रविवार, 28 दिसंबर 2014

मेहसाना पोलिस व् प्रधानमंत्री मोदी प्रशंसा के हक़दार

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भारत वर्ष में सत्ता सभी ओर हावी है किन्तु कानून आज भी सत्ता से ऊपर है और ये दिखाई दिया है एक बार फिर जब मेहसाना पोलिस ने प्रधानमंत्री की पत्नी जशोदा बेन द्वारा मांगी गयी जानकारी को इसलिए देने से मना कर दिया कि यह जानकारी स्थानीय अन्वेषण ब्यूरो से सम्बंधित है और यह सूचना के अधिकार अधिनियम में छूट प्राप्त है .
   भारत में राजनीतिज्ञ अपनी बात ऊपर रखते है और बड़े से बड़ा अधिकारी भी उनके इस दबाव के सामने नतमस्तक हो जाता है क्योंकि उसकी नौकरी खतरे में पड़ जाती है इसलिए ऐसे में वह अधिकारी और वह राजनीतिज्ञ सम्मान के अधिकारी होते हैं जो अपनी नौकरी की चिंता नहीं करते और कानून के अनुसार ही कार्य करते हैं और वे राजनीतिज्ञ भी जो अपनी बात के काटने पर कानून के आगे अपने अहम को नहीं लाते और इसीलिए किरण बेदी और श्रीमती इंदिरा गांधी दोनों ही सम्मान की अधिकारी हुई थी जब किरण बेदी ने इंदिरा गांधी की गाड़ी के गलत पार्किंग पर उनकी गाड़ी का चालान किया था और इंदिरा गांधी ने भी उन्हें उनके सही काम के लिए शाबासी दी थी ऐसे ही अब मेहसाना पोलिस सम्मान की पात्र है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जिनकी पत्नी के आवेदन को निरस्त किये जाने पर भी वे अपने अहम बीच में नहीं ला रहे पर यह स्थिति तब है जब प्रधानमंत्री जी द्वारा अपनी पत्नी को पत्नी का दर्जा या कहें कि पत्नी का सम्मान नहीं दिया जाता इसलिए यह प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पत्नी को पत्नी का सम्मान देते तब भी क्या यही  मेहसाणा पोलिस यही जवाब देती ,फिलहाल जो भी है मेहसाना पोलिस व् प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मान व् प्रशंसा के हक़दार हैं .
शालिनी कौशिक
    [कौशल ]

3 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (29-12-2014) को पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Kavita Rawat ने कहा…

प्रेरक प्रस्तुति ..

jyoti dehliwal ने कहा…

क़ानून की नज़रों मे सभी बराबर ही होना चाहिए.सुंदर प्रस्तुति.

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