अब गैस भी साथ छोड़ गई -लघुकथा
और बाउजी कैसे हो.......... संजय के मुंह से ये सुनते ही नरेंद्र बाउजी के दिल का गुबार सा फूट पड़ा..... एकदम बोले
"अब तक ठीक थे."
क्यूँ! अब क्या हुआ? संजय ने पूछा
कुछ नहीं भाई, खाने के लाले पड़ गए -लगभग रोते हुए बाउजी बोले.
क्यूँ! बिजनेस में घाटा हो गया क्या -संजय ने चिंतित होते हुए पूछा.
अरे नहीं! गैस खत्म हो गई -बाउजी ने बताया.
तो इतना दुखी क्यूँ हो? ये चिंता तो भाभीजी की है ना. मैं मानता हूँ कि आप घर के आदमी हो इसलिए सामान लाना आपकी जिम्मेदारी है, पर गैस तो भोजन, चाय आदि बनाने के काम आती है और ये काम भाभीजी का होने के कारण ये उनकी समस्या है -संजय ने बाउजी को थोड़ी राहत की सांस दिलाने के लिए कहा.
नहीं संजय भाई! शुरू से घर का खाने आदि का काम मैं ही देखता आया हूँ, तेरी भाभीजी को तो अपने क्लब, किटी पार्टी से ही कभी फुर्सत नहीं रही, बस राहत यह थी कि गैस पर आराम से काम कर लेता था..... पर अब गैस भी साथ छोड़ गई-माथा पकड़ते हुए बाउजी बोले.
अब संजय के पास पिछली गली से खिसकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था.
द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली )

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