sahi kaha na.....

कहते हैं नेता यहाँ ,
   बढ़ने ना देंगे आतंकवाद.
एक ही संकल्प है उनका,
   फिर भी आपस में है विवाद.
आपस में गर लड़ना छोड़ें,
    और ख़त्म करें ये दलवाद.
तो मिल सकता है दुनिया को,
   सुरक्षा का शांतिपूर्ण स्वाद.

टिप्पणियाँ

shikha kaushik ने कहा…
bilkul sahi kaha aapne .full support to your view .please visit my blog ''earthly heaven '
यह मुक्तक तो बहुत बढ़िया रहा!
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आपने बहुत सही कहा!
आपकी रचना बहुत अच्छी लगी .. आपकी रचना आज दिनाक ३ दिसंबर को चर्चामंच पर रखी गयी है ... http://charchamanch.blogspot.com
mahendra verma ने कहा…
सार्थक संदेश देती हुई सुंदर रवना...बधाई।
सही सन्देश देती रचना ..
वन्दना ने कहा…
बहुत सुन्दर संदेश देती सार्थक रचना।
अनुपमा पाठक ने कहा…
सन्देशपूर्ण!!!
केवल राम ने कहा…
बहुत सुंदर और सार्थक सन्देश ...शुक्रिया
चलते - चलते पर आपका स्वागत है

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