सोमवार, 6 अगस्त 2012

अन्ना टीम :वहीँ नज़र आएगी.


अन्ना टीम :वहीँ नज़र आएगी.



शेखी बखारने वालों की फ़िलफौर शामत आएगी,
रफ्ता-रफ्ता सामने पुख्ता हक़ीकत आएगी.

आगाज़ कर रहे थे जो रहनुमा बनकर यहाँ,
रहनुमाई वही अब सियासत में रंगकर आएगी.

तोहमतें लगा रहे थे आज के नेताओं पर ,
है ग़नीमत सियासत की कुछ समझ तो आएगी.

मुबतला रहते थे ये अशखास से शबो-रोज़,
वोट देने के लिए न शक्ल नज़र आएगी.

खिदमतें जो हो रही आरास्ता कर अंजुमन,
इत्तहाद वह नज़र कहीं नहीं आएगी.

अवाम-सियासत ही दोनों करप्शन में हैं रंगे .
खुदगर्ज़ जनता कैसे खलल बन आएगी.

फिरकेबंदी में फंसे हैं जैसे सारे दल यहाँ,
अन्ना टीम ''शालिनी''को वहीँ नज़र आएगी.


                 शालिनी कौशिक 
                            [कौशल]


 शब्द  - अर्थ  -फ़िलफौर-तुरंत ,शामत-विपत्ति,शेखी -घमंड ,मुब्तला-घिरे रहना ,
इत्तेहाद-एकता,आरास्ता-सजाना ,फिरकेबंदी-दलबंदी 

11 टिप्‍पणियां:

dheerendra ने कहा…

राजनीति में फसं गई,पूरी अन्ना टीम
वोट मांगते दिखेगें,करेप्सन के हकीम,,,,,

बढ़िया प्रस्तुति,,,,शालिनी जी,,,,बधाई,,,
RECENT POST...: जिन्दगी,,,,

रविकर फैजाबादी ने कहा…

nice

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

sab ke sab chor hain

Anil Singh ने कहा…

shalini ji Anna ki "raunke jannt ki khwahish gr hkikat ho gye,dekhiyega ek din eska asr hoga jarur...." pr pakijgi ke elm enke kitne safal ho payge vkht ki angdayeeo me khi dikhte dikhte rah n jay.....

दिगम्बर नासवा ने कहा…

फिरकेबंदी में फंसे हैं जैसे सारे दल यहाँ,
अन्ना टीम ''शालिनी''को वहीँ नज़र आएगी.

अगर हम शुरुआत में ऐसा सोचेंगे तो कुछ भी नहीं होने वाला ... एक मोके का हक उनको भी है ... बदलाव तभी आयगा जब नए लोग आयंगे ... अन्यथा मौजूदा राजनीतिग जिनकी बातों पे विश्वास करके हम पहले से ही मन बना लेते हैं ... वो कुछ भी नहीं होने देंगे ...

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

फिरकेबंदी में फंसे हैं जैसे सारे दल यहाँ,
अन्ना टीम ''शालिनी''को वहीँ नज़र आएगी.


आस्था और विश्वास से ओतप्रोत सुन्दर रचना ....

G.N.SHAW ने कहा…

चुनौती भरे डगर

प्रतीक माहेश्वरी ने कहा…

आगे क्या होता है भगवान मालिक! एक लौ जल रही थी, खो गयी है अब अंधेरों में कहीं..

kanu..... ने कहा…

:)

शिवप्रसाद 'सजग' ने कहा…

gazal to aap bahut aachchha likhati hai isme koi shak nah. par maujuda gazal me jo bat aap kah rahi hai main usse sahamt nahi hun.
aakhir aap kis bat par khus ho rahi hai anna ke har par ya sarkar ke vejay par. anna ne jo rasta chuna hai wo aaj se bahut pahale kuchh imandar log ekjud ho kar chunav ladate to ye bura din na dekhana padata.

fir anna ke kya kisi ke bhi chunav ladane se hame aaptti kyo?

kya chunav sirf aur sirf beiman hi lade tabhi tik hai


meri bat se aap bhi asahamt ho sakati hai. pr bura lage to muaf kat dijiyega.

शिवप्रसाद 'सजग' ने कहा…

gazal to aap bahut aachchha likhati hai isme koi shak nah. par maujuda gazal me jo bat aap kah rahi hai main usse sahamt nahi hun.
aakhir aap kis bat par khus ho rahi hai anna ke har par ya sarkar ke vejay par. anna ne jo rasta chuna hai wo aaj se bahut pahale kuchh imandar log ekjud ho kar chunav ladate to ye bura din na dekhana padata.

fir anna ke kya kisi ke bhi chunav ladane se hame aaptti kyo?

kya chunav sirf aur sirf beiman hi lade tabhi tik hai


meri bat se aap bhi asahamt ho sakati hai. pr bura lage to muaf kat dijiyega.