गुरुवार, 5 अप्रैल 2012

रिश्ते







कभी हमारे मन भाते हैं,
     कभी हैं इनसे दिल जलते,
कभी हमें ख़ुशी दे जाते हैं,
      कभी हैं इनसे गम मिलते,
कभी निभाना मुश्किल इनको,
     कभी हैं इनसे दिन चलते,
कभी तोड़ देते ये दिल को,
      कभी होंठ इनसे हिलते,
कभी ये लेते कीमत खुद की,
      कभी ये खुद ही हैं लुटते,
कभी जोड़ लेते ये जग को,
     कभी रोशनी से कटते,
कभी चमक दे जाते मुख पर,
     कभी हैं इनसे हम छिपते,
कभी हमारे दुःख हैं बांटते,
     कभी यही हैं दुःख देते,
इतने पर भी हर जीवन के प्राणों में ये हैं बसते,
और नहीं कोई नाम है इनका हम सबके प्यारे''रिश्ते''
                   शालिनी  कौशिक 


17 टिप्‍पणियां:

शिखा कौशिक ने कहा…

very nice post .thanks
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kshama ने कहा…

Rishte dard bhee pahunchate hain aur khushee bhee....inhen nibhana bada mushkil hota hai!

रविकर फैजाबादी ने कहा…

बहुत सही |
आभार आपका ||

M VERMA ने कहा…

रिश्ते ऐसे ही होते हैं

Brijendra Singh... (बिरजू, برجو) ने कहा…

बहुत खूब..
रिश्तों को नाम देने के साथ महसूस करना भी जरूरी है..

S.N SHUKLA ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत, बधाई.

कृपया मेरे ब्लॉग" meri kavitayen" की नयी पोस्ट पर भी पधारें, आभारी होऊंगा.

Sunil Kumar ने कहा…

मंथन करने योग्य सार्थक पोस्ट आभार

सदा ने कहा…

वाह ... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

लक्ष्मी नारायण लहरे "साहिल " ने कहा…

भाव -भरी रचना हार्दिक बधाई .........

लक्ष्मी नारायण लहरे "साहिल " ने कहा…

भाव -भरी रचना हार्दिक बधाई .........

लक्ष्मी नारायण लहरे "साहिल " ने कहा…

भाव -भरी रचना हार्दिक बधाई .........

लक्ष्मी नारायण लहरे "साहिल " ने कहा…

भाव -भरी रचना हार्दिक बधाई .........

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

sach me bde acche hote hain ye rishte.....

expression ने कहा…

बहुत सुंदर..........
भावपूर्ण रचना..

babanpandey ने कहा…

आपके ब्लॉग पर आकर पढना अच्छा लगा
रिश्तों के उपर आपकी मोहक कविता मन को भा गई शालिनी जी
मेरे भी ब्लॉग पर आकर प्रोत्शाहित करने की कृपा करें

गुड्डोदादी ने कहा…

कभी हमारे दुःख हैं बांटते,
कभी यही हैं दुःख देते,


अधिकतर रिश्ते ही अपने आप को दुखी करते है

My way ने कहा…

Welcome

http://www.islamhouse.com/p/208559

शत शत नमन शंकर दयाल शर्मा जी को

विकिपीडिया से साभार   आज जन्मदिन है देश के  नौवें राष्ट्रपति  डाक्टर शंकर दयाल शर्मा जी का और वे सदैव मेरे लिए श्रद्धा के पात्र रहेंगे...