बुधवार, 1 दिसंबर 2010

sahi kaha na.....

कहते हैं नेता यहाँ ,
   बढ़ने ना देंगे आतंकवाद.
एक ही संकल्प है उनका,
   फिर भी आपस में है विवाद.
आपस में गर लड़ना छोड़ें,
    और ख़त्म करें ये दलवाद.
तो मिल सकता है दुनिया को,
   सुरक्षा का शांतिपूर्ण स्वाद.

8 टिप्‍पणियां:

shikha kaushik ने कहा…

bilkul sahi kaha aapne .full support to your view .please visit my blog ''earthly heaven '

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

यह मुक्तक तो बहुत बढ़िया रहा!
--
आपने बहुत सही कहा!

डॉ. नूतन - नीति ने कहा…

आपकी रचना बहुत अच्छी लगी .. आपकी रचना आज दिनाक ३ दिसंबर को चर्चामंच पर रखी गयी है ... http://charchamanch.blogspot.com

mahendra verma ने कहा…

सार्थक संदेश देती हुई सुंदर रवना...बधाई।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सही सन्देश देती रचना ..

वन्दना ने कहा…

बहुत सुन्दर संदेश देती सार्थक रचना।

अनुपमा पाठक ने कहा…

सन्देशपूर्ण!!!

केवल राम ने कहा…

बहुत सुंदर और सार्थक सन्देश ...शुक्रिया
चलते - चलते पर आपका स्वागत है

काश ऐसी हो जाए भारतीय नारी

चली है लाठी डंडे लेकर भारतीय नारी , तोड़ेगी सारी बोतलें अब भारतीय नारी . ................................................ बहुत दिनों ...