मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.












''तुम्हारे दर पर आने तक बहुत कमजोर होता हूँ.
मगर दहलीज छू लेते ही मैं कुछ और होता हूँ.''
        ''अशोक 'साहिल'जी की  ये पंक्तियाँ कितनी अक्षरशः खरी उतरती हैं दोस्ती जैसे पवित्र शब्द और भावना पर .दोस्ती वह भावना है जिसके बगैर यदि मैं कहूं कि एक इन्सान की जिंदगी सिवा तन्हाई के कुछ नहीं है तो शायद अतिश्योक्ति नहीं होगी.ये सत्य है कि एक व्यक्ति जो भावनाएं एक दोस्त के साथ बाँट सकता है वह किसी के साथ नहीं बाँट सकता.दोस्त से  वह अपने सुख दुःख बाँट सकता है ,मनोविनोद कर सकता है.सही परामर्श ले सकता है.लगभग सभी कुछ कर सकता है.मित्र की रक्षा ,उन्नति,उत्थान सभी कुछ एक सन्मित्र पर आधारित होते हैं -
''कराविव शरीरस्य नेत्र्योरिव पक्ष्मनी.
अविचार्य प्रियं कुर्यात ,तन्मित्रं मित्रमुच्यते..''                                                                                                           
अर्थार्त जिस प्रकार मनुष्य के दोनों हाथ शरीर की अनवरत रक्षा करते हैं उन्हें कहने की आवश्यकता नहीं होती और न कभी शरीर ही कहता है कि जब मैं पृथ्वी पर गिरूँ तब तुम आगे आ जाना और बचा लेना ;परन्तु वे एक सच्चे मित्र की भांति सदैव शरीर की रक्षा में संलग्न रहते हैं इसी प्रकार आप पलकों को भी देखिये ,नेत्रों में एक भी धूलि का कण चला जाये पलकें तुरंत बंद हो जाती हैं हर विपत्ति से अपने नेत्रों को बचाती हैं इसी प्रकार एक सच्चा मित्र भी बिना कुछ कहे सुने मित्र का सदैव हित चिंतन किया करता है..
   दोस्त कहें या मित्र बहुत महत्वपूर्ण  कर्त्तव्य निभाते हैं ये एक व्यक्ति के जीवन में .एक सच्चा मित्र सदैव अपने मित्र को उचित अनुचित की समझ देता है वह नहीं देख सकता कि उसके सामने उसके मित्र का घर बर्बाद होता रहे या उसका साथी कुवास्नाएं और दुर्व्यसनो का शिकार बनता रहे .
   तुलसीदास जी ने मित्र की जहाँ और पहचान बताई है वहां एक यह भी है -
  '' कुपंथ निवारी सुपंथ चलावा ,
   गुण प्रगटही अवगुनही बुरावा .''
तात्पर्य यह है कि यदि हम झूठ बोलते हैं ,चोरी करते हैं,धोखा देते हैं या हममे इसी प्रकार की बुरी आदतें हैं तो एक श्रेष्ठ मित्र का कर्त्तव्य है कि वह हमें सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे.हमें अपने दोषों के प्रति जागरूक कर दे .तथा उनके   दूर करने का निरंतर प्रयास करता रहे .
विपत्ति का समय ऐसा होता है कि न चाहकर भी व्यक्ति सहारे की तलाश में लग जाता है.निराशा  के  अंधकार में सच्चा मित्र ही आशा की किरण होता है .वह अपना सर्वस्व अर्पण कर भी अपने मित्र की सहायता करता  है .रहीम ने लिखा है-
''रहिमन सोई मीत है भीर परे ठहराई,
मथत मथत माखन रहे वही मही बिलगाई .''
मित्रता के लिए तो कहा ही ये गया है कि ये तो मीन और नीर जैसी होनी चाहिए ;सरोवर में जब तक जल रहा तब तक मछलियाँ क्रीडा और मनोविनोद करती रही परन्तु जैसे जैसे तालाबपर विपत्ति आनी आरम्भ हुई मछलियाँ उदास रहने लगी  और पानी ख़त्म होते होते उन्होंने भी अपने प्राण त्याग दिए ये होती है मित्रता जो मित्र पर आई विपत्ति में उससे अलग नहीं हो जाता बल्कि उसका साथ देता   है.तुलसीदास जी ने सच्चे मित्र की कसौटी विपत्ति ही बताई है -
''धीरज धर्म मित्र अरु नारी,आपद कल परखिये चारी .
जे न मित्र दुःख होंहि दुखारी, तिन्ही विलोकत पातक भारी''
 इसीलिए संस्कृत में कहा गया है कि ''आपद्गतं च न जहाति ददति काले ''अर्थात विपति के समय सच्चा मित्र साथ न नहीं छोड़ता .
मित्र का कर्त्तव्य है कि वह अपने मित्र के गुणों को प्रकाशित करे जिससे कि उसके गुणों का प्रकश देश समाज में फैले न कि उसके अवगुणों को उभरे जिससे उसे समाज में अपयश का सामना करना पड़े.वह मित्र के गुणों का नगाड़े की चोट पर गुणगान करता है और उन अवगुणों को दूर करने का प्रयास करता है जो उसे समाज में अपमान व् अपयश देगा .तुलसीदास जी कहते हैं-
''गुण प्रकटहिं ,अवगुनही दुरावा ''
      अथवा
''गुह्यानि गूहति गुणान प्रकति करोति  ''
    आज ke  बहुत से मित्र मित्रता के नाम पर कलंक हैं और यदि यह कहा जाये कि वे स्वार्थी हैं तो शायद अतिश्योक्ति नहीं होगी.वे अपने स्वार्थ के लिए अपने मित्र को गलत कार्य के लिए उकसाते हैं और चने के झड पर चढ़ा कर अर्थात जो वह नहीं है वह होने का विश्वास दिला कर उससे गलत काम कराते हैं ऐसे मित्रों को यदि ''चापलूस शत्रु ''की संज्ञा दी जाये तो गलत नहीं होगा ऐसे भी प्रमाण हैं कि आज तक यदि किसी वीर की मृत्यु हुई  या वह किसी बंधन में फंसा तो मित्र के द्वार ही .उर्दू का एक शेर है जो इसी प्रसंग पर प्रकाश डालता है-
खाके जो तीर देखा कमीगाह की तरफ ,
अपने ही दोस्तों से मुलाकात हो गयी.
   कमीगाह उस स्थान को कहते हैं जहाँ से छुप कर तीर चलाया जाता है.पीछे से किसी ने तीर चलाया पीठ में आकर लगा भी ,दर्द हुआ ,पीछे मुड़कर कमीगाह की तरफ जब देखा तो वहां कोई अपना ही दोस्त बैठा हुआ यह तीरंदाजी करता हुआ दिखाई दिया.इसीलिए ऐसे मित्रों को मित्र की श्रेणी  में ही नहीं रखते .
मित्र के निम्न लक्षण होते हैं जिन्हें भृत हरि ने एक श्लोक में लिखा है-
''पापन्निवार्यती  ,योज्यते हिताय ;
गह्यानी गूहति,गुणान प्रगति करोति .''
आपद्गतं च न जहाति ,ददाति काले ,
सन्मित्र लक्ष्नामिदम प्रवदन्ति सन्तः.''
अर्थात जो बुरे मार्ग पर चलने से रोकता है हितकारी कामों में लगता है,गुप्त बातों को छिपाता है तथा गुणों को प्रगट करता है आपति के समय साथ नहीं छोड़ता .
मित्र को यदि वह  मित्र संबंधों में स्थायित्व चाहता है तो ध्यान रखना चाहिए कि वह मित्र से कभी वाणी का विवाद न करे ,पैसे का सम्बन्ध भी अधिक न करें,तथा मित्र की पत्नी से कभी परोक्ष में संभाषण न करे,अन्यथा मैत्री सम्बन्ध चिरस्थायी नहीं रह सकते जैसा कि इस श्लोक में कहा गया है-
''यदिछेत विपुलाम प्रीती ,त्रीणि तत्र न कारयेत .
वाग्विवादोंअर्थम् सम्बन्धः एकान्ते दार भाषणम .''
इस   सम्बन्ध में महाकवि बिहारी की  उक्ति भी प्रशंसनीय है-
''जो चाहो चटक न घटे ,मिलो होए न मित्त ,
राजू राजसु न छुवाइए नेह चीकने चित्त .
                  shalini kaushik  
मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.

टिप्पणियाँ

nilesh mathur ने कहा…
मित्रता दिवस पर एक बेहतरीन पोस्ट।
Sunil Kumar ने कहा…
सार्थक पोस्ट आभार......
फ्रेंडशिप डे पर आपको हार्दिक शुभकामनाये एवं बधाई
S.N SHUKLA ने कहा…
खूबसूरत प्रस्तुति,बधाई ,मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
काफी अच्छा आलेख.

दोस्तों, आप सभी को आज का दोस्ती वाला दिन मुबारक हो! क्या दोस्ती के लिए एक दिन ही निश्चत है? सच्ची और पवित्र दोस्ती निभाने के लिए हर रोज दोस्ती का दिन होता है. जब भी आपके किसी दोस्त को आपकी मदद की जरूरत हो. तब ही उसकी यथासंभव मदद करना ही पवित्र दोस्ती है.
सुंदर पोस्ट...शुभकामनायें आपको भी...
मनोज कुमार ने कहा…
मित्र दिवस पर इससे बढिया पोस्ट मैंने आज कहीं नहीं पढ़ा। बहुत ही खूबसूरती से आपने न सिर्फ़ मित्रता को परिभाषित किया है बल्कि इसके विभिन्न पहलुओं पर विचार भी किया है। साथ ही आपने जो बीच-बीच में कोटेशन दिए वे तो पोस्ट की शोभा में चार चांद लगा रहे हैं।

एक बात खास तौर इंगित करना चाहूंगा, वह यह कि पोस्ट की रफ़्तार तो सौ मील वाली है। धाराप्रवाह पढ़ गया।

बहुत सुंदर।

आपको भी मित्र दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं।
शिखा कौशिक ने कहा…
फ्रेंडशिप डे पर आपको हार्दिक शुभकामनाये एवं बधाई
"पलाश" ने कहा…
Wish you a very happy friendship day .........
रेखा ने कहा…
सार्थक जानकारियों और मित्रता की महत्ता को उजागर करती हुई पोस्ट . मित्रता दिवस की शुभ कामनाये.
मित्रता पर लिखा बड़ा ही सारगर्भित आलेख।
kumar ने कहा…
खूबसूरत पोस्ट....
आपको मित्रता दिबस की बधाइयाँ......
Bhola-Krishna ने कहा…
शालिनी जी
तुलसी, रहीम ,बिहारी ,भृतहरि के सूत्रों के साथ "साहिल जी" का प्रमाण देते हुए आप के सन्देश में सच्चे मित्र के लक्षणों की प्रस्तुति अनूठी है ! सराहनीय है !इस सुंदर संदेश के लिए बधाई ,धन्यवाद और हमारा हार्दिक आभार !
आपका उर्दू और हिन्दी, दोनों भाषाओं का कमांड भी सराहनीय है ! हम दोनों की शुभ कामनाएं ! ऐसे ही लिखती रहें
DR. ANWER JAMAL ने कहा…
फ्रेंडशिप डे की शुभकामनाये
ब्लॉगर्स मीट वीकली में आपका स्वागत है।
http://www.hbfint.blogspot.com/
बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
शुभकामनाएँ!
सदा ने कहा…
शालिनी जी, बहुत ही खूबसूरती से आपने प्रत्‍येक शब्‍द व उसके भाव को स्‍पष्‍ट करते हुये मित्रता के बारे में बेहतरीन प्रस्‍तुति दी है जिसके लिये बधाई स्‍वीकार करें ...बहुत-बहुत शुभकामनाओं के साथ आभार ।
vidhya ने कहा…
मित्रता दिवस पर बेहतरीन पोस्ट।
Jyoti Mishra ने कहा…
an awesome post on friendship day :)
Nice read
Happy friendship day to u too
amrendra "amar" ने कहा…
आपको भी मित्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं।
Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…
आपको भी हार्दिक शुभकामनाये एवं बधाई!!
POOJA... ने कहा…
Happy friendship day...
bahut hi pyaaraa aalekh hai...
n specially iska execution... behatareen...
Vikas Garg ने कहा…
''तुम्हारे दर पर आने तक बहुत कमजोर होता हूँ.
मगर दहलीज छू लेते ही मैं कुछ और होता हूँ.''
bhut sundar shabd
vikasgarg23.blogspot.com
मित्रता दिवस पर बहुत ही अच्छा , जानकारी परक एवं शोधपूर्ण लेख ..
सच्चा मित्र बड़े भाग्य से मिलता है .........
मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
RAVI BECK (Anuj hai) ने कहा…
वाह! शालिनी जी मित्रता की सही परिभाषा..पढ़ कर दिल को सुकून पहुंचा देर से सही आपको मित्रता दिवस पर बहुत सारी हार्दिक शुभकामनायें

"किसी का ये सोचकर साथ मत त्याग देना कि उसके पास कुछ नहीं है आपको साथ देने के लिए ये सोच कर साथ निभाना कि उसके पास कुछ नहीं है आपके सिवा खोने के लिए"
gohost ने कहा…
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ZEAL ने कहा…
मित्रता दिवस पर बेहतरीन आलेख के लिए बधाई , लेकिन मुझे यहाँ आते-आते तो रक्षाबंधन का शुभ दिवस आ गया ! आपको राखी की शुभकामनाएं !
S.N SHUKLA ने कहा…
शालिनी जी
रक्षाबंधन और स्वाधीनता दिवस पर्वों की शुभकामनाओं के साथ आपकी खूबसूरत प्रस्तुति के लिए बधाई
Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…
सार्थक पोस्ट आभार

आज का आगरा ,भारतीय नारी,हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेशनल , ब्लॉग की ख़बरें, और एक्टिवे लाइफ ब्लॉग की तरफ से रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं

सवाई सिंह राजपुरोहित आगरा
आप सब ब्लॉगर भाई बहनों को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई / शुभकामनाएं
aapko bhi hardik badhai....

bahut acche se paribhashit kiya hai is pawan rishte ko ....sabse alag sabse durlabh rishta hai ye.....

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