बुधवार, 15 दिसंबर 2010

ऐसी कामना कर जायेंगे....

पुष्प समान समझ कर तुमको,
   सुगंध तुम्हारी बन जायेंगे.
जग में गर खो दिया जो तुमको,
   शायद कुछ ना पा पाएंगे.
मस्त हवा सा चलना तेरा,
   अपलक मुझको देखना तेरा.
तेरे हस्त को ना छू पाए,
   क्या फिर कुछ हम छू पाएंगे.
ये जीवन है एक कठपुतली,
   चलना इसका हाथ में तेरे.
तुमने हाथ जो नहीं हिलाए,
    कैसे फिर हम चल पाएंगे.
नहीं जानते तेरे मन को,
   क्या देखा है तुमने सपना.
तेरा फिर भी पूर्ण स्वप्न हो ,
   ऐसी कामना कर जायेंगे.

10 टिप्‍पणियां:

Sunil Kumar ने कहा…

तेरे हस्त को ना छू पाए .............क्या बात है यह पंक्तियाँ अच्छी लगी

Akhtar Khan Akela ने कहा…

bhn shaalini ji aapne mujhe tippni se nvaaza shukriyaa aapke blog pr aakr achchaa lga aap vkalat smaj sevikaa ke sath saath lekhn or zordaar dil ki ghraiayon ko chhune vala lekhn ka kaam kr rhi he mubark ho meraa blog akhtarkhanakela.blogpot.com he kbhi kotaa se mutalliq koi kaam huaa to btaaiye zrur abhi hmne aapke shhsr k vkil aek klem ke mamale men dhundhe the fir hmari parti ne hi kisi surendr ji ko kiya he . akhtar khan akela kota rajsthan

Asha ने कहा…

बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति |बहुत बहुत बधाई मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आभार
आशा

daanish ने कहा…

तेरा फिर भी पूर्ण स्वप्न हो ,
ऐसी कामना कर जायेंगे.

समर्पण भाव से भरपूर
विचारणीय कृति ...

चन्दन कुमार ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत और लाजवाब...दिल की गहराइयों को छूती ये पंक्तियाँ बहुत ही गहरी बातें कहती हैं...

mahendra verma ने कहा…

नहीं जानते तेरे मन को,
क्या देखा है तुमने सपना।
तेरा फिर भी पूर्ण स्वप्न हो,
ऐसी कामना कर जायेंगे।

भावनाओं की सुंदर अभ्व्यिक्ति। आपकी रचना ने मन को प्रभावित किया...शुभकामनाएं।

shalini kaushik ने कहा…

suni ji,akhtar ji aasha ji danish ji,chandan ji,mahendra ji mere utsahverdhan hetu dhanyawad.aap bhavishay me bhi mera isi prakar utsahverdhan v margdarshan karenge isi aasha ke sath main aap sabhi ka ek bar phir aabhar vyakt karti hoon...

Dr Om Prakash Pandey ने कहा…

samvedana kee gahraaiyon se
nikalee huyee ye kavita ek shubhra kumudini kee tarah kisi chaand ko dekhatee hai . is chaahat mein ek asar hai ..jabardasht !

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

सुन्दर भाव व अभिव्यक्ति----

हां आपकी कविताओं में मात्रा दोष होता है...समान पन्क्तियों में समान मात्रायें रखें बस लय गति ठीक रहेगी जैसे----जग में गर खो दिया जो तुमको,-- गर और जो समानार्थी हैं अतः दोनों का प्रयोग महीं करना है...

देवेन्द्र ने कहा…

प्रिय शालिनी जी,

नहीं जानते तेरे मन को,
क्या देखा है तुमने सपना.
तेरा फिर भी पूर्ण स्वप्न हो ,
ऐसी कामना कर जायेंगे.

बडी ही सुन्दर व भावपूर्ण पंक्तियाँ हैं। साधुवाद ।