कब मिलेगा फरीदा को न्याय


मकान में उतरा करंट, फुफेरी बहन झुलसी, लोगों ने जाम लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
खतौली। बरसात के दौरान अचानक हाईटेंशन लाइन का करंट मकान में दौड़ जाने से मासूम बालक की मौत हो गई, जबकि उसकी फुफेरी बहन झुलस गई। बालक की मौत से गुस्साए लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ हंगामा कर प्रदर्शन किया और शव को सड़क पर रख कर जाम लगा दिया। सूचना पर पहुंचे एसडीएम और सीओ ने परिजनों और लोगों को समझा बुझाकर जाम खुलवाया।
बालाजीपुरम निवासी विनोद पुत्र प्रकाश के मकान के पास से ही हाईटेंशन लाइन जा रही है, जिसकी एंगल दीवार पर ही लगा रखी है। मंगलवार दाेपहर करीब एक बजे बरसात के दौरान अचानक हाईटेंशन लाइन के एंगल पर लगा इंसुलेटर फट गया और करंट मकान में फैल गया। इस दौरान विनोद का चार साल का बेटा मानू जीने पर खेल रहा था, जिसकी करंट से मौत हो गई।
जबकि उसकी फुफेरी बहन बबीता झुलस गई। बालक की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना पर माेहल्ले वालों की भीड़ एकत्र हो गई। फोन करके आपूर्ति बंद कराई गई। लोगों ने बिजली वालों के खिलाफ हंगामा करते हुए शव को इंदिरा मूर्ति के पास सड़क पर रख कर जाम लगा दिया। करीब पौने चार बजे एसडीएम वैभव शर्मा, सीओ डीके मित्तल, इंस्पेक्टर गजेंद्र सिंंह मौके पर पहुंचे और पीड़िताें को उचित मुआवजा दिलवाने, इस लाइन हटवाने का आश्वासन देकर लोगों को शांत किया। तब पुलिस ने बालक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। बच्चे की मां लता ने बिजली विभाग के खिलाफ तहरीर दी है।[[अमर उजाला से साभार ]
अब बात फरीदा की 
अभी पिछले दिनों की बात है एक महिला बेगम फरीदा पत्नी मोहम्मद महबूब ,इस्लाम नगर, कांधला [शामली ] मेरे पास एक शपथपत्र बनवाने के लिए आई .जब उसके उसमे दस्तखत की बात आई तो उसने उसमे अंगूठा लगाने की बात की तो मैंने उसे उसमे बाएं हाथ का अंगूठा लगाने को कहा क्योंकि कानूनी दस्तावेजों में बायें हाथ के अंगूठे को ही प्रामाणिक माना जाता है ,तब वह कहने लगी कि उसके बायाँ हाथ ही है  तब मेरा ध्यान उसके चुन्नी से ढके हुए हाथ पर गया जो कि कटा हुआ था ,मैंने पूछा कि यह कैसे कटा तब वह कहने लगी कि हाईटेंशन लाइन का तार गिर गया था ,मैंने देखा कि उसके पैर की  उँगलियाँ भी सब ऐसे जुड़ गयी थी कि वे कभी अलग थी ऐसा कोई नहीं कह सकता था .मैंने उससे पूछा कि ये कब हुआ तो उसने कहा कि 20-21 साल हो गए हैं  ,तब मैंने पूछा कि तुम्हें कोई मुआवज़ा मिला तब वह कहने लगी कि सब जगह जाकर देख लिया अपने ही पैसे खर्च हो गए मिला एक रुपया भी नहीं .
    अब ऐसे में जब आज तक फरीदा ही न्याय के लिए भटक भटककर थक हारकर अपने घर बैठ चुकी है तब बबीता  के लिए न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

शालिनी कौशिक 
    [कौशल ]

टिप्पणियाँ

रविकर ने कहा…
आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति आज शनिवासरीय चर्चा मंच पर ।।
Smita Singh ने कहा…
यही सच है इस सभ्य समाज और लोकतंत्र का
Rohitas ghorela ने कहा…
बड़ा दुःख होता है

जो हो गया उस पर किसी का जोर नहीं है

पर इसका इलाज केवल जागरूकता है.. जिससे समय रहते सरकारी कर्मचारियों को चेताया जाये.
Anita ने कहा…
बिजली विभाग को मुआवजा जल्द से जल्द देना चाहिए..आपकी पहल सार्थक है
कविता रावत ने कहा…
बिडम्बना है यह हमारी तंत्र की ..चक्कर काट काट कर साधारण इंसान इंतना परेशान हो जाता है उसे लगने लगता है उससे कोई बहुत बड़ी भूल हो गयी ..
आपकी आवाज रंग लाये यही दुवा है ..
कविता रावत ने कहा…
बिडम्बना है यह हमारी तंत्र की ..चक्कर काट काट कर साधारण इंसान इंतना परेशान हो जाता है उसे लगने लगता है उससे कोई बहुत बड़ी भूल हो गयी ..
आपकी आवाज रंग लाये यही दुवा है ..

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