शुक्रवार, 23 नवंबर 2012

माँ को कैसे दूं श्रद्धांजली ,

माँ तुझे सलाम


वो चेहरा जो
        शक्ति था मेरी ,
वो आवाज़ जो
      थी भरती ऊर्जा मुझमें ,
वो ऊँगली जो
     बढ़ी थी थाम आगे मैं ,

वो कदम जो
    साथ रहते थे हरदम,
वो आँखें जो
   दिखाती रोशनी मुझको ,
वो चेहरा
   ख़ुशी में मेरी हँसता था ,
वो चेहरा
   दुखों में मेरे रोता था ,
वो आवाज़
   सही बातें  ही बतलाती ,
वो आवाज़
   गलत करने पर धमकाती ,

वो ऊँगली
   बढाती कर्तव्य-पथ पर ,
वो ऊँगली
  भटकने से थी बचाती ,
वो कदम
   निष्कंटक राह बनाते ,
वो कदम
   साथ मेरे बढ़ते जाते ,
वो आँखें
   सदा थी नेह बरसाती ,
वो आँखें
   सदा हित ही मेरा चाहती ,
मेरे जीवन के हर पहलू
   संवारें जिसने बढ़ चढ़कर ,
चुनौती झेलने का गुर
     सिखाया उससे खुद लड़कर ,
संभलना जीवन में हरदम
     उन्होंने मुझको सिखलाया ,
सभी के काम तुम आना
    मदद कर खुद था दिखलाया ,

वो मेरे सुख थे जो सारे
   सभी से नाता गया है छूट ,
वो मेरी बगिया की माली
   जननी गयी हैं मुझसे रूठ ,
गुणों की खान माँ को मैं
    भला कैसे दूं श्रद्धांजली ,
ह्रदय की वेदना में बंध
    कलम आगे न अब चली .
           शालिनी कौशिक
                [कौशल ]

8 टिप्‍पणियां:

सदा ने कहा…

भावमय करते शब्‍दों का संगम ...

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

गुणों की खान माँ को मैं
भला कैसे दूं श्रद्धांजली ,
ह्रदय की वेदना में बंध
कलम आगे न अब चली,,,

बहुत सुंदर उत्कृष्ट रचना,,,

recent post : प्यार न भूले,,,

kshama ने कहा…

aankhen nam kar gayee ye rachana.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

नमन, गहरी रचना..

MANU PRAKASH TYAGI ने कहा…

बढिया रचना

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' ने कहा…

man ko udwelit karti rachna .aabhar
सुन्दर व् सार्थक अभिव्यक्ति .आभार
हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

bahut utkrisht.
mamatva se paripurn...

रविकर ने कहा…

सादर नमन |
माँ सबसे प्रिय शब्द -