्ति से भरा पड़ा है.महिलाओं ने समय समय पर अपने साहस पूर्ण कार्यों से दुश्मनों…

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें !

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महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें  आज आप सभी को शिव रात्रि की शुभकामनाओं को तो मैं प्रेषित कर ही रही हूँ साथ ही चाहती हूँ की आप सभी शिखा कौशिक जी के इस स्व-रचित और स्वरबद्ध किये हुए शिव महिमा से ओत-प्रोत भजन का भी आनंद लें और पूर्ण रूप से शिव मय हो जाएँ.