मंगलवार, 4 जनवरी 2011

khil jayega ye jeevan

मस्त बहारें छाने लगती हैं अनचाहे जीवन में,
खुशियाँ हजारों बस जाती हैं चुपके से मेरे मन में .
इच्छा होती है मिलकर सबसे कह दूं मन की सारी बात,
कि क्या चाहा था हो गया क्या देखो अब मेरे साथ .
मेरी चाह थी इस जीवन में कुछ ऊंचाईयों  को  छू  लूं,
उठ सकती नहीं सबसे ऊपर इस स्तर से तो उठ लूं.
पाकर थोड़ी सी सफलता प्रफुल्लित हो उठता है मन,
पा लूं मैं यदि पूर्ण सफलता खिल जायेगा ये जीवन.
,

8 टिप्‍पणियां:

दीप ने कहा…

बहुत सुन्दर
बहुत बहुत आभार

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

jarur mile aapko safalta...
taaki khil jaye aapka jeevan..:)

sundar abhivyakti...
kabhi hamare blog pe aayen..

राकेश कौशिक ने कहा…

"पा लूं मैं यदि पूर्ण सफलता खिल जायेगा ये जीवन"

शुभकामनाएं

प्रदीप कुमार ने कहा…

bahut achi abhivyakti..

क्षितिजा .... ने कहा…

bahut khoobsurat likha hai aapne shalini ... likhti rahiye ...

प्रेम सरोवर ने कहा…

जब प्रेम ही भगवान है तब सफलता अवश्य मिलेगी।। मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है।

सतीश सक्सेना ने कहा…

शीर्षक भी हिंदी में लिखती तो अच्छा लगता....हार्दिक शुभकामनायें

दीप्ति शर्मा ने कहा…

bahut sunder
bahut khub

mere blog par
"main"
kabhi yaha bhi aaye

aapko nav varsh ki hardik badhayi

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