गुरुवार, 10 जुलाई 2014

मुकम्मल है वही सम्बन्ध मुहब्बत नींव है जिसकी


तमन्ना जिसमे होती है कभी अपनों से मिलने की
रूकावट लाख भी हों राहें उसको मिल ही जाती हैं ,
खिसक जाये भले धरती ,गिरे सर पे आसमाँ भी
खुदा की कुदरत मिल्लत के कभी आड़े न आती है .
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फ़िक्र जब होती अपनों की समय तब निकले कैसे भी
दिखे जब वे सलामत हाल तसल्ली दिल को आती है ,
दिखावा तब नहीं होता प्यार जब होता अपनों में
मुकाबिल कोई भी मुश्किल रोक न इनको पाती है .
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मुकद्दर साथ है उनके मुक़द्दस ख्याल रखते जो
नहीं मायूसी की छाया राह में आने पाती है ,
मुकम्मल है वही सम्बन्ध मुहब्बत नींव है जिसकी
महक ऐसे ही रिश्तों की सदा ये सदियाँ गाती हैं .
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खोलती है अपनी आँखें जनम लेते ही नन्ही जान
फ़ौज वह नातेदारों की सहमकर देखे जाती है,
गोद माँ की ही देती है सुखद एहसास वो उसको
जिसे पाकर अनजानों में सुकूँ से वो सो पाती है .
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नहीं माँ से बड़ा नाता मिला इस दुनिया में हमको
महीनों कोख में रखकर हमें दुनिया में लाती है ,
जिए औलाद की खातिर ,मरे औलाद की खातिर
मुसलसल कायनात शिद्दत से माँ के नग़मे गाती है .
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जहाँ में माँ का नाता ही बिना मतलब जो देता साथ
कभी न माँ की आँखों पर लोभ की बदली छाती है ,
भले ही दीवारें ऊँची खड़ी हों उसकी राहों में
कभी औलाद से मिलना न उसका रोक पाती हैं .
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''शालिनी ''ने यहाँ देखे तमाम नाते रिश्तेदार
बिना मतलब किसी को ना किसी की याद आती है ,
एक ये माँ ही होती है करे महसूस दर्द-ए-दिल
इधर हो मिलने की हसरत उधर हाज़िर हो जाती है .
..............................................................
शालिनी कौशिक
       [कौशल ]






9 टिप्‍पणियां:

Anita ने कहा…

खूबसूरत सतरें और जज्बात..

Smita Singh ने कहा…

मन के भाव लिख दिए आपने ...

रविकर ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति-
आभार आपका-

रविकर ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति-
आभार आपका-

देवदत्त प्रसून ने कहा…

रचना में एक कल्याणकारी भावना है !

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (12-07-2014) को "चल सन्यासी....संसद में" (चर्चा मंच-1672) पर भी होगी।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (12-07-2014) को "चल सन्यासी....संसद में" (चर्चा मंच-1672) पर भी होगी।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

आशीष भाई ने कहा…

बढ़िया लेखन , शालिनी जी धन्यवाद !
I.A.S.I.H - ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

Pratibha Verma ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति।