मंगलवार, 17 नवंबर 2015

जन्मदिन ये मुबारक हो उसी इंदिरा की जनता को ,


 
अदा रखती थी मुख्तलिफ ,इरादे नेक रखती थी ,
वतन की खातिर मिटने को सदा तैयार रहती थी .
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मोम की गुड़िया की जैसी ,वे नेता वानर दल की थी ,,
मुल्क पर कुर्बां होने का वो जज़बा दिल में रखती थी .
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पाक की खातिर नामर्दी झेली जो हिन्द ने अपने ,
वे उसका बदला लेने को मर्द बन जाया करती थी .
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मदद से सेना की जिसने कराये पाक के टुकड़े ,
शेरनी ऐसी वे नारी यहाँ कहलाया करती थी .
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बना है पञ्च-अग्नि आज छुपी है पीछे जो ताकत ,
उसी से चीन की रूहें तभी से कांपा करती थी .
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जहाँ दोयम दर्जा नारी निकल न सकती घूंघट से ,
वहीँ पर ये आगे बढ़कर हुकुम मनवाया करती थी .
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कान जो सुन न सकते थे औरतों के मुहं से कुछ बोल ,
वो इनके भाषण सुनने को दौड़कर आया करती थी .
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न चाहती थी जो बेटी का कभी भी जन्म घर में हो ,
मिले ऐसी बेटी उनको वो रब से माँगा करती थी .
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जन्मदिन ये मुबारक हो उसी इंदिरा की जनता को ,
जिसे वे जान से ज्यादा हमेशा चाहा करती थी .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

3 टिप्‍पणियां:

Rushabh Shukla ने कहा…

आप सभी का स्वागत है मेरे इस #हिन्दी #ब्लॉग #मेरे #मन #की के नये #पोस्ट #मेरा #घर पर | ब्लॉग पर आये और अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें |

http://meremankee.blogspot.in/2015/11/mera-ghar.html
http://hindikavitamanch.blogspot.in/2015/11/mitti-ke-diye.html

Rushabh Shukla ने कहा…

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Dilbag Virk ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 19-11-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2165 में दिया जाएगा
धन्यवाद