बुधवार, 29 जून 2011

वो जैसे भंवर में फंसा कर गए.


ज़रा आये ठहरे चले फिर गए,
     हमारे दिलों में जगह कर गए.
न कह पाए मन की  न सुन पाए उनकी ,
   बस देखते आना जाना रह गए.

बिछाए हुए थे उनकी राहों में पलकें,
   नयन भी हमारे खुले रह गए.
न रुकना था उनको नहीं था ठहरना ,
  फिर आयेंगे कहकर चले वो गए.

न मिलने की चाहत न रुकने की हसरत,
   फिर आने का वादा क्यों कर गए.
हमें लौट कर फिर जीना था वैसे ,
   वो जैसे भंवर में फंसा कर गए.
         शालिनी कौशिक 

25 टिप्‍पणियां:

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति| धन्यवाद|

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

भँवरें गहरी होती है,
साँसे बहरी होती हैं।

शिखा कौशिक ने कहा…

शालिनी जी बहुत सुन्दर भावों को समेटा है इस कविता में .हार्दिक शुभकामनायें

आशुतोष की कलम ने कहा…

शहद जीने का मिला करता है थोडा थोडा,
जाने वालों के लिए दिल नहीं थोडा करते...

Raj ने कहा…

बेहद गहरी भावनाओं को अपने अन्दर समेटती हुए रचना

Sunil Kumar ने कहा…

ना मिलने की ...........यह भी मुहब्बत का एक मुकाम है | अच्छी पोस्ट बधाई

रविकर ने कहा…

आना

हँसना-मुस्कराना

बोलना बतियाना

क़ुबूल है |

जाना

दुखी होना

तड़पना

आंसू बहाना

भूल है ||

आएगा फिर

बस

जरा मशगूल है ||

अरे वो तो

आपकी ही

गली का धूल है ||

लौटकर आता ही होगा

मुस्कराइए |

जाइए एक कप चाय बनाइये |



(शास्त्री जी की तिपियाने वाली

कविता का असर कुछ ज्यादा हो गया है )

रेखा ने कहा…

एक अच्छी भावपूर्ण रचना.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सुंदर ...भावपूर्ण कविता

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत खूबसूरत रचना!

kshama ने कहा…

न मिलने की चाहत न रुकने की हसरत,
फिर आने का वादा क्यों कर गए.
हमें लौट कर फिर जीना था वैसे ,
वो जैसे भंवर में फंसा कर गए.
Ek kasak chhod gayeen ye panktiyan!

sm ने कहा…

touching poem

अजय कुमार ने कहा…

प्यार की सुंदर अनुभूति ,अच्छी रचना

Dilbag Virk ने कहा…

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच

Mukesh Kumar Mishra ने कहा…

सुन्दर रचना शालिनी जी।

हमें लौट कर फिर जीना था वैसे ,
वो जैसे भंवर में फंसा कर गए.


सुन्दर लगी।

vidhya ने कहा…

एक अच्छी भावपूर्ण रचना.

vidhya ने कहा…

आप का बलाँग मूझे पढ कर आच्चछा लगा ,

नश्तरे एहसास ......... ने कहा…

न मिलने की चाहत न रुकने की हसरत, फिर आने का वादा क्यों कर गए.हमें लौट कर फिर जीना था वैसे , वो जैसे भंवर में फंसा कर गए...
jitni khoobsurat panktiyaan utna hi dard mein lipti hui..
bahut sunder ma'am.

upendra shukla ने कहा…

bahut hi sundar kavita hai
"samrat bundelkhand"

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

dil ki tadap ko praabhavshali shabdo me prastut kiya hai.

Sachin Malhotra ने कहा…

भावपूर्ण रचना के लिए बधाई !
मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - सम्पूर्ण प्रेम...(Complete Love)

mahendra srivastava ने कहा…

भावपूर्ण रचना, बहुत सुंदर

kshama ने कहा…

Rachana behad sundar hai!
Aalekh pe comment nahee de paa rahee hun!

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

कोमल भावों की मखमली रचना

Surendra shukla" Bhramar"5 ने कहा…

शालिनी जी सुन्दर भाव ,प्रेम की निराली छटा बिखरी आँखें खुली की खुली रह गयीं -बधाई हो
शुक्ल भ्रमर ५
बिछाए हुए थे उनकी राहों में पलकें,
नयन भी हमारे खुले रह गए.

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