गुरुवार, 30 अगस्त 2012

कैराना उपयुक्त स्थान :जनपद न्यायाधीश शामली :




जिला न्यायालय के लिए शामली के अधिवक्ता इस सत्य को परे रखकर सात दिन से न्यायालय के कार्य  को ठप्प किये हैं जबकि सभी के साथ शामली इस प्रयोजन हेतु कितना उपयुक्त है वे स्वयं जानते हैं.
             शामली 28 सितम्बर २०११ को मुज़फ्फरनगर से अलग करके  एक जिले के रूप में स्थापित किया गया .जिला बनने से पूर्व शामली तहसील रहा है और यहाँ तहसील सम्बन्धी कार्य ही निबटाये जाते रहे हैं. न्यायिक कार्य दीवानी ,फौजदारी आदि के मामले शामली से कैराना और मुज़फ्फरनगर जाते रहे हैं .
    आज कैराना न्यायिक व्यवस्था  के मामले में उत्तरप्रदेश में एक सुदृढ़ स्थिति रखता है    कैराना में न्यायिक व्यवस्था की पृष्ठभूमि के बारे में बार एसोसिएशन कैराना के अध्यक्ष ''श्री कौशल प्रसाद एडवोकेट ''जी बताते हैं -
                                    
     ''   '' सन १८५७ में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रथम  स्वतंत्रता संग्राम के द्वारा ऐतिहासिक क्रांति का बिगुल बजने के बाद मची उथल-पुथल से घबराये ब्रिटिश शासन के अंतर्गत संयुक्त प्रान्त [वर्तमान में उत्तर प्रदेश ] ने तहसील शामली को सन 1887 में महाभारत काल के राजा कर्ण की राजधानी कैराना में स्थानांतरित कर दिया तथा तहसील स्थानांतरण के दो वर्ष पश्चात् सन १८८९ में मुंसिफ शामली के न्यायालय  को भी कैराना में स्थानांतरित कर दिया .ब्रिटिश शासन काल की संयुक्त प्रान्त सरकार द्वारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश [तत्कालीन संयुक्त प्रान्त ]में स्थापित होने वाले चार मुंसिफ न्यायालयों -गाजियाबाद ,नगीना ,देवबंद व् कैराना है.मुंसिफ कैराना के क्षेत्राधिकार  में  पुरानी तहसील कैराना व् तहसील बुढ़ाना का  परगना कांधला सम्मिलित था .मुंसिफी कैराना में मूल रूप से दीवानी मामलों का ही न्यायिक कार्य होता था .विचाराधीन वादों  की संख्या को देखते हुए समय समय पर अस्थायी अतिरिक्त मुंसिफ कैराना के न्यायालय की स्थापना भी हुई ,परन्तु सन १९७५ के आसपास माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा कैराना में स्थायी अतिरिक्त मुंसिफ कैराना के न्यायालय की स्थापना की गयी .इस न्यायालय के भवन के लिए ९ मार्च सन १९७८ को उच्च न्यायालय इलाहाबाद के प्रशासनिक न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री ह्रदयनाथ सेठ द्वारा भवन का शिलान्यास किया गया .बार एसोसिएशन कैराना  की निरंतर मांग के उपरांत दिनांक ६ मई 1991 को कैराना में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय की स्थापना की गयी .तथा बाद में ४ जनवरी 1993 से कैराना में सिविल  जज सीनियर डिविजन का न्यायालय स्थापित हुआ  २ अप्रैल २०११ में यहाँ ए.डी.जे.कोर्ट की स्थापना हुई .''
ऐसे में राजनीतिक फैसले के कारण शामली को भले ही जिले का दर्जा मिल गया हो किन्तु न्यायिक व्यवस्था के सम्बन्ध में अभी शामली बहुत पीछे है .शामली में अभी कलेक्ट्रेट  के लिए भूमि चयन का मामला भी पूरी तरह से तय नहीं हो पाया है जबकि कैराना में अध्यक्ष महोदय के अनुसार तहसील भवन के नए भवन में स्थानांतरित होने के कारण ,जहाँ १८८७ से २०११ तक तहसील कार्य किया गया वह समस्त क्षेत्र इस समय रिक्त है और वहां जनपद न्यायाधीश के न्यायलय के लिए उत्तम भवन का निर्माण हो सकता है .साथ ही कैराना कचहरी में भी ऐसे भवन हैं जहाँ अभी हाल-फ़िलहाल में भी जनपद न्यायाधीश बैठ सकते हैं और इस सम्बन्ध में किसी विशेष आयोजन की आवश्यकता नहीं है.फिर कैराना कचहरी शामली मुख्यालय से मात्र १० किलोमीटर दूरी पर है ऐसे में यदि हाईकोर्ट ध्यान दे तो शामली जनपद न्यायाधीश के लिए कैराना उपयुक्त स्थान है क्योंकि शामली में अभी भी केवल तहसील कार्य ही संपन्न हो रहे हैं और जनपद न्यायधीश की कोर्ट वहां होने के लिए अभी शामली को बहुत लम्बा सफ़र तय करना है.
               शालिनी कौशिक 
                    [कौशल]
  

6 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बड़े ही रोचक तथ्य..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (01-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

मन्टू कुमार ने कहा…

शामली जिले की आज की दशा को इतिहास के झरोखे से देखना काफी सुखद रहा |

सादर..|

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

http://veerubhai1947.blogspot.com/
सटीक तर्क हैं आपके .दरअसल भारत में बस अड्डा एक से दूसरी जगह पहले चला जाता है निर्माण कार्य वहां बाद में शुरू होता है .कोलोनीज़ बन जातीं हैं सालों बाद नियमित होतीं हैं .इसी तर्क से शामली कोर्ट को देखना मुमकिन न होगा क्योंकि जज साहब खुले खेत में खड़े होके तो जजमेंट नहीं ही देंगे और ये भाडू(वकील को हिंदी में भाडू ही कहतें हैं ,एडवोकेट और प्लीडर PLEADER भी .) ज़रूर मायावती के हडकाए हुए हैं .मैं दिल्ली से देहरादून मसूरी तक इस पूरे क्षेत्र से वाकिफ हूँ .
कृपया यहाँ भी पधारें -
ram ram bhai
शनिवार, 1 सितम्बर 2012
अमरीकियों का स्वान प्रेम और पर्यावरण
अमरीकियों का स्वान प्रेम और पर्यावरण
http://veerubhai1947.blogspot.com/

Anil Singh ने कहा…


Shalini ji, aapne kairana kI LOCATION,RELATIVE LOCATION CONNECTIVY,HISTORICAL BACKGROUND PRASTUT KR, APNI BAT KO BADI MAJBUTI SE RAKHNE KA SAFAL PRAYAS KIYA HAI,

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

इस बाबत राष्ट्री लोकदल की क्या राय है आखिर ये इलाका बागपत बडौत शामली तो उनका ही है ?क्या कहतें हैं ये तमाम लोग इस बेल्ट के ?शुक्रिया आपकी द्रुत टिपण्णी के लिए .



ram ram bhai
शनिवार, 1 सितम्बर 2012
Eat Low , Aim High
Forget the stock market .The glycemic index is the one to know for better health.

यह आलेख हिंदी में ज्यादा विस्तार लिए जल्द आ रहा है .सभी पारिभाषिक शब्दों की व्याख्या सहित .

Buy low sell high .To make money in the stock market ,that is the rule to follow .But there is an index that is even more important ,because it could impact your health for a life time :the glycemic index (GI).Whether you are at risk for Type 2 (ADULT -ONSET DIABETES ) diabetes or already have the disease ,you need to know what the GI is and how to use it as a tool for creating a healthy eating plan .

Research from the Harvard School of Public Health indicates that a diet rich in low glycemic index foods can help prevent diabetes and heart disease.So by limiting your intake of high glycemic index foods ,you may help prevent chronic disease and live a healthier ,longer life .

What is the glycemic index ?

The glycemic index ranks carbohydrates on a scale from 0 to 100 based on how quickly they raise your blood sugar levels after you eat . A food with a glycemic index over 85 ,such as white bread ,raises blood sugar rapidly .Foods with a score below 30 ,such as most vegetables ,take longer to digest and result in a more gradual rise in blood sugar.

संभल जा रे नारी ....

''हैलो शालिनी '' बोल रही है क्या ,सुन किसी लड़की की आवाज़ मैंने बेधड़क कहा कि हाँ मैं ही बोल रही हूँ ,पर आप ,जैसे ही उसने अपन...