सोमवार, 1 अगस्त 2011

कहाँ कल थे निर्माण कहाँ आज पहुंचे हाल

बहुत घमंड में रहते हैं आज के लोग कि हम आज विकास के मामले में तकनीक के मामले में हर तरह से  पुराने समय से आगे हैं हमने आज जो हासिल किया है उसके बारे में तो पुँराने लोग सोच भी नहीं सकते थे और इसी का परिणाम देखो आज कितनी ऊँची ऊँची बिल्डिंग्स पलक झपकते ही खड़ी हैं और ऐसी बिल्डिंग्स खड़े करने में पुराने  लोगों को सालों लग जाते थे और हम नए लोग आज इन्हें पल भर में खड़ी कर रहे हैं.
      पर आज के हालत उनके घमंड को तोड़ भी पल में ही रहे हैं आज के अमर उजाला में मुख्य पृष्ठ पर ''निर्माणाधीन लिंटर ढहने से दो की मौत ,८ घायल ''समाचार दिखा रहा है  आज के निर्माणों को आईना .भोपा[मुज़फ्फरनगर]के गाँव नंगला बुजुर्ग के क्षेत्र में पंचायत सदस्य अमीर हसन के मकान की पहली मंजिल पर लिंटर डाला जा रहा था इसी दौरान शाम करीब चार बजे निर्माणाधीन मकान की दीवार गिर गयी भरभराकर लिंटर भी गिर गया ,परिवार के सदस्य ,राजमिस्त्री और मजदूर इसमें दब गए .शीबा और मुस्कान दो छोटी बच्चियां इसमें मर गयी .
  ये तो मात्र एक उदाहरण है आज के निर्माण का और आज के निर्माण की खूबी ये है कि ये डेढ़ इंटी की दीवार में बनाये जाते हैं और ये दीवारें जितनी मजबूत  होती हैं इसका उदाहरण हमारे सामने आये दिन कभी समाचार पत्रों से तो कभी अपने आस पास की  घटनाओं से मिलता रहता है और यदि हम पहले के निर्माणों पर नज़र डालें तो दीवारें ऐसी होती थी कि आज के तो घरों के कमरे  तक उनमे निकल आयेंगे और ये दीवारें भूकंप  की बड़ी से बड़ी मार भी झेल जाती थी और आज की दीवारें लिंटर का बोझ  भी नहीं झेल पाती .
      क्या हमें आज के इन निर्माण पर गर्व करना चाहिए या पुराने  निर्माणों से कुछ सीख ग्रहण करनी चाहिए? 
                 शालिनी कौशिक
       

9 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

पैसा कमा लो या जान गँवा लो।

रविकर ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||

बधाई स्वीकार करें ||

शिखा कौशिक ने कहा…

agree with you .

smshindi By Sonu ने कहा…

आदरणीया .शालिनी कौशिकजी
बहुत हि शानदार पस्तुति
आपको और आपके परिवार को हरियाली तीज के शुभ अवसर पर बहुत बहुत शुभकामनायें ....

smshindi By Sonu ने कहा…

पोस्ट पर आपका स्वागत है
दोस्ती - एक प्रतियोगिता हैं

kanu..... ने कहा…

sacchai ko samne la kar khada kar diya aapne.
aabhar

रेखा ने कहा…

सही कहा समझ में नहीं आता है कभी -कभी कि तरक्की हमारे लिए अच्छी है या फिर नुकसानदायक . शायद इस क्षेत्र में पुरानी तकनीकी ही ज्यादा कारगर और बेहतर साबित होगी

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

अच्छा आलेख है!
--
चौमासे में श्याम घटा जब आसमान पर छाती है।
आजादी के उत्सव की वो मुझको याद दिलाती है।।....

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

विचारणीय बात है.... इन्सान की ज़िन्दगी की कीमत कब पहचानेंगें हम ...

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