मंगलवार, 1 जुलाई 2014

औरत को जूती पैर की ही माने आदमी


औरत पे ज़ुल्म हो रहे कर रहा आदमी
सच्चाई को कुबूलना ये चाहते नहीं ,
गैरों के कंधे थामकर बन्दूक चलना
ये कर रहे हैं काम मगर मानते नहीं !
.........................................................
औरत को जूती पैर की ही माने आदमी
सम्मान देने रोग मान पालते नहीं ,
ये चाहें इसपे बस हुक्म चलाना
 करना भला इसका कभी विचारते नहीं !
..........................................................
औरत लुटा दे मर्द पर भले ही ज़िंदगी
वे रहते हैं कभी किसी मुगालते नहीं ,
खिदमत हमारी करना औरत की है किस्मत
करना है कुछ उसके लिए ये जानते नहीं !
..............................................................
जनम-जनम का साथ है पत्नी पति का मांगती
ये पत्नी को दिल में कभी उतारते नहीं ,
चाह रखके बेटों की ये बेटियां हैं मारती
ये बुराई तक माँ के लिए हैं मारते नहीं !
.............................................................
''शालिनी ''की तड़प का है ना सबूत कोई
अपने किये को ये कभी धिक्कारते नहीं ,
बेटी हो या बहन हो ,ये पत्नी हो या माँ हो
अपने को किसी हाल ये सुधारते नहीं !
...................................................................
शालिनी कौशिक
       [कौशल ]

5 टिप्‍पणियां:

Dilbag Virk ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 03-07-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1663 में दिया गया है
आभार

Prasanna Badan Chaturvedi ने कहा…

बेहद उम्दा रचना और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
नयी पोस्ट@दर्द दिलों के
नयी पोस्ट@बड़ी दूर से आये हैं

रश्मि शर्मा ने कहा…

बहुत सही लि‍खा आपने..

dr.mahendrag ने कहा…

सुन्दर कृति , पर अब यह सिलसिला ज्यादा दिन चलने वाला नहीं , अब आदमी को सुधरना ही होगा

Suman ने कहा…

बहुत कुछ बदल रहा कुछ बदलना बाकी है
सार्थक रचना !

शत शत नमन शंकर दयाल शर्मा जी को

विकिपीडिया से साभार   आज जन्मदिन है देश के  नौवें राष्ट्रपति  डाक्टर शंकर दयाल शर्मा जी का और वे सदैव मेरे लिए श्रद्धा के पात्र रहेंगे...