सोमवार, 13 जून 2011

माचिस उद्योग है या धोखा उद्योग

पिछले कई महीनो से झेल रही हूँ इसीलिए आज लिख रही हूँ कि आज माचिस उद्योग अपने उपभोक्ताओं के साथ धोखा कर रहा है.हालाँकि ब्लॉग जगत में से अधिकांश लाइटर का इस्तेमाल करते होंगे किन्तु जहाँ तक मेरा मानना है मैं माचिस को इसके मुकाबले ज्यादा सही समझती हूँ मैंने भी अपनी आंटी के यहाँ लाइटर इस्तेमाल किया और या तो ये कहें कि मुझे इस्तेमाल करना नहीं आया या कहें कि उसे इस्तेमाल करने के लिए बहुत ताक़त चाहिए तो मुझमे वो भी नहीं है और मैं इसी वजह से कह लें तब भी माचिस को ही ज्यादा महत्व देती हूँ.
              चलिए अब सुनिए मेरी आप बीती माचिस  के बारे में.मेरे कितने ही कपड़ों में इसकी तीली का मसाला उछल कर छेद कर चुका है और एक बार तो मेरी आँख भी इसके मसाले के हमले से बाल बाल बच गयी.इतना कुछ तो फिर भी माचिस के ब्रांड पलट पलट कर हम बर्दाश्त करते रहे किन्तु अब तो हद हो गयी है यदि ४-५ तीली न जला लो तो आप गैस जला ही नहीं सकते और हमारे क्षेत्र में आने वाली एक मात्र आई.एस.आई.ब्रांड ''ऊँट  ''भी इसी श्रेणी में है.उसे हम बहुत समय पहले उसके इन्ही कमियों के कारण छोड़ चुके हैं और अब यहाँ आने वाली ''ढोलक.मिर्च '''आदि ब्रांड भी इसी श्रेणी में गिरती दिख रही हैं.एक बार तो किसी उपभोक्ता ने किसी माचिस कम्पनी पर माचिस में कम तीली आने पर मुकदमा भी किया था किन्तु हमारे क्षेत्र में ये काम मुश्किल है क्योंकि उपभोक्ता अदालते जिला स्तर पर होती हैं और उनमे जाकर शिकायत करने का समय निकलना हर आदमी के वश में नहीं होता और इसी कारण ये उद्योग गलत काम करके भी साफ बचे रहते हैं.
    किसी माचिस में मसाला आग नहीं पकड़ता और किसी माचिस में मसाला जलता रहता है और उसकी लकड़ी आग नहीं पकडती.हालाँकि है छोटी से चीज़ किन्तु बहुत काम की चीज़ है और इसमें यदि कोई भी बेईमानी  सामने आती है तो खून खोल उठता है और वह भी बिना चूल्हा जलाये जबकि चूल्हा जलाने को तो माचिस चाहिए.
                               शालिनी  कौशिक  

15 टिप्‍पणियां:

दिगम्बर नासवा ने कहा…

माचिस के इतने पहलुओं पर पहले कभी गौर नही किया ... अच्छी पोस्ट ....

Ravikar ने कहा…

माचिस के उपयोग अनंत

चूल्हा जलाना एक काम
आग लगाना दूजा |
शमशान पर मुर्दा फूंके
कर लो चाहे पूजा.||
मिलावटखोरों के खिलाफ भी एक अभियान चलाना पड़ेगा

मनोज कुमार ने कहा…

लाइटर तो गैस के चूल्हा जलाने काम आता है। मचिस का प्रयोग पूजा घर में प्रतिदिन करना ही पड़ता है। और जिन मुसीबतों से आप दो चार हो रहीं है वह हमारा भी पीछा नहीं छोड़ती। हम भी रोज़ इन्हें कोसते रहते हैं।

मनोज अबोध ने कहा…

मेरे ब्‍लाग पर आपके आगमन का धन्‍यवाद ।
आपको नाचीज का कहा कुछ अच्‍छा लगा, उसके लिए हार्दिक आभार

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

लीगल सैल से मिले वकील की मैंने अपनी शिकायत उच्चस्तर के अधिकारीयों के पास भेज तो दी हैं. अब बस देखना हैं कि-वो खुद कितने बड़े ईमानदार है और अब मेरी शिकायत उनकी ईमानदारी पर ही एक प्रश्नचिन्ह है

मैंने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर श्री बी.के. गुप्ता जी को एक पत्र कल ही लिखकर भेजा है कि-दोषी को सजा हो और निर्दोष शोषित न हो. दिल्ली पुलिस विभाग में फैली अव्यवस्था मैं सुधार करें

कदम-कदम पर भ्रष्टाचार ने अब मेरी जीने की इच्छा खत्म कर दी है.. माननीय राष्ट्रपति जी मुझे इच्छा मृत्यु प्रदान करके कृतार्थ करें मैंने जो भी कदम उठाया है. वो सब मज़बूरी मैं लिया गया निर्णय है. हो सकता कुछ लोगों को यह पसंद न आये लेकिन जिस पर बीत रही होती हैं उसको ही पता होता है कि किस पीड़ा से गुजर रहा है.

मेरी पत्नी और सुसराल वालों ने महिलाओं के हितों के लिए बनाये कानूनों का दुरपयोग करते हुए मेरे ऊपर फर्जी केस दर्ज करवा दिए..मैंने पत्नी की जो मानसिक यातनाएं भुगती हैं थोड़ी बहुत पूंजी अपने कार्यों के माध्यम जमा की थी.सभी कार्य बंद होने के, बिमारियों की दवाइयों में और केसों की भागदौड़ में खर्च होने के कारण आज स्थिति यह है कि-पत्रकार हूँ इसलिए भीख भी नहीं मांग सकता हूँ और अपना ज़मीर व ईमान बेच नहीं सकता हूँ.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सचेत करती नई जानकारी लिए पोस्ट....धन्यवाद

जीवन का उद्देश ने कहा…

आदाब, शालिनी जी, आप ने सही कहा । आज प्रत्येक चीज़ जो हम तक पहुंचती है, उस का हाल माचिस जैसा है। नकली, मिलावट, 2 नम्बर का जमाना है।

जीवन का उद्देश ने कहा…

आदाब, शालिनी जी, आप ने सही कहा । आज प्रत्येक चीज़ जो हम तक पहुंचती है, उस का हाल माचिस जैसा है। नकली, मिलावट, 2 नम्बर का जमाना है।

Vivek Jain ने कहा…

अरे,ऐसी समस्या से तो कभी सामना नहीं हुआ, और न हे कभी ब्रांड पर ज्यागा ध्यान दिया,


- विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

सचमुच, यह चिंता की बात है।

---------
सलमान से भी गये गुजरे...
नदी : एक चिंतन यात्रा।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

सचमुच, यह चिंता की बात है।

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सलमान से भी गये गुजरे...
नदी : एक चिंतन यात्रा।

ZEAL ने कहा…

माचिस के बनने में यदि व्यवसायी सजगता से काम लें तो बहुत से हादसों को टाला जा सकता है।

Jyoti Mishra ने कहा…

very new topic to read about.... but it seems to be a serious problem.

Thanks for sharing it with all of us !!!

mahendra srivastava ने कहा…

अच्छा विषय, गंभीर मुद्दा है।

Dr Varsha Singh ने कहा…

बहुत अच्छा मुद्दा उठाया आपने ------- हार्दिक बधाई.

... पता ही नहीं चला.

बारिश की बूंदे  गिरती लगातार  रोक देती हैं  गति जिंदगी की  और बहा ले जाती हैं  अपने साथ  कभी दर्द  तो  कभी खुशी भी  ...