शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज जी को कांधला शामली से मिला समर्थन
उत्तर प्रदेश के शामली जिले का प्रमुख कस्बा कांधला, जो कि आरम्भ से धर्मनगरी के रूप में विख्यात रहा है, महाभारत काल में महाराज कर्ण के दल के ठहरने के स्थल होने के कारण इसका नाम कर्णदला पड़ा जो कि कालांतर में कांधला के नाम से विश्व विख्यात हुआ. कांधला कस्बे की विशेषता यह है कि इसके चारों कोनों पर शिवालय स्थापित हैँ. जहाँ इसके उत्तर में वर्ष 1800 ईस्वी से पुरसी वाड़ा पंजाब से आये पंडित रामचंद्र के तीन पुत्रों हकीम शिवनाथ, पंडित शिवप्रसाद और पंडित शिवसिंह जी ने सिद्धपीठ पुश्तैनी शिवालय अंदोसर मंदिर कांधला की स्थापना की, वहीं इसके दक्षिण और पश्चिम में मराठो द्वारा मराठा वाला मंदिर और नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की गई और पूर्व में प्राचीन सूरजकुण्ड मंदिर भी शिव के पवित्र शिवालय के रूप में विख्यात है. आरम्भ से साधु संतों का कांधला नगरी में आगमन होता रहा और कांधला के सनातन धर्मावलंबियों द्वारा रात दिन उनकी आवभगत सेवा सत्कार में एक कर दिया गया.शिवाला हकीम शिवनाथ अंदोसर मंदिर कांधला की तो पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रसिद्धि ही साधु संतों के स्वागत हेतु स्थापित मुसाफिरखानों औ...