गुरुवार, 23 अगस्त 2012

संघ- भाजपा -मुस्लिम हितैषी :विचित्र किन्तु सत्य



संघ भाजपा -मुस्लिम हितैषी :विचित्र किन्तु सत्य 




 महात्मा गाँधी वध और बाबरी विध्वंस दो ऐसी घटनाएँ जिन्होंने संघ  और भाजपा दोनों को भारतीय अल्पसंख्यक समुदाय मुस्लिम समाज के विरोधी  के रूप मेंचिन्हित  किया  .महात्मा गाँधी का वध नाथूराम गोडसे ने किया और उसे ये कहकर  प्रचारित किया गया कि पीछे संघ का हाथ है जिसने पाकिस्तान की स्थापना से क्षुब्ध हो नाथूराम गोडसे का महात्मा गाँधी की हत्या में इस्तेमाल किया .भला कोई समझदार इस तथ्य पर विश्वास कर सकता  है ?हिन्दुस्तान काभारत -पाक में बटवारा कराया  अंग्रेजो ने फिर संघ जैसी सेवाभावी संस्था इसका ठीकरा महात्मा गाँधी के सिर फोड़ उनकी हत्या जैसी जघन्य करतूत कैसे करसकती थी ?फिर बाबरी विध्वंस कॉंग्रेस के शासन काल में हुआ और भारत जहाँ एक सबल  सशक्त केंद्र की स्थापना की गयी है वहां भाजपा जैसी पार्टी जो एकउदार विपक्ष की भूमिका निभाने में ही अपना बड़प्पन ज़ाहिर करती  है .भला सरकार को अस्थिर करने जैसे राष्ट्रविरोधी कार्यों को भाजपा जैसी राष्ट्रवादीपार्टी  द्वारा कैसे अंजाम दिया जा सकता है ?एक और जहाँ देश के प्रधानमंत्री पद पर कथित विदेशी महिला की नियुक्ति रोकने हेतु जहाँ भाजपा नेत्रियाँ सुषमा स्वराजऔर उमा भारती दोनों गंजी होने को तैय्यार हो जाती हैं वहीँ भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी उन्ही विदेशी महिला को अपने बेटे की शादी  में आमंत्रितकरने हेतु उनके निवास स्थल पर पहुँच अपनी सद्भावना का परिचय देते हैं .





कभी देश की प्रधानमंत्री रही श्रीमती इंदिरा गाँधी जिन्हें हिन्दू होते हुए पारसी से विवाह करने पर पुरी मंदिर  में प्रवेश से रोक दिया जाता है उन्ही के पौत्र वरुण  को न केवल ये पार्टी अपने सदस्य के रूप में स्थान देती है बल्कि उसे हिन्दू के रूप में मान्यता देते हुए उसके विवाह के कर्मकांड एक हिन्दू के रूप में किये जाने को भीमान्यता देती है .कहीं दिखेगी ऐसी धार्मिक सद्भावना ,जहाँ बाबरी विध्वंस के लिए सरकार तक की बलि चढ़ाने वाले अपने जनप्रिय नेता कल्याण  सिंह को पार्टीसे निष्कासित कर भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवानी जी जो पार्टी अध्यक्ष भी रहे हैं  ६ दिसंबर  १९९२ को अपने जीवन  का'' सबसे दुखद दिन ''मानते हैं .जहाँभारत पाक बंटवारे के मुख्य सूत्रधार मुहम्मद अली जिन्नाह को अडवाणी जी ''धर्मनिरपेक्ष ''बताते हुए अपनी छवि तक से भी खेल जाते हैं जो हिन्दूकट्टरवादी की बनी है .जहाँ पार्टी के प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपयी जी  मुस्लिम रोजेदारों से पूरे अपनत्व से मिलते हैं वहां मुस्लिमों के प्रति दुर्भावनाकी बात सोची भी कैसे जा सकती है .
        सोचने की बात है कि आज तक मुस्लिम हितैषी होने का फायदा कॉंग्रेस उठाती आ रही है जबकि कभी भाजपा के चाणक्य रहे के.एस.गोविन्द आचार्य हीकह रहे हैं कि वर्तमान में कॉंग्रेस और भाजपा की नीतियों में ज्यादा अंतर नहीं है .ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव दोनों दलों को साथ मिलकर लड़ना चाहिए  उनकी इस बात के बाद भाजपा के मुस्लिम हितैषी होने पर कोई सवाल उठाया ही नहीं जा सकता .जब कॉंग्रेस की नीतियां  मुस्लिमों के लिए सद्भावना वाली  हैं तो भाजपा की भी नीतियां गोविन्दाचार्य जी के अनुसार मुस्लिम हितैषी ही जाएँगी..

      फिर अंत में हम सभी देखते है कि मनुष्य बचपन में व् वृद्धावस्था में बिल्कुल  निश्छल मासूम ,छल से दूर होता है सीधा सच्चा होता  है .कभी संघ प्रमुख रहेके.सी .सुदर्शन आज उसी स्थिति में हैं जब आदमी केवल अपना सच जीता  है .बनावटी मुखौटा उतर जाता है .ईद  के अवसर पर जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त सुदर्शन जी ने बधाई के लिए एशिया की सबसे बड़ी ताजुल मस्जिद जाने की जिद ठान ली और मुबारकबाद देकर मुस्लिम भाइयों  के साथ शीर [सीवाई] भी खाई .
       ऐसे में संघ भाजपा के बारे में ये कहना कि ये मुस्लिम विरोधी हैं समझदार लोगों के लिए तो कोरी अफवाह ही कही जाएगी अब कम अक्ल कुछ भी सोचेंक्या किया जा सकता है क्यूं सही है न ----वासुदेव शर्मा जी भी यही कहते है -

      ''शक की कैंची के फलके यदि अनजाने भी चल जाते हैं ,

       सच कहता हूँ विश्वासों में चन्दन वन भी जल जाते हैं .''
                
                     शालिनी कौशिक [कौशल]

10 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (25-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

पूर्वाग्रह प्राय: गलत तस्वीर ही दिखाते हैं|

Anil Singh ने कहा…


Ek suyojit ranniti ke tahat ek tana-bana bunkr ek nam ko usme thoosh diya "khaufnak chehre kitne, kese kese elzam lagaye" rajniti ka chehra vehad ghinona hota hai.

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

बहुत सटीक और तार्किक विश्लेषण .इस देश में तो वीरसावरकर को भी अंग्रेजों का पिठ्ठू और माफ़ीखोर कहने वाले मौजूद हैं .जबकि उन्होंने आन्दोलन आगे भी ज़ारी रहे इसे ही लक्षित कर काले पानी से अपनी रणनीतिक निकासी करवाई थी .कहने वालों का मुंह कोई बंद कर सका है बाजपाई जी को भी अंग्रेजों का पिठ्ठू प्रचारित करने वाले भकुवे भी यहाँ कई हैं और आर एस एस से तो सारे खौफ खातें हैं उसके सांगठनिक कौशल से आर एस एस भीति से पीड़ित हैं ये तमाम लोग जो वाघा चौकी पे मोमबत्तियां जलाने का ढकोसला करते हैं .ये तमाम पाकिस्तान विचार धारा के लोग हैं जो बुकर इनाम जीतने वालों को गोद में बिठाए रहतें हैं .बढ़िया आलेख के लिए बधाई .कृपया यहाँ भी पधारें -
शनिवार, 25 अगस्त 2012
आखिरकार सियाटिका से भी राहत मिल जाती है .घबराइये नहीं .
गृधसी नाड़ी और टांगों का दर्द (Sciatica & Leg Pain)एक सम्पूर्ण आलेख अब हिंदी में भी परिवर्धित रूप लिए .....http://veerubhai1947.blogspot.com/2012/08/blog-post_25.html

Shanti Garg ने कहा…

very good thoughts.....
मेरे ब्लॉग

जीवन विचार
पर आपका हार्दिक स्वागत है।

SACCHAI ने कहा…

" बहुत ही उम्दा ब्लॉग शलिनी जी और आपने सही कहा है जो विचारणीय है और सच भी है "

कभी यहाँ भी आइये swagat hai aapka

http://eksacchai.blogspot.com

Asha Saxena ने कहा…

अच्छा लेख |
आशा

तदात्मानं सृजाम्यहम् ने कहा…

विडंबना तो यह है कि समझ का ही अभाव है। समझ जिनके पास है, वे सिर्फ आत्मकेंद्रित हैं। जिन्हें समझना चाहिए, वे आंख मूंदे बैठे हैं। मानसिकता ही रुग्ण है, रोग भी कैंसर-सा है। सबकुछ लेकर जाएगा, तब अकल आएगी। सार्थक विषय पर सारगर्भित आलेख। आभार।

surenderpal vaidya ने कहा…

बिल्कुल सही विश्लेशण किया है । धन्यवाद ।

surenderpal vaidya ने कहा…

बिल्कुल सही विश्लेशण किया है । धन्यवाद ।