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कैराना उपयुक्त स्थान :जनपद न्यायाधीश शामली :

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कैराना  उपयुक्त  स्थान  : जनपद  न्यायाधीश  शामली :  जिला न्यायालय के लिए शामली के अधिवक्ता इस सत्य को परे रखकर सात दिन से न्यायालय के कार्य  को ठप्प किये हैं जबकि सभी के साथ शामली इस प्रयोजन हेतु कितना उपयुक्त है वे स्वयं जानते हैं.               शामली  28 सितम्बर २०११ को मुज़फ्फरनगर से अलग करके   एक जिले के रूप में स्थापित किया गया .जिला बनने से पूर्व   शामली तहसील रहा है और यहाँ तहसील सम्बन्धी कार्य ही निबटाये जाते रहे हैं. न्यायिक कार्य दीवानी ,फौजदारी आदि के मामले शामली से कैराना और मुज़फ्फरनगर जाते रहे हैं .     आज कैराना न्यायिक  व्यवस्था  के मामले में उत्तरप्रदेश में एक सुदृढ़ स्थिति रखता है     कैराना में न्यायिक व्यवस्था की पृष्ठभूमि के बारे में बार एसोसिएशन कैराना के अध्यक्ष ''श्री कौशल प्रसाद एडवोकेट ''जी बताते हैं -                                           ''    '' सन १८५७ में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रथम  स्वतंत्रता संग्राम के द्वारा  ऐतिहासिक क्रांति का बिगुल बजने के बाद मची उथल-पुथल से घबराये ब्रिटिश शासन के अंतर्गत  संयुक्त प्रान्त

तुम मुझको क्या दे पाओगे?

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तुम मुझको क्या दे पाओगे? google se sabhar तुम भूले सीता सावित्री ,क्या याद मुझे रख पाओगे , खुद तहीदस्त हो इस जग में तुम मुझको क्या दे पाओगे? मेरे हाथों में पल बढ़कर इस देह को तुमने धारा है , मन में सोचो क्या ये ताक़त ताजिंदगी भी तुम पाओगे ? संग चलकर बनकर हमसफ़र हर मोड़ पे साथ निभाया है , क्या रख गुरूर से दूरी तुम ताज़ीम मुझे दे पाओगे ? कनीज़ समझ औरत को तुम खिदमत को फ़र्ज़ बताते हो, उस शबो-रोज़ क़ुरबानी का क्या क़र्ज़ अदा कर पाओगे? फ़ितरत ये औरत की ही है दे देती माफ़ी बार बार , क्या उसकी इस इनायत का इकबाल कभी कर पाओगे? शहकार है नारी खिलक़त की '' शालिनी  ''झुककर करे सलाम , इजमालन सुनलो इबरत ये कि खाक भी न कर पाओगे. शब्दार्थ :तहीदस्त-खाली हाथ ,इनायत- कृपा ,ताजिंदगी -आजीवन  ताज़ीम - दूसरे  को बड़ा समझना ,आदर  भाव  ,सलाम  कनीज़ -दासी ,इजमालन - संक्षेप में ,इबरत -चेतावनी , इकबाल -कबूल करना ,शहकार -सर्वोत्कृष्ट कृति , खिलक़त-सृष्टि                             शालिनी कौशिक                                    [कौशल ]

संघ- भाजपा -मुस्लिम हितैषी :विचित्र किन्तु सत्य

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संघ भाजपा -मुस्लिम हितैषी :विचित्र किन्तु सत्य    महात्मा गाँधी वध और  बाबरी   विध्वंस  दो ऐसी घटनाएँ जिन्होंने संघ  और भाजपा दोनों को भारतीय  अल्पसंख्यक समुदाय मुस्लिम समाज के  विरोधी  के रूप मेंचिन्हित   किया  . महात्मा गाँधी का वध नाथूराम  गोडसे ने किया और उसे ये कहकर   प्रचारित किया  गया कि   पीछे  संघ का हाथ है जिसने पाकिस्तान की  स्थापना से क्षुब्ध हो नाथूराम गोडसे का महात्मा गाँधी की हत्या में इस्तेमाल किया . भला कोई समझदार इस   तथ्य पर विश्वास कर सकता  है ? हिन्दुस्तान  काभारत -पाक में बटवारा कराया   अंग्रेजो ने  फिर  संघ जैसी  सेवाभावी संस्था इसका  ठीकरा महात्मा गाँधी के सिर फोड़ उनकी हत्या जैसी जघन्य करतूत कैसे करसकती  थी ? फिर बाबरी  विध्वंस कॉंग्रेस के  शासन   काल  में  हुआ और भारत जहाँ एक सबल  सशक्त  केंद्र  की स्थापना  की  गयी  है वहां भाजपा जैसी  पार्टी जो एक उदार  विपक्ष की  भूमिका निभाने में ही  अपना  बड़प्पन ज़ाहिर  करती   है . भला सरकार को अस्थिर करने जैसे राष्ट्रविरोधी कार्यों को भाजपा जैसी राष्ट्रवादीपार्टी  द्वारा  कैसे अंजाम दिया जा सकता है ?एक और जहाँ देश क

संघ भाजपा -मुस्लिम हितैषी :विचित्र किन्तु सत्य

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संघ भाजपा -मुस्लिम हितैषी :विचित्र किन्तु सत्य    महात्मा गाँधी वध और  बाबरी   विध्वंस  दो ऐसी घटनाएँ जिन्होंने संघ  और भाजपा दोनों को भारतीय  अल्पसंख्यक समुदाय मुस्लिम समाज के  विरोधी  के रूप में चिन्हित   किया  . महात्मा गाँधी का वध नाथूराम  गोडसे ने किया और उसे ये कहकर   प्रचारित किया  गया कि   पीछे  संघ का हाथ है जिसने पाकिस्तान की  स्थापना से क्षुब्ध हो नाथूराम गोडसे का महात्मा गाँधी की हत्या में इस्तेमाल किया . भला कोई समझदार इस   तथ्य पर विश्वास कर सकता  है ? हिन्दुस्तान  का भारत -पाक में बटवारा कराया   अंग्रेजो ने  फिर  संघ जैसी  सेवाभावी संस्था इसका  ठीकरा महात्मा गाँधी के सिर फोड़ उनकी हत्या जैसी जघन्य करतूत कैसे कर सकती  थी ? फिर बाबरी  विध्वंस कॉंग्रेस के  शासन   काल  में  हुआ और भारत जहाँ एक सबल  सशक्त  केंद्र  की स्थापना  की  गयी  है वहां भाजपा जैसी  पार्टी जो एक  उदार  विपक्ष की  भूमिका निभाने में ही  अपना  बड़प्पन ज़ाहिर  करती   है . भला सरकार को अस्थिर करने जैसे राष्ट्रविरोधी कार्यों को भाजपा जैसी राष्ट्रवादी पार्टी  द्वारा  कैसे अंजाम दिया जा सक

नारी के तुल्य केवल नारी

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नारी के तुल्य केवल नारी                                 क्या कभी कोई कर पायेगा     तुलना नारी के नाम से,      क्या कोई अदा कर पायेगा          सेवा की कीमत दाम से.   नारी के जीवन का पल-पल    नर सेवा में समर्पित है,       नारी के रक्त का हरेक कण           नर सम्मान में अर्पित है. क्या चुका पायेगा कोई नर    प्यार का बदला काम से,        क्या कोई अदा कर पायेगा            सेवा की कीमत दाम से माँ के रूप में हो नारी   तो बेटे की बगिया सींचें,     पत्नी के रूप में होकर वह        जीवन रथ को मिलकर खींचें. क्या कर सकता है कोई नर    दूर उनको मुश्किल तमाम से,       क्या कोई अदा कर पायेगा          सेवा की कीमत दाम से.   बहन के रूप में हो नारी     तो भाई की सँभाल करे,       बेटी के रूप में आकर वह          पिता सम्मान का ख्याल करे. क्या दे पायेगा उनको वह    जीवन के सुख आराम से,        क्या कोई अदा कर पायेगा           सेवा की कीमत दाम से.           शालिनी कौशिक             [ kaushal ]

आजादी ,आन्दोलन और हम

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आजादी ,आन्दोलन और हम     [गूगल से साभार]    आज सुबह जब मैं नाश्ता तैयार कर रही थी तभी तभी खिड़की की ओर से   दो आवाज़ सुनाई दी एक दूसरे से पूछ रहा था ,''स्कूल नहीं गया?'' ,तो जवाब सुनाई दिया ,''कि नहीं !आज छुट्टी है ''कितने अफ़सोस की बात है कि जिस दिन के लिए हमारे वीरों ने अपने प्राणों की क़ुरबानी दी हम उस दिन के लिए  ऐसे  भाव रखते हैं.'' यूँ तो पहले से ही अफ़सोस था कि आज हम अपनी छत पर तिरंगा नहीं फहरा पाए और वह केवल इस कारण कि हमारे यहाँ बन्दर बहुत हैं और अभी २६ जनवरी को उन्होंने हमारे तिरंगे को कुछ नुकसान पहुंचा दिया था और हम कुछ नहीं कर पाए थे .हम नहीं चाहते थे कि हमारी थोड़ी सी लापरवाही हमारे तिरंगे के लिए हानिकारक साबित हो ,वो भी उस तिरंगे के लिए जिसकी आन के लिए न  जाने कितने वीर शहीद हो गए . जिसके लिए महात्मा गाँधी ने कहा था -''लाखों लोगों ने ध्वज की आन के लिए कुर्बानियां दी हैं .भारत में रहने वाले हिन्दू ,मुस्लिम ,सिक्ख ,ईसाई सभी के लिए ज़रूरी है कि एक ध्वज के लिए जिए और मरें. '' हमारे घर में तो हमें स्वतंत्रता का महत्व बता

तिरंगा शान है अपनी ,फ़लक पर आज फहराए ,

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तिरंगा  शान  है अपनी ,फ़लक पर  आज फहराए ,      तिरंगा  शान  है अपनी ,फ़लक पर  आज फहराए , फतह की ये है निशानी ,फ़लक पर आज फहराए . रहे महफूज़ अपना देश ,साये में सदा इसके , मुस्तकिल  पाए बुलंदी फ़लक पर आज फहराए . मिली जो आज़ादी हमको ,शरीक़ उसमे है ये भी, शाकिर हम सभी इसके फ़लक पर आज फहराए . क़सम खाई  तले  इसके ,भगा देंगे फिरंगी को , इरादों को दी मज़बूती फ़लक पर आज फहराए . शाहिद ये गुलामी का ,शाहिद ये फ़राखी का , हमसफ़र फिल हकीक़त में ,फ़लक पर आज फहराए . वज़ूद मुल्क का अपने ,हशमत है ये हम सबका , पायतख्त की ये लताफत फ़लक पर आज फहराए . दुनिया सिर झुकाती है रसूख देख कर इसका , ख्वाहिश ''शालिनी''की ये फ़लक पर आज फहराए .           शालिनी कौशिक [कौशल] एक निवेदन सभी महिला ब्लोग्गर्स  से-आपको शिखा कौशिक  के एक नए ब्लॉग '' WORLD'sWOMAN BLOGGERS ASSOCIATION -JOIN THIS NOW   ''का लिंक दे रही हूँ यहाँ जुड़ें और महिला शक्ति को संगृहीत होने का सुअवसर दें.              आभार             शालिनी कौशिक 

प्रोन्नति में आरक्षण :सरकार झुकना छोड़े

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प्रोन्नति में आरक्षण :सरकार  झुकना  छोड़े    [गूगल  से  साभार ] '' सियासत  को लहू पीने  की लत है,     वर्ना मुल्क में सब खैरियत है .''        ये पंक्तियाँ  अक्षरश:  खरी  उतरती हैं सियासत पर  ,जिस आरक्षण को दुर्बल व्यक्तियों को सशक्त व्यक्तियों से  बचाकर पदों की उपलब्धता  सुनिश्चित करने के लिए  लागू  किया गया था . जिसका  मुख्य  उद्देश्य  आर्थिक , सामाजिक , शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े  लोगों को देश की  मुख्य  धारा  में लाना था उसे  सियासत  ने  सत्ता  बनाये  रखने  के लिए '' वोट '' की  राजनीति में  तब्दील   कर  दिया .      सरकारी नौकरियों में प्रोन्नति में आरक्षण इलाहाबाद उच्च  न्यायालय    ने ख़ारिज कर दिया था .इसी  साल अप्रैल  में उच्चतम  न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति व  अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों को प्रोन्नति में आरक्षण देने के पूर्ववर्ती  मायावती  सरकार के  निर्णय  को ख़ारिज कर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को बरक़रार रखा और अखिलेश यादव सरकार ने इस फैसले पर  फ़ौरन अमल   के निर्देश दिए थे  किन्तु वोट कि राजनीति इतनी अहम् है कि संविधान के