रविवार, 14 दिसंबर 2014

ये तन्हाई ......संजीदगी सिखाती है.





ये जिंदगी तन्हाई को साथ लाती है,
   हमें कुछ करने के काबिल बनाती  है.
सच है मिलना जुलना बहुत ज़रूरी है,
     पर ये तन्हाई ही हमें जीना  सिखाती है.

यूँ तो तन्हाई भरे शबो-रोज़,
          वीरान कर देते हैं जिंदगी.
उमरे-रफ्ता में ये तन्हाई ही ,
        अपने गिरेबाँ में झांकना सिखाती है.

मौतबर शख्स हमें मिलता नहीं,
     ये यकीं हर किसी पर होता नहीं.
ये तन्हाई की ही सलाहियत है,
     जो सीरत को संजीदगी सिखाती है.
        शालिनी कौशिक 

14 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवार के - चर्चा मंच पर ।।

Digamber Naswa ने कहा…

सच है तन्हाई जरूरी है जिंदगी में ... खुद को देखने के लिए ...

Anita ने कहा…

ये तन्हाई की ही सलाहियत है,
जो सीरत को संजीदगी सिखाती है.

सही कहा है

शारदा अरोरा ने कहा…

सच कहा शालिनी जी ,तन्हाई से ही हमें सीख मिलती है ,रुक कर जरा अपने साथ भी हम रह लेते हैं ...

Kavita Rawat ने कहा…

तन्हाई में खूब अनुभव कराती है ...
बहुत सुन्दर प्रस्तुति

Kavita Rawat ने कहा…

तन्हाई में खूब अनुभव कराती है ...
बहुत सुन्दर प्रस्तुति

मन के - मनके ने कहा…


सत्य—तन्हाई आयना है खुद का.
दूसरों की पहचान से पहले अपनी पहचान
जरूरी है.

मन के - मनके ने कहा…


सत्य—तन्हाई आयना है खुद का.
दूसरों की पहचान से पहले अपनी पहचान
जरूरी है.

मन के - मनके ने कहा…


सत्य—तन्हाई आयना है खुद का.
दूसरों की पहचान से पहले अपनी पहचान
जरूरी है.

dr.mahendrag ने कहा…

ये जिंदगी तन्हाई को साथ लाती है,
हमें कुछ करने के काबिल बनाती है.
सच है मिलना जुलना बहुत ज़रूरी है,
पर ये तन्हाई ही हमें जीना सिखाती है
सुन्दर अभिव्यक्ति
यह क्यों भूलें कि सिखाने के लिए तन्हाई का का अपना अलग अंदाज होता है

Author Sarik khan ने कहा…

Waaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah

Author Sarik khan ने कहा…

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Author Sarik khan ने कहा…

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