मंगलवार, 28 जून 2011

महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक कदम:महिलाओं को समर्पित देश का पहला हाट तैयार‏

 
नई दिल्ली महिलाओं को समर्पित देश में पहला महिला हाट जल्द ही गुलजार होने जा रहा है। स्टॉल सिर्फ महिलाओं को ही सामान की बिक्री के लिए आवंटित किए जाएंगे। साथ ही इनमें खरीददारी करने के लिए सिर्फ कपल्स को ही जाने की इजाजत होगी। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के मकसद से एमसीडी ने वर्ष 2007 में इसका निर्माण शुरू किया था। तत्कालीन मेयर आरती मेहरा ने इसकी नींव रखी थीं। गत महीने जब निर्माण कार्य संपन्न हुआ तो एमसीडी ने वह शर्ते भी तैयार कर ली जिसके आधार पर महिलाओं को स्टॉल आवंटित किए जाएंगे। राजधानी के दक्षिणी, बाहरी और पश्चिमी दिल्ली स्थित आईएनए, पीतमपुरा और जनकपुरी दिल्ली हाट की तर्ज पर एमसीडी ने महिला हाट तैयार किया है। आसिफ अली रोड की भूमिगत पार्किग के ऊपर बने इस हाट की खासियत यह होगी कि यहां के 39 स्टॉल सिर्फ महिलाओं को आवंटित किए जाएंगे। इसे वे चलाएंगी। खाने-पीने के सामान की बिक्री के लिए जो दो कैफेटेरिया बनाए गए हैं, इनका संचालन भी महिलाएं करेंगी। कैफेटेरिया का लाइसेंस दो साल के लिए एमसीडी जारी करेगी। हस्तकरघा सामान की प्रदर्शनी और बिक्री के लिए एक महिला को 30 दिन के लिए ही स्टॉल दिए जाएंगे। 80 फीसदी स्टॉल दिल्ली की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। बाकी स्टॉल अन्य राज्यों की महिलाओं के लिए होंगे। एक साल में कोई महिला सिर्फ एक बार ही स्टाल अपने नाम बुक करा सकेगी। स्टॉल के एवज में उन्हें एक हजार रुपये बतौर फीस के रूप में एमसीडी को देना होगा। सुबह 10 बजे से रात नौ बजे तक महिला हाट खुला रहेगा। एमसीडी के प्रवक्ता दीप माथुर बताते हैं कि इसका मकसद यह था कि दिल्ली के अन्य इलाकों की तरह मध्य दिल्ली में भी हाट हो। बाद में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के मकसद से इसे महिला हाट बनाने का फैसला लिया गया। यह बनकर तैयार हो चुका है। इसके आवंटन आदि की शर्ते बुधवार को स्थायी समिति की बैठक में प्रस्तुत की जाएंगी। स्थायी समिति व सदन से स्वीकृति मिलते ही महिला हाट में स्टॉल आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

आप ख़ुशी जी को अपने विचार लेख के सम्बन्ध में इस मेल पर भेज सकते हैं-media1602 @gmail .com
लेखिका _खुशबू [इन्द्री]{करनाल}
प्रस्तुति-शालिनी कौशिक 

9 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

ख़ुशी जी ख़ुशी है ||

आशुतोष की कलम ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रयास..
मगर इसका फायदा क्रीमीलेयर के उत्त्थान में ही ज्यादा होगा जो अपने अधिकारों से परिचित है..
कुछ ऐसा प्रयास ग्रामीण महिलाओं के उत्त्थान के लिए गावों में इस तरह के रिटेल आउटलेट बना के किया जा सकता है ..जिससे वास्तविक जरुरत जिन्हें है उनतक इसका लाभ पहुचे ..

रचना ने कहा…

great

शिखा कौशिक ने कहा…

bahut sarthak prastuti.khushi ji ko badhai.

रेखा ने कहा…

एक सार्थक प्रयास है . स्टाल लगाने वाली महिलाओं को शुभकामनायें .

मनोज कुमार ने कहा…

एक सराहनीय प्रयास।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर प्रयास है, खर्च करने से शक्ति तो बढ़ती है।

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

एक सार्थक प्रयास है . स्टाल लगाने वाली महिलाओं को शुभकामनायें .

anshumala ने कहा…

ये सफलता से चलता रहे और महिलाओ को इससे कुछ फायदा हो इसी की कमाना है |

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