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नारियां भी कम भ्रष्ट नहीं.

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नारियां भी कम भ्रष्ट नहीं.                               दिल्ली  एम्.सी.डी. के चुनाव  में महिलाओं को ५०%आरक्षण दिया गया है और ये कयास  लगाये  जा  रहे  हैं  कि शायद   इस तरह भ्रष्टाचार को कम करने में मदद  मिलेगी  जबकि  मेरे  विचार  में ये कोरी कल्पना मात्र है क्योंकि भ्रष्टाचार का किसी से भी दूर  या पास का रिश्ता नहीं है वह नर   हो या नारी किसी के लिए भी पराये या अपने का भाव नहीं रखता है जो भी इसे अपना मानता है वह उससे ही जुड़ जाता है.ऊपर  मैंने  जिन  भारतीय नेत्रियों के चित्र यहाँ संकेत मात्र हेतु लगाये हैं ये भी नारी हैं और इनके जैसी और भी बहुत सी नारियां है  जो इस पुण्य कार्य  में लगी हैं.भला  हम नारियों को कम भ्रष्ट कहकर क्यों हर  काम की तरह यहाँ भी उनकी क्षमता को कम आंकते हैं.    और इस सच्चाई से भी हम इंकार नहीं कर सकते कि कितनी ही गृहणियां  अपने पतियों को भ्रष्टाचार  के लिए उकसाती हैं और अपनी इच्छाओं को पूरा करने हेतु दबाव डालती हैं.               फिर भी मैं इस प्रयास की तारीफ ही करूंगी की आखिर नारियों को आगे बढ़ने  के लिए सरकार  ने कुछ स्वस्थ पहल तो की अब लोगों की आकांक्षाओ

मंज़िल पास आएगी.

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मिशन लन्दन ओलम्पिक हॉकी गोल्ड  फेसबुक पर  लाइक करें  इंडिया गोल्ड  हौसले कर बुलंद अपने ,मंज़िल पास आएगी, जोश भर ले दिल में अपने मंज़िल पास आएगी. तक रहा है बैठकर क्यों भागती परछाइयाँ , उठ ज़रा बढ़ ले तू आगे मंज़िल पास आएगी. दूसरों का देखकर मुंह न पायेगा फ़तेह कभी , रख ज़रा विश्वास खुद पर मंज़िल पास आएगी. भूल से भी मत समझना खुद को तू सबसे बड़ा, सर झुका मेहनत के आगे मंज़िल पास आएगी. गर नशा करना है तुझको चूर हो जा काम में , लक्ष्य का पीछा करे तो मंज़िल पास आएगी. ''शालिनी'' कहती है तुझको मान जीवन को चुनौती , बिन डरे अपना ले इसको मंज़िल पास आएगी.                               शालिनी कौशिक                                      [कौशल ]

रिश्ते

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रिश्ते   कभी हमारे मन भाते हैं,      कभी हैं इनसे दिल जलते, कभी हमें ख़ुशी दे जाते हैं,       कभी हैं इनसे गम मिलते, कभी निभाना मुश्किल इनको,      कभी हैं इनसे दिन चलते, कभी तोड़ देते ये दिल को,       कभी होंठ इनसे हिलते, कभी ये लेते कीमत खुद की,       कभी ये खुद ही हैं लुटते, कभी जोड़ लेते ये जग को,      कभी रोशनी से कटते, कभी चमक दे जाते मुख पर,      कभी हैं इनसे हम छिपते, कभी हमारे दुःख हैं बांटते,      कभी यही हैं दुःख देते, इतने पर भी हर जीवन के प्राणों में ये हैं बसते, और नहीं कोई नाम है इनका हम सबके प्यारे''रिश्ते''                    शालिनी  कौशिक  http://shalinikaushik2.blogspot.com