ये ''कामवालियां'' ही-- करवाएं राज़ .



Woman in depression - stock photo
लड़ती हैं
खूब झगड़ती हैं
चाहे जितना भी
दो उनको
संतुष्ट कभी नहीं
दिखती हैं
खुद खाओ
या तुम न खाओ
अपने लिए
भले रसोईघर
बंद रहे
पर वे आ जाएँगी
लेने
दिन का खाना
और रात का भी
मेहमानों के बर्तन
झूठे धोने से
हम सब बचते हैं
मैला घर के ही लोगों का
देख के नाक सिकोड़ते हैं
वे करती हैं
ये सारे काम
सफाई भेंट में हमको दें
और हम उन्हीं को 'गन्दी 'कह
अभिमान करें हैं अपने पे
माता का दर्जा है इनका
लक्ष्मी से इनके काम-काज
ये ''कामवालियां'' ही हमको
रानी की तरह करवाएं राज़ .
.....................
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

टिप्पणियाँ

Asha Saxena ने कहा…
सत्य उजागर करती रचना |
Madan Mohan Saxena ने कहा…
भावपूर्ण प्रस्तुति.बहुत शानदार
कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

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