न बदल पाएगा.............

orange rosesbouquet of spring roses 1


   न बदल पायेगा तकदीर तेरी कोई और ,
      तेरे हाथों में ही बसती है तेरी किस्मत की डोर ,
   अगर चाहेगा तो पहुंचेगा तू बुलंदी पर 
      तेरे जीवन में भी आएगा तरक्की का एक दौर .


तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने ,
    दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी .
 जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत ,
      कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .


तकदीर बनाने के लिए सुनले मेहरबां,
     दिल में जीतने का हमें जज्बा चाहिए .
छूनी है अगर आगे बढ़के तुझको बुलंदी 
      क़दमों में तेरे जोश और उल्लास चाहिए .


मायूस होके रुकने से कुछ होगा न हासिल ,
    उम्मीद के चिराग दिल में जलने चाहियें .
चूमेगी कामयाबी आके माथे को तेरे 
     बस इंतजार करने का कुछ सब्र चाहिए .


क्या देखता है बार-बार हाथों को तू अपने ,
   रेखाओं में नहीं बसती है तकदीर किसी की .
गर करनी है हासिल तुझे जीवन में बुलंदी 
   मज़बूत इरादों को बना पथ का तू साथी .

             शालिनी कौशिक 

                    [कौशल]

टिप्पणियाँ

Anita saini ने कहा…
जी नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार(२४-०२-२०२०) को 'स्वाभिमान को गिरवी रखता'(चर्चा अंक-३६२१) पर भी होगी।
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
आप भी सादर आमंत्रित है
….
अनीता सैनी
Rakesh Kaushik ने कहा…
प्रशंसनीय

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