गुरुवार, 27 जनवरी 2011

आदमी क्या है....

आदमी क्या है एक खिलौना है,
जीवन में हँसना कम अधिक रोना है.
    खुशियाँ मिलती हैं कभी कभी ,
संग दुःख लाती हैं तभी तभी.
   खुशियाँ आयें या ना आयें,
दुःख के पड़ जाते हैं साये.
   दुःख अपना प्यारा साथी है,
निरंतर साथ निभाता है,
   खुशियाँ बुलाने पर भी ना आयें.
दुःख आ जाता बिन बुलाये.
   दुःख में विधि को हम याद करें,
सुख में इसका ना ध्यान करें.
   जो सुख में इसका ध्यान करें,
तो दुःख हम सब पर कैसे पड़े.
   गलती हम करते जाते हैं,
पर स्वीकार ना करते कभी.
  इस कारण ही तो ऐसा है,
पड़ जाते जल्दी दुःख सभी.
  दुखों की परम परंपरा है,
सुख तो एक व्यर्थ अप्सरा है.
  दुखों की ही हर पल सोचें,
सुखों का कभी ना ध्यान करें.

3 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

अच्छा प्रयास, शुभकामनाएँ.

ali ने कहा…

दुःख और सुख की बैलेंस शीट बनाना दुष्कर कार्य है ! हिस्से में कितना दुःख और कितना सुख आया यह तो भुक्तभोगी ही बतला सकता है !

भले ही अजीब लगे पर मेरा दुःख किसी के लिए सुख और मेरा सुख उसका दुःख भी हो सकता है :)
है ना ?

बहरहाल सुख और दुःख बेहद गम्भीर विषय हैं और जीवन का यथार्थ भी ! आपने अच्छा प्रयास किया !

: केवल राम : ने कहा…

जीवन में हँसना कम अधिक रोना है.


यह तो नियति है ..लेकिन जीवन फिर भी चलता रहता है ....आपका आभार ...इस सार्थक रचना के लिए ...शुक्रिया

समीक्षा - "ये तो मोहब्बत नहीं" - समीक्षक शालिनी कौशिक

समीक्षा -  '' ये तो मोहब्बत नहीं ''-समीक्षक शालिनी कौशिक उत्कर्ष प्रकाशन ,मेरठ द्वारा प्रकाशित डॉ.शिखा कौशिक 'नूतन...