अखिल जगत में राम नारी का इसलिए अभिमान हैं .

 




मर्यादा से बंधे हुए वे पुरुषोत्तम भगवान हैं ,

दशरथ जी के राजदुलारे मनभावन श्रीराम हैं .

...............................

मात सुमित्रा कैकयी का वे कौशल्या सम मान करें ,

भरत शत्रुघ्न लखन लाल को ये प्रभु का वरदान हैं .

.............................

पालन करें पितु वचन का ब्रह्म ऋषि के साथ चले ,

करते वध हैं राक्षसों का रखते यज्ञ का ध्यान हैं .

.............................

ब्रह्म ऋषि की आज्ञा मानी धनुष यज्ञ में भाग लिया ,

सीता से नाता जोड़ें वे रखते क्षत्रिय मान हैं .

...................

वचन पिता ने दिए मात को पूरा उनको राम करें ,

राज-पाट से श्रेष्ठ ह्रदय में तब वन का स्थान है .

........................

लखन सिया के संग संग वन में ऋषियों के उपदेश सुनें,

रक्षा करते सभी जनों की करते नहीं गुमान हैं .

.................

न्याय दिलाएं मित्र को अपने बालिवध का काज करें ,

मित्रता का समस्त विश्व में सर्वश्रेष्ठ प्रमाण हैं .

..........

सिया हरण का सबक सिखाने रावन का संहार करें ,

अखिल जगत में राम नारी का इसलिए अभिमान हैं .

... 

शालिनी कौशिक

[कौशल ]

टिप्पणियाँ

Digvijay Agrawal ने कहा…
 आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शनिवार 27 जून, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
हरीश कुमार ने कहा…
बहुत सुंदर रचना

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

''ऐसी पढ़ी लिखी से तो लड़कियां अनपढ़ ही अच्छी .''

नारियां भी कम भ्रष्ट नहीं.

मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.