मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

जानते भी हो दिल क्या होता है-----शाहिद

सैफ़ी  सिरोजी की एक ग़ज़ल की पंक्तियाँ कहती हैं-
"उम्र भर करता रहा हर शख्स पर मैं तबसरे,
झांक कर अपने गिरेबाँ में कभी देखा नहीं."
       मुझे इस वक़्त ये पंक्तियाँ पूर्ण रूप से पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के    कप्तान ''शाहिद आफरीदी ''पर अक्षरश :   खरी उतरती प्रतीत हो रही हैं क्योंकि एक ऐसे देश के नागरिक होते हुए ,जिसने कई बार एक ऐसे देश पर आक्रमण किये जिसने हमेशा उसे छोटे भाई का दर्जा दिया और उसकी गुस्ताखियों को नजरंदाज करते हुए उसे सुधरने का अवसर दिया है,वे तंग दिल का ठीकरा उसी बड़े दिल वाले भारत पर ठोक रहे हैं दिल जैसी शै से शायद वे अनजान हैं क्योंकि दिल जिस उदारता का परिचायक है वह उदारता पाकिस्तानी खिलाडियों के व्यवहार में कहीं से लेकर कहीं तक भी दृष्टिगोचर नहीं होती .भारत वह देश है जिसका रिकोर्ड है कि उसने आज तक भी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया है वह हमेशा से दुश्मनों से अपने बचाव के   लिए ही हथियार जुटाता रहा है क्योंकि भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता है और इस सोने की चिड़िया को लूटने विश्व भर के यहाँ जुटे रहे और यहाँ की धरती को रक्त रंजित करते रहे ऐसे देश ने हमेशा दोस्तों का साथ दिया है और दुश्मनों का मुहं तोडा है.ऐसे में भारतीयों को तंगदिल कहना शाहिद के   दिमागी तनाव का ही परिचायक है.शाहिद स्वयं कितने दिलदार हैं इसका पता तो सचिन के   शतक को लेकर उनके कथन से ही जाहिर है हालाँकि बाद में वे उस कथन से अपना पल्ला झाड़ चुके हैं किन्तु जो बात मुहं से निकल चुकी है उसे वे चाह कर भी वापस नहीं   ले सकते .मीडिया के   बारे में वे कुछ न ही बोलें तो बेहतर है क्योंकि ये मीडिया ही है जो गलत को गलत और सही को सही का आईना   दिखाता है और पाकिस्तान में क्रिकेट खिलाडियों के  हालिया हाल से भारतीय जनता को रू-ब-रू करता है.यह  पाकिस्तानियों की  दिलदारी ही है जो भारत पाकिस्तान के मैच को जोश व् जूनून से देखने का माद्दा  तैयार करती है और यह भारतीयों की तंगदिली ही है जो किसी के भी कुछ कहने को सिरे से नकार देती है और अपनी दोस्ती में आड़े नहीं आने देती-
"अरफान ज़माने की आदत है बुरा कहना,
है अपनी तबियत के नासाज़ नहीं होती.''

16 टिप्‍पणियां:

akhtar khan akela ने कहा…

shalaini ji jo dil todte hen voh dil ki ahmiyt kiya jaane. akhtar khan akela kota rajsthan

akhtar khan akela ने कहा…

शालिनीं बहन दिल तोड़ने वाले दिल का सोडा करने वाले दिल की भावनाओं का अपमान करने वाले क्या जाने दिल क्या चीज़ हे दिल तो उमराव जान का था जिसने दिल बचाए रखने के लियें कहा था दिल चीज़ क्या हे आप मेरी जान लीजिये . अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

mujhe to lagta hai afridi ne pahle apne dil se byan diya...par dusra byan uski majboori thi.........as a pakistani...to hame unhe maaf karna hoga...kyonki unko rahna to pakistan me hi hai..:)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बढ़िया विश्लेषण!

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

आप अच्छा लिखती हैं.
आज आपके ब्लॉग का लिंक 'ब्लॉग कि ख़बरें' ब्लॉग पर लगाया जा रहा है .
http://blogkikhabren.blogspot.com/

सारा सच ने कहा…

nice कृपया comments देकर और follow करके सभी का होसला बदाए..

देवेन्द्र ने कहा…

जी शालिनी जी, हमें स्वयं और अपने देश की शालीनता और गौरवमयी परम्परा पर सदा गर्व व सम्मान की अनुभूति होती है।

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

:) Zabardast.... Steek hai aalekh ki har pankti....

दिगम्बर नासवा ने कहा…

"अरफान ज़माने की आदत है बुरा कहना,
है अपनी तबियत के नासाज़ नहीं होती.''

Aina dikha diya hai aapne Shahid ko ... bahut hi shaaleenta se ...

आशा ने कहा…

अच्छे लेखन के लिए बधाई |
आशा

आकाश सिंह ने कहा…

दिल का हाल सुने दिलवाले... जो न सुने वो जाओ जाकर अपना कहीं घर बसाले.... क्या कर सकते हैं इसमें जबरदस्ती वाली बात तो होती नही है -- शालिनी दीदी

ड़ा.योगेन्द्र मणि कौशिक ने कहा…

बहुत- बहुत बधाई व शुभकामनाऐं.....! बहुत अच्छा लिखा है......!

सागर नाहर ने कहा…

कौआ जब भी मुँह खोलेगा काँव-काँव ही करेगा। कोयल से गीत की उम्मीद कौए से करना बेमानी है।
:)

mahendra verma ने कहा…

आपकी व्याख्या सटीक है।

दीप ने कहा…

बहुत सुन्दर शालिनी जी बहुत सुन्दर लेख है आप का
बहुत बहुत शुभकामना

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति बधाई शालिनी जी