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तकलीफ ज़िन्दगी है आराम मौत है..

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दरिया-ए-जिंदगी की मंजिल मौत है ,
आगाज़-ए-जिंदगी की तकमील मौत है .
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बाजीगरी इन्सां करे या कर ले बंदगी ,
मुक़र्रर वक़्त पर मौजूद मौत है .
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बेवफा है जिंदगी न करना मौहब्बत ,
रफ्ता-रफ्ता ज़हर का अंजाम मौत है .
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महबूबा बावफ़ा है दिल के सदा करीब ,
बढ़कर गले लगाती मुमताज़ मौत है .
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महफूज़ नहीं इन्सां पहलू में जिंदगी के ,
मजरूह करे जिंदगी मरहम मौत है .
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करती नहीं है मसखरी न करती तअस्सुब,
मनमौजी जिंदगी का तकब्बुर मौत है .
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ताज्जुब है फिर भी इन्सां भागे है इसी से ,
तकलीफ जिंदगी है आराम मौत है .
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तक़रीर नहीं सुनती न करती तकाजा ,
न पड़ती तकल्लुफ में तकदीर मौत है .
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